चेंग हांग के द्वारा
बाइबल में यह अभिलिखित है: “वे ये बातें कह ही रहे थे कि वह आप ही उनके बीच में आ खड़ा हुआ, और उनसे कहा, ‘तुम्हें शान्ति मिले।‘ परन्तु वे घबरा गए और डर गए, और समझे कि हम किसी भूत को देख रहे हैं। उसने उनसे कहा, ‘क्यों घबराते हो? और तुम्हारे मन में क्यों सन्देह उठते हैं? मेरे हाथ और मेरे पाँव को देखो कि मैं वही हूँ। मुझे छूकर देखो, क्योंकि आत्मा के हड्डी माँस नहीं होता जैसा मुझ में देखते हो।‘ यह कहकर उसने उन्हें अपने हाथ पाँव दिखाए। जब आनन्द के मारे उनको प्रतीति न हुई, और वे आश्चर्य करते थे, तो उसने उनसे पूछा, ‘क्या यहाँ तुम्हारे पास कुछ भोजन है?‘ उन्होंने उसे भुनी हुई मछली का टुकड़ा दिया। उसने लेकर उनके सामने खाया” (लूका 24:26-43)। मैं जब भी इन पदों को पढ़ता हूँ, तो मैं पतरस, यूहन्ना और अन्य लोगों से ईर्ष्या करता हूँ। यीशु जब यहूदिया में अपना कार्य कर रहे थे, तो वह रात-दिन सर्वदा अपने शिष्यों के साथ होते थे, और जब वह पुनर्जीवित हो गए, तब भी उन्होंने पहले के समान उनकी देखभाल की, उन्हें दिखाई दिए, उन्हें पवित्रशास्त्र समझाया और उन्हें शिक्षा प्रदान की। पतरस और अन्य लोग सौभाग्यशाली थे कि उन्हें प्रभु के द्वारा उनके शिष्यों के रूप में चुने गये और वे अपने कानों से प्रभु यीशु की शिक्षाओं को सुन पाए—वे बहुत अधिक आशीषित थे! उसके पश्चात मैंने परमेश्वर के वचनों को पढ़ा और मुझे प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के पश्चात मनुष्य को दिखाई देने के पीछे वास्तव में उनकी जो इच्छा थी वो समझ आ गई और यह भी समझ आ गया कि इस कार्य में परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता और बुद्धि और अधिक शामिल थे। मैंने वास्तव में समझ लिया कि प्रभु यीशु मसीह का अपने पुनरुत्थान के पश्चात मनुष्य को दिखाई देना वास्तव में अत्यधिक अर्थपूर्ण था! पढना जारी रखे
