Hindi Christian Song | जीवन के सही मार्ग में प्रवेश कर लिया है हमने (Lyrics)

Hindi Christian Song | जीवन के सही मार्ग में प्रवेश कर लिया है हमने (Lyrics)

किसी को ख़बर नहीं,
ज़िंदगी देगी इंसाँ को कैसी मुश्किलें,
या किस तरह के शुद्धिकरण से गुज़रेगा वो।
किसी के काम में,
तो किसी के भविष्य की संभावनाओं में आती मुश्किलें,
पैदा हुए जिस परिवार में या शादीशुदा जीवन में आती हैं मुश्किलें।
उनसे अलग क्या है? हम इस समूह के लोग।
उनसे अलग क्या है? हम इस समूह के लोग,
पीड़ित हो रहे हैं आज परमेश्वर के वचन के लिये।

परमेश्वर की सेवा करने वाले हम लोगों ने,
सही हैं मुश्किलें परमेश्वर में विश्वास के मार्ग पर।
और यही वो मार्ग है हर विश्वासी चलता है जिस पर,
राह जो है कदमों के नीचे हमारे।
ये सच है इसी क्षण से आधिकारिक तौर पर
विश्वास करना आरंभ करते हम परमेश्वर पे,
उठाते पर्दा इंसान के रूप में अपनी ज़िंदगी से,
प्रवेश करते जीवन के सही मार्ग में।

अब हम हैं परमेश्वर के इंसान के संग रहने के सही मार्ग पर।
ये सही मार्ग है।
अब हम हैं परमेश्वर के इंसान के संग रहने के सही मार्ग पर।
ये सही मार्ग है,
आम इंसान जिस पर चलता है।

परमेश्वर की सेवा करने वाले हम लोगों ने,
सही हैं मुश्किलें परमेश्वर में विश्वास के मार्ग पर।
और यही वो मार्ग है हर विश्वासी चलता है जिस पर,
राह जो है कदमों के नीचे हमारे।
ये सच है इसी क्षण से आधिकारिक तौर पर
विश्वास करना आरंभ करते हम परमेश्वर पे,
उठाते पर्दा इंसान के रूप में अपनी ज़िंदगी से,
प्रवेश करते जीवन के सही मार्ग में।

अब हम हैं परमेश्वर के इंसान के संग रहने के सही मार्ग पर।
ये सही मार्ग है।
अब हम हैं परमेश्वर के इंसान के संग रहने के सही मार्ग पर।
ये सही मार्ग है,
आम इंसान जिस पर चलता है।

“मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना” से

यहाँ पर समृद्ध ईसाई गीत हैं, जो आपके लिए एक नया दृश्य-श्रव्य मनोरंजन लाता हैं।

सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में

वर्तमान धारा में, हर एक व्यक्ति जो सच में परमेश्वर से प्रेम करता है उसके पास परमेश्वर द्वारा उसे पूर्ण किए जाने का अवसर होता है। भले ही वे युवा हों या वृद्ध, जब तक वे अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके लिए सम्मान रखते हैं, वे उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेंगे। परमेश्वर लोगों को उनके भिन्न भिन्न कार्यों के अनुसार पूर्ण करता है। जब तक तू अपने सामर्थ्य में सब कुछ करता है और अपने आपको परमेश्वर के कार्य हेतु समर्पित करते है तो तू उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेगा। वर्तमान समय में तुम लोगों में से कोई भी पूर्ण नहीं है। कभी कभी तुम लोग एक प्रकार का कार्य करने में सक्षम होते हो और कभी कभी दो प्रकार के कार्य करने में सक्षम होते हो; जब तक तुम लोग अपना सारा सामर्थ्य परमेश्वर को दे देते हो और अपने आपको उसके लिए खपा देते हो, तब अंत में तुम सब परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाओगे। पढना जारी रखे

Hindi Gospel Movie “द्वार पर दस्तक” क्लिप 2 – प्रभु का स्‍वागत करने में कौन सी गलतियाँ सबसे आसानी से हो जाती हैं?

Hindi Gospel Movie “द्वार पर दस्तक” क्लिप 2 – प्रभु का स्‍वागत करने में कौन सी गलतियाँ सबसे आसानी से हो जाती हैं?

धार्मिक मण्डलियों में कई आस्‍थावान लोग, पादरियों और एल्‍डरों की कही ऐसी बातों पर विश्‍वास करते हैं, कि “परमेश्‍वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में हैं। परमेश्‍वर के किसी भी वचन का बाइबल के बाहर दिखाई होना असंभव है।” मगर, क्या इस दावे के पीछे कोई बाइबल संबंधी कोई आधार है? क्‍या प्रभु यीशु ने ये वचन कहे थे? प्रकाशितवाक्‍य में कई बार यह भविष्‍यवाणी की गई है, “जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।” प्रभु के वचन इसे बहुत स्‍पष्‍टता से कहते हैं: जब अंत के दिनों में प्रभु लौटेगा, तो वह फिर से बोलेगा। प्रभु के आगमन का स्‍वागत करने के मामले में यदि हम बाइबल से दूर नहीं जाते हैं और उस बात की खोज नहीं करते हैं जो पवित्रात्मा कलीसियाओं से कहता है, तो क्‍या हम प्रभु का स्‍वागत कर पाएँगे?

अनुशंसित: Hindi Bible Study – New Understanding of the Bible – Christian Essentials

सुसमाचार से सम्बन्धित सत्य

प्रश्न 4: हम सभी ने कई वर्षों तक प्रभु में विश्वास किया है, और प्रभु के लिए अपने कार्य में हमेशा पौलुस के उदाहरण का पालन किया है। हम प्रभु के नाम और उनके मार्ग के प्रति निष्ठावान रहे हैं, और धार्मिकता का ताज निश्चय ही हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। आज, हमें केवल प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने और उनकी वापसी की ओर देखने की आवश्यकता है। केवल इस प्रकार से ही हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाइबल में ऐसा कहा गया है कि “मेरी बाट जोहनेवाले कभी लज्जित न होंगे” (यशायाह 49:23)। हमें प्रभु के वादे में विश्वास है: वे अपने लौटने पर हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाएँगे। क्या इस ढंग से कार्य-अभ्यास करने में वास्तव में कुछ गलत हो सकता है?

उत्तर: प्रभु के आगमन के लिए प्रतीक्षा करने में, ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि सीधे स्वर्ग का राज्य में ले जाए जाने के लिए उन्हें केवल प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने और प्रभु के आगमन पर पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करने की जरूरत है। इस तरह से कार्य-अभ्यास करना उन्हें सही लगता है, और इससे कोई भी असहमत नहीं है। तब भी परमेश्वर में विश्वास करने वाले हम लोगों को हर चीज में सत्य की तलाश करनी चाहिए। हालांकि इस तरह से कार्य-अभ्यास करना लोगों की अवधारणाओं के अनुरूप है, किंतु क्या यह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप भी है? मुझे लगता है हमें जानना चाहिए कि: परमेश्वर के वचन हमारे कार्यों के सिद्धान्त हैं, ये वे आदर्श हैं जिनसे सभी लोगों, वस्तुओं और विषयों को मापा जाता है। यदि हम परमेश्वर के वचनों के अनुसार कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से हमें परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त होगी। यदि हम परमेश्वर के वचनों के खिलाफ जाएंगे, और अपनी स्वयं की अवधारणाओं और कल्पनाओं के अनुसार कार्य करेंगे, तो निश्चित रूप से परमेश्वर हमसे घृणा करेंगे और हमें अस्वीकृत कर देंगे। क्या प्रभु की बाट जोहने और प्रतीक्षा करने और उनके लिए कठिन परिश्रम करने से हमें वास्तव में सीधे स्वर्ग का राज्य में ले जाया जा सकता है? आइए हम देखें कि मत्ती 7:21-23 में प्रभु यीशु ने क्या कहा है। “जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु!’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा: परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की? और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला?’ और तेरे नाम से बहुत से आश्‍चर्यकर्म नहीं किए? तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, ‘मैं ने तुम को कभी नहीं जाना: हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ’” (मत्ती 7:21-23)। प्रभु यीशु के वचनों में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु ने केवल यह कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि जो लोग प्रभु यीशु के नाम के प्रति निष्ठावान हैं और प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, वे सब पुरस्कृत होंगे और स्वर्ग का राज्य में प्रवेश करेंगे। पढना जारी रखे

सुसमाचार से सम्बन्धित सत्य

प्रश्न 6: बाइबल कहती है कि प्रभु यीशु का बपतिस्मा होने के बाद, स्वर्ग के द्वार खुल गए थे, और पवित्र आत्मा एक कबूतर की तरह प्रभु यीशु पर उतर आया था, एक आवाज ने कहा था: “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ” (मत्ती 3:17)। और हम सभी विश्वासी मानते हैं कि प्रभु यीशु ही मसीह यानी परमेश्वर के पुत्र हैं। फिर भी आप लोगों ने यह गवाही दी है कि देहधारी मसीह परमेश्वर का प्रकटन यानी स्वयं परमेश्वर हैं, यह कि प्रभु यीशु स्वयं परमेश्वर हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर भी स्वयं परमेश्वर हैं। यह बात हमारे लिए काफ़ी रहस्यमयी है और हमारी पिछली समझ से अलग है। तो क्या देहधारी मसीह स्वयं परमेश्वर हैं या परमेश्वर के पुत्र हैं? दोनों ही स्थितियां हमें उचित लगती हैं, और दोनों ही बाइबल के अनुरूप हैं। तो कौन सी समझ सही है?

उत्तर: आप लोगों ने जो सवाल उठाया है ठीक वही सवाल है जिसे ज्यादातर विश्वासियों को समझने में परेशानी होती है। जब देहधारी प्रभु यीशु मानवजाति के छुटकारे का कार्य करने के लिए आये थे, तो लोगों के बीच प्रकट होकर कार्य करते हुए, परमेश्वर मनुष्य के पुत्र बन गए। उन्होंने न केवल अनुग्रह के युग का आरंभ किया, बल्कि एक नए युग की भी शुरुआत की जिसमें परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच रहने के लिए मनुष्यों की दुनिया में आये। पूरी श्रद्धा के साथ, मनुष्य ने प्रभु यीशु को मसीह यानी परमेश्वर का पुत्र कहा। उस समय, पवित्र आत्मा ने भी इस तथ्य की गवाही दी कि प्रभु यीशु परमेश्वर के प्रिय पुत्र हैं, और प्रभु यीशु स्‍वर्ग के परमेश्‍वर को पिता कहते थे। इस तरह, लोगों ने विश्वास किया कि प्रभु यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं। इस तरीके से, पिता-पुत्र के इस संबंध की धारणा बनी। अब हम एक पल के लिए विचार करते हैं। क्या परमेश्वर ने उत्पत्ति (के अध्याय) में कहीं भी कहा है उनका कोई बेटा है? अब व्यवस्था के युग के दौरान, क्या यहोवा परमेश्वर ने कभी कहा था कि उनका कोई बेटा है? उन्होंने ऐसा नहीं कहा था! इससे साबित होता है कि परमेश्वर सिर्फ़ एक हैं, पिता-पुत्र के संबंध की कहीं कोई बात नहीं है। अब कुछ लोग यह पूछ सकते हैं: अनुग्रह के युग के दौरान, प्रभु यीशु ने ऐसा क्यों कहा कि वे परमेश्वर के पुत्र थे? प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर के पुत्र थे या स्वयं परमेश्वर थे? पढना जारी रखे

सच्ची प्रार्थना करने का क्या मतलब है?

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परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

सच्चाई के साथ प्रार्थना करने का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है अपने हृदय में शब्दों को कहना, और परमेश्वर की इच्छा को समझकर और उसके वचनों पर आधारित होकर परमेश्वर के साथ वार्तालाप करना; इसका अर्थ है विशेष रूप से परमेश्वर के निकट महसूस करना, यह महसूस करना कि वह तुम्हारे सामने है, और कि तुम्हारे पास उससे कहने के लिए कुछ है; और इसका अर्थ है अपने हृदय में विशेष रूप से प्रज्ज्वलित या प्रसन्न होना, और यह महसूस करना कि परमेश्वर विशेष रूप से मनोहर है। तुम विशेष रूप से प्रेरणा से भरे हुए महसूस करोगे, और तुम्हारे शब्दों को सुनने के बाद तुम्हारे भाई और तुम्हारी बहनें आभारी महसूस करेंगे, वे महसूस करेंगे कि जो शब्द तुम बोलते हो वे उनके हृदय के भीतर के शब्द हैं, वे ऐसे शब्द हैं जो वे कहना चाहते हैं, और जो तुम कहते हो वह वही है जो वे कहना चाहते हैं। सच्चाई के साथ प्रार्थना करने का अर्थ यही है। सच्चाई के साथ प्रार्थना करने के बाद, अपने हृदय में तुम शांतिपूर्ण, और आभारी महसूस करोगे; परमेश्वर से प्रेम करने की सामर्थ्य बढ़ जाएगी, और तुम महसूस करोगे कि तुम्हारे जीवन में परमेश्वर से प्रेम करने से अधिक योग्य और महत्वपूर्ण कुछ नहीं है—और यह सब प्रमाणित करेगा कि तुम्हारी प्रार्थनाएँ प्रभावशाली रही हैं। पढना जारी रखे

पवित्र आत्मा का कार्य क्या है? पवित्र आत्मा का कार्य कैसे प्रकट किया जाता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

पवित्र आत्मा का कार्य सक्रिय अगुवाई करना और सकारात्मक प्रकाशन है। यह लोगों को निष्क्रिय नहीं बनने देता है। यह उनको राहत पहुँचाता है, उन्हें विश्वास और दृढ़ निश्चय देता है और यह परमेश्वर के द्वारा सिद्ध किए जाने का अनुसरण करने के लिए उन्हें योग्य बनाता है। जब पवित्र आत्मा कार्य करता है, तो लोग सक्रिय रूप से प्रवेश कर सकते हैं; वे निष्क्रिय नहीं होते और उन्हें बाध्य भी नहीं किया जाता, बल्कि वे सक्रिय रहते हैं। जब पवित्र आत्मा कार्य करता है तो लोग प्रसन्न और इच्छापूर्ण होते हैं, और वे आज्ञा मानने के लिए तैयार होते हैं, और स्वयं को दीन करने में प्रसन्न होते हैं, और यद्यपि भीतर से पीड़ित और दुर्बल होते हैं, फिर भी उनमें सहयोग करने का दृढ़ निश्चय होता है, वे ख़ुशी-ख़ुशी दुःख सह लेते हैं, वे आज्ञा मान सकते हैं, और वे मानवीय इच्छा से निष्कलंक रहते हैं, मनुष्य की विचारधारा से निष्कलंक रहते हैं, और निश्चित रूप से मानवीय अभिलाषाओं और अभिप्रेरणाओं से निष्कलंक रहते हैं। जब लोग पवित्र आत्मा के कार्य का अनुभव करते हैं, तो वे भीतर से विशेष रूप से पवित्र हो जाते हैं। जो पवित्र आत्मा के कार्य को अपने अंदर रखते हैं वे परमेश्वर के प्रति प्रेम को और अपने भाइयों और बहनों के प्रति प्रेम को अपने जीवनों से दर्शाते हैं, और ऐसी बातों में आनंदित होते हैं जो परमेश्वर को आनंदित करती हैं, और उन बातों से घृणा करते हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है। ऐसे लोग जो पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा स्पर्श किए जाते हैं, उनमें सामान्य मनुष्यत्व होता है, और वे निरंतर सत्य का अनुसरण करते हैं और उनके पास मानवता होती है। पढना जारी रखे

पवित्रा आत्मा सैद्धांतिक तरीके में काम करता है

कुछ समय से, यद्यपि मैंने परमेश्वर के वचनों को खाना और पीना बंद नहीं किया था, मैं कभी भी प्रकाश को महसूस नहीं करती थी। मैं ने इसके लिए परमेश्वर से प्रार्थना की थी लेकिन, उसके बाद भी, मुझे प्रबुद्ध नहीं किया गया था। इसलिए मैं सोचती थी कि, “परमेश्वर द्वारा हर मनुष्य को प्रबुद्ध करने का समय एक होता है, इसलिए इसके लिए शीघ्रता करने की कोशिश करने का कोई उपयोग नहीं है।” इसके बाद, मैं “धैर्यपूर्वक” परमेश्वर की प्रबुद्धता का इंतजार करते हुए, नियम का पालन करती थी और किसी चिंता के बिना परमेश्वर के वचनों के वचनों को खाती और पीती थी। पढना जारी रखे

पवित्र आत्मा के कार्य का पालन करना अति महत्वपूर्ण है

कुछ समय पहले, हालाँकि मैं हमेशा से कुछ प्रेरणा और लाभ प्राप्त करती थी जब एक बहन जो मेरे साथ भागीदारी करती थी उसने मेरे साथ उस अद्भुत प्रकाशन को साझा किया था जिसे उसने परमेश्वर के वचन को खाते और पीते समय प्राप्त किया था, मुझ में हमेशा से एक ठहरा एहसास भी था कि वह दिखावा कर रही थी। मैं अपने आप में सोचती, “यदि मैं उसे इसी वक्त प्रत्युत्तर दूं, तो क्या मैं उसे बढ़ावा नहीं दे रही होऊँगी? उस अर्थ में, तब क्या मैं उससे कमतर नहीं दिखाई दूंगी?” इसके परिणामस्वरूप, मैं ने वार्तालाप में अपने स्वयं के विचारों को लाने से या किसी भी ऐसी सोच पर टीका-टिप्पणी करने से मना कर दिया जिसे वह साझा करती थी। एक बार, मेरी बहन ने, परमेश्वर के वचन के विशेष अंश से खाने एवं पीने से कुछ अंतर्दृष्टि पाने के बाद, महसूस किया कि हमारी स्थिति में कुछ तो गलत था और उसने मुझ से पूछा कि क्या मैं परमेश्वर के वचन के उस अंश पर उसके साथ बात करने के लिए तैयार होऊँगी। जैसे ही उसने पूछा, तो नाराज़गी के ये सभी विचार एवं भावनाएं सतह पर तैरने लगीं: “आप बस चाहती हैं कि स्वयं के लिए गवाही दें, कि आपके पास प्रचार के लिए एक श्रोता हो। मुझे आपके साथ क्यों बात करना चाहिए?” यहाँ तक कि मैं उस हद तक भी चली गई कि मैं एक सभा से चुपके से चली गई ताकि मुझे उसे सुनना न पड़े। कुछ समय बाद, मैं ने अपने हृदय में एक भारी बोझ का एहसास किया, मैं जान गई कि मेरी स्थिति के साथ कुछ तो गलत है, किन्तु मैं अपने भीतरी संघर्ष का समाधान करने के लिए कोई अच्छा तरीका सोच न सकी। जो कुछ मैं कर सकती थी वह यह था कि अपने कर्तव्यों में अपने आपको पूरी तरह से लगा दूं, परमेश्वर के वचन को खाऊं और पीऊं, और इन नकारात्मक भावनाओं से अपना ध्यान हटाने के लिए भजनों को गाऊं। फिर भी, जब कभी मुझे वर्तमान स्थिति का सामना करना पड़ता था, तो वही भ्रष्टता मेरे हृदय में उत्पन्न होती—चीज़ें बद से बदतर हो रही थीं, बेहतर नहीं—और मैं कुछ समझ नहीं पाई कि इसके बारे में क्या करूं। पढना जारी रखे

Hindi Gospel Movie “द्वार पर दस्तक” क्लिप 1 – प्रभु के आगमन का स्‍वागत करते के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण अभ्यास क्‍या है?

Hindi Gospel Movie “द्वार पर दस्तक” क्लिप 1 – प्रभु के आगमन का स्‍वागत करते के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण अभ्यास क्‍या है?

प्रभु यीशु ने कहा था, “मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं;” (यूहन्ना 10:27) (© BSI) प्रकाशितवाक्‍य में भी कई बार इसकी भविष्‍यवाणी की गर् है, “जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।” पवित्रात्मा की आवाज और उसके वचन ही प्रभु की आवाज हैं, और ये परमेश्‍वर की भेड़ें ही हैं जो परमेश्‍वर की आवाज को पहचानेंगी। तो र्साइयों के लिए प्रभु के आगमन का स्‍वागत करते समय कौन सा अभ्यास सबसे महत्‍वपूर्ण है?

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