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एक बार बचाये जाने का अर्थ यह नहीं है कि हम हमेशा के लिए बचाये गए हैं

यांग शिन, शानडोंग प्रान्त

बैठक के बाद घर वापस लौटते वक्त, सूरज पश्चिम में डूब गया, और डूबते सूरज की आखिरी किरण दुनिया भर में फैल गई। मैं, पादरी ने जो कहा था उसके बारे में सोच रहा था: “एक बार बचाये गये, तो हम हमेशा के लिए बचाये जाते हैं, क्योंकि बाइबल कहती है, ‘कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे, और अपने मन से विश्‍वास करे कि परमेश्‍वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्‍चय उद्धार पाएगा। क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है’ (रोमियों 10:9-10)। चूँकि हम प्रभु यीशु पर विश्वास करते हैं, जब तक हम अपने दिलों में विश्वास करते हैं और उन्हें अपने मुँह से स्वीकार करते हैं, तब तक हम बचाये जाते हैं, और यदि हम एक बार बचाए जाते हैं तो हम हमेशा के लिए बचाए जाते हैं। जब तक हम काम करते रहते हैं और स्वयं को प्रभु के लिए व्यय करते हैं और बिल्कुल अंत तक सहन करते हैं, तो जब प्रभु वापस लौटेंगे, तो हम तुरंत स्वर्ग के राज्य में आरोहित किये जाएंगे!” मैंने पादरी की बातों पर आमीन कहा: “हाँ! प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था ताकि हमें छुटकारा दिलाया जा सके, इसलिए अगर जब तक हम प्रभु के नाम को पुकारते हैं, अपने पापों को स्वीकार करते हैं और प्रभु से पश्चात्ताप करते हैं, तब तक हमें पाप से मुक्त किया जायेगा और हम उनकी कृपा से बच जाएंगे—एक बार बचाये गये, हमेशा के लिए बचाये गये, और बाद में हम निश्चित रूप से स्वर्ग के राज्य में आरोहित किये जायेंगे।” प्रभु पर अपने विश्वास के इतने वर्षों में, मैंने हमेशा दृढ़ता से माना था कि यह दृष्टिकोण सही था, और मैंने कभी भी इस पर संदेह नहीं किया।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया|यीशु मसीह का प्रार्थना
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आज का वचन | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 8

आज का वचन | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 8

परमेश्वर के मार्ग पर चलें: परमेश्वर का भय मानें और बुराई से दूर रहें

एक कहावत है जिस पर तुम सब को ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि यह कहावत अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मेरे मन में हर दिन अनगिनत बार आती है। ऐसा क्यों है? क्योंकि जब भी मैं किसी के सामने होता हूँ, जब भी मैं किसी की कहानी सुनता हूँ, जब भी मैं परमेश्वर पर विश्वास करने के विषय में किसी व्यक्ति का अनुभव या उनकी गवाही को सुनता हूँ, तब मैं हमेशा यह तौलने के लिए इस कहावत का उपयोग करता हूँ कि वह व्यक्ति उस प्रकार का इंसान है या नहीं जिसे परमेश्वर चाहता है, और उस प्रकार का इंसान है या नहीं जिसे परमेश्वर पसन्द करता है। अतः फिर वह कहावत क्या है? अब तुम सब पूरी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हो। पढना जारी रखे

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परमेश्वर के वचन | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 7

परमेश्वर का वचन इन हिंदी | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 7

उस मानक के सम्बन्ध में अनेक राय हैं जिसके तहत परमेश्वर किसी मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है

चूँकि प्रत्येक व्यक्ति अपने परिणाम को लेकर चिन्तित होता है, क्या तुम लोग जानते हो कि परमेश्वर किस प्रकार उस परिणाम को निर्धारित करता है? परमेश्वर किस रीति से किसी व्यक्ति के परिणाम को निर्धारित करता है? और किसी व्यक्ति के परिणाम को निर्धारित करने के लिए वह किस प्रकार के मानक का उपयोग करता है? और जब किसी मनुष्य का परिणाम अभी तक निर्धारित नहीं हुआ है, तो परमेश्वर इस परिणाम को प्रकट करने के लिए क्या करता है? क्या कोई इसे जानता है? जैसा मैं ने अभी अभी कहा था, कुछ लोग हैं जिन्होंने लम्बे समय पहले से ही परमेश्वर के वचन की खोजबीन की है। ये लोग मानवजाति के परिणाम के विषय में, उन श्रेणियों के विषय में जिस में यह परिणाम विभाजित होता है, और उन विभिन्न परिणामों के विषय में सुरागों की खोज कर रहे हैं जो विभिन्न प्रकार के लोगों का इंतज़ार कर रहे हैं। वे यह भी जानना चाहते हैं कि किस प्रकार परमेश्वर का वचन मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है, उस प्रकार का मानक जिसे परमेश्वर उपयोग करता है, और वह रीति जिसके अंतर्गत वह मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है। फिर भी अन्त में ये लोग किसी भी चीज़ का पता नहीं लगा पाते हैं। पढना जारी रखे

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2020 Hindi Christian Testimony Video | मैंने जीवन जल का आनंद लिया है | मसीही जीवन

2020 Hindi Christian Testimony Video | मैंने जीवन जल का आनंद लिया है | मसीही जीवन

जिए जिंग एक ईसाई परिवार में पैदा हुई—प्रभु में उसके परिवार की आस्था तीन पीढ़ियों से चली आ रही है—बड़ी होने पर, वह कलीसिया में नियमित रूप से प्रभु की सेवा करती है। लेकिन धीरे-धीरे, वह देखती है कि कलीसिया ज़्यादा-से-ज़्यादा वीरान होती जा रही है, याजक वर्ग सिर्फ उन्हीं दकियानूसी बातों का प्रचार करते रहते हैं। यही नहीं, हर मोड़ पर उनका व्यवहार प्रभु की इच्छा के विपरीत होता है। उसे अपने जीवन के लिए कोई पोषण नहीं मिल पाता, उसकी आत्मा सूख-सूख कर काली हो जाती है। इस दुख-दर्द में, वह अक्सर प्रभु को पुकारती है, उसके जल्द वापस आने को तरसने लगती है। पढना जारी रखे

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Hindi Christian Video | परमेश्वर के चीन में प्रकट होकर कार्य करने का बहुत महत्व है

Hindi Christian Video | परमेश्वर के चीन में प्रकट होकर कार्य करने का बहुत महत्व है

मुख्य किरदार हमेशा प्रभु के लिए खुद को पूर जोश से खपाती और प्रभु की वापसी का इंतज़ार करती है। फिर, संयोग से उसे पता चलता है कि प्रभु चीन में देहधारी होकर वापस आ चुका है। उसे हैरत के साथ-साथ बहुत खुशी होती है, लेकिन एक सवाल उसे अब भी कचोटता है : पुराने और नये नियम के युगों में, परमेश्वर ने अपना कार्य हमेशा इज्राएल में किया, इसलिए जायज़ होगा कि वापस आने पर वह ऐसा इज्राएल में ही करे। फिर वह चीन में प्रकट होकर अपना कार्य कैसे कर सकता है? पढना जारी रखे

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मसीही वीडियो | अब मुझे बाइबल और परमेश्वर के बीच का रिश्ता समझ आ गया है

मसीही वीडियो | अब मुझे बाइबल और परमेश्वर के बीच का रिश्ता समझ आ गया है

मुख्य किरदार, एक ईसाई है जिसकी नज़र यूट्यूब पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बनाई गई कुछ फ़िल्मों पर पड़ती है। उसे ये फ़िल्में सच्ची औरअपनी आस्था के लिए उपयोगी लगती है। जब वह प्रभु यीशु के लौटकर आने और उसके द्वारा परमेश्वर के घर से न्याय का कार्य शुरू करने के बारे में एक फ़िल्म देखती है, तो उसे बहुत ख़ुशी होती है और वह इसकी छानबीन करना शुरू कर देती है। लेकिन एक दिन वह असमंजस में पड़ जाती है जब उसकी नज़र एक फ़िल्म के शीर्षक “बाइबल से बाहर निकलें” पर पड़ती है, वह सोच में पड़ जाती है कि आस्था में बाइबल से बाहर जाने की ज़रूरत क्यों है। पढना जारी रखे

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दाऊद से सीखना: राजा दाऊद, परमेश्वर के हृदयानुसार क्यों था?

जब भी राजा दाऊद का जिक्र होता है, मेरे दिमाग में उसके किशोरावस्था की छवि उभरती है, जब उसने यहोवा की ताकत पर भरोसा करते हुए, गुलेल का इस्तेमाल कर एक पत्थर के साथ विशाल गोलियत को मार गिराया था। बाद में, वह युद्ध पर गया, कई लड़ाइयाँ जीती और कई वीरता के कर्म किए। हालाँकि, बाइबल में यह भी दर्ज है कि जब दाऊद इस्राएल का राजा बना, तब उसने ऊरिय्याह को मरवा दिया और फिर उसकी पत्नी बतशेबा को अपने साथ ले गया। इसलिए, परमेश्वर का धर्मी स्वभाव दाऊद पर आया और पैगंबर नातान के माध्यम से, परमेश्वर ने उससे यह कहते हुए बात की, “इसलिये अब तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी, क्योंकि तू ने मुझे तुच्छ जानकर हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी को अपनी पत्नी कर लिया है” (2 शमूएल 12:10)। राजा दाऊद ने पाप किया और परमेश्वर ने उसे दंड दिया। तो इसके बाद परमेश्वर दाऊद से खुश क्यों हुआ और उसने यह क्यों कहा कि दाऊद उसके हृदय के अनुसार है? मैं इसके कारण बहुत भ्रमित महसूस कर रहा था। इसे समझ पाने के लिए, मैंने कई बार परमेश्वर से प्रार्थना की और खोज की, और मुझे बाइबल में बहुत से पद मिले। अपने भाई-बहनों के साथ तलाशने और संगति करने के बाद, मुझे आखिरकार इसका जवाब मिल गया।

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क्या बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व कर सकती है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “परमेश्वर स्वयं ही जीवन है, सत्य है, और उसका जीवन और सत्य साथ-साथ अस्तित्व में रहते हैं। जो सत्य को प्राप्त करने में असफल रहते हैं वे कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते। बिना मार्गदर्शन, सहायता और सत्य के प्रावधान के तुम केवल शब्दों, सिद्धांतों और इन सबसे बढ़कर मृत्यु को ही प्राप्त करोगे। परमेश्वर का जीवन सतत विद्यमान है, और उसका सत्य और जीवन एक साथ अस्तित्व में रहते हैं। पढना जारी रखे

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“एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान” का रहस्‍य

ली चेंग

भाइयो और बहनो, आप सबको शांति मिले! प्रभु की तैयारियों के लिए उनका आभार, जिनकी वजह से हम बाइबल के सत्यों पर यहाँ संवाद करने आए हैं। प्रभु हमारा मार्गदर्शन करें। आज, मैं सभी से “एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान” विषय पर चर्चा करना चाहूँगा।

जैसा कि प्रभु में विश्‍वास करने वाले सभी लोग जानते हैं, “एक मृत व्‍यक्ति का पुनरुत्‍थान” यीशु के लौटने के समय से संबंध रखता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे देखने का हम सभी ईसाई बेताबी से इंतज़ार कर रहे हैं। तो फ़िर, एक “मृत इंसान” का पुनरुत्‍थान किस तरह हो सकता है? कई लोग यहेजकेल की पुस्‍तक के अध्‍याय 37, पद 5-6 के बारे में विचार करेंगे: “परमेश्वर यहोवा तुम हड्डियों से यों कहता है: देखो, मैं आप तुम में साँस समाऊँगा, और तुम जी उठोगी। मैं तुम्हारी नसें उपजाकर मांस चढ़ाऊँगा, और तुम को चमड़े से ढाँपूँगा; और तुम में साँस समाऊँगा और तुम जी जाओगी; और तुम जान लोगी कि मैं यहोवा हूँ।” यूहन्‍ना के सुसमाचार, अध्‍याय 6, पद 39 में यीशु ने कहा था: “और मेरे भेजनेवाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊँ, परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँ।” 1 कुरिन्थियो की पुस्‍तक के अध्‍याय 15, पद 52-53 में यह पढ़ने में आता है: “और यह क्षण भर में, पलक मारते ही अन्तिम तुरही फूँकते ही होगा। क्योंकि तुरही फूँकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे। क्योंकि अवश्य है कि यह नाशवान् देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले।” इसके अलावा, यदि लोग बाइबल का शाब्दिक अर्थ समझें तो, वे यह मानेंगे कि: अंत के दिनों में, जब प्रभु के अव‍तरित होने की घड़ी निकट आएगी, उस समय कई महान और चमत्‍कारिक चीज़ें घटित होंगी। अपनी सर्वशक्तिमत्‍ता से, वे कई पीढ़ियों से सोए हुए संतों के शरीरों को पुनर्जीवित करेंगे। वे उन्‍हें उनकी कब्रों में से, धरती या समंदर के नीचे से उठाएँगे। जमीन के नीचे या सागर की तलहटी में जो हज़ारों कंकाल पहले ही सड़ चुके हैं, उन्हें तत्‍काल एक नया जीवन दिया जाएगा। सड़न जादुई तरीके से लुप्‍त हो जाएगी और वे सभी महिमा में प्रवेश करेंगे। कितना भव्‍य होगा वह दृश्‍य! … “एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान” को लेकर हमारे दृष्टिकोण और कल्‍पनाएं भी ऐसी ही हैं। यह भविष्‍यवाणी आख़िर किस तरह पूरी होगी? क्‍या यह वाकई वैसी ही चमत्‍कारिक होगी जैसी होने की हम कल्‍पना करते हैं? क्‍या प्रभु इस घटना को हमारी कल्‍पनाओं के अनुरूप अंजाम देंगे?

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क्या पूरी बाइबल ईश्वर की प्रेरणा से लिखी गयी है? | Hindi Christian Song With Lyrics

क्या पूरी बाइबल ईश्वर की प्रेरणा से लिखी गयी है? | Hindi Christian Song With Lyrics

इंसान आज बाइबल और ईश्वर को एक माने।
ईश्वर ने बस बोले बाइबल में लिखे वचन ही,
इंसान ऐसा माने।
इंसान माने, वो सब ईश्वर ने कहा।

विश्वासी तो यह भी मानें,
नया-पुराना नियम लिखा भले ही इंसान ने,
पर वे लिखे गए ईश्वर की ही प्रेरणा से,
पवित्रात्मा के वचन दर्ज किए इंसान ने।
ऐसा सोचना इंसान की भूल है।
यह असल तथ्यों के अनुसार नहीं है।
असल में, भविष्यकथन की किताबों के अलावा
पुराना नियम बीती बातों का अभिलेख है।

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बहुत-से लोग यह मानते हैं कि मनुष्य द्वारा लिखे जाने के बावजूद बाइबल के सभी वचन पवित्र आत्मा से आये हैं और वे परमेश्वर के वचन हैं। क्या यह सही है?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

आज, लोग यह विश्वास करते हैं कि बाइबल परमेश्वर है, और परमेश्वर बाइबल है। इस प्रकार वे यह भी विश्वास करते हैं कि बाइबल के सारे वचन सिर्फ वे वचन हैं जिन्हें परमेश्वर ने कहा था, और उन सभी को परमेश्वर के द्वारा बोला गया था। वे जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं वे यह भी मानते हैं कि यद्यपि पुराने और नए नियम की छियासठ पुस्तकों को लोगों के द्वारा लिखा गया था, फिर भी उन सभी को परमेश्वर की अभिप्रेरणा के द्वारा दिया गया था, और वे पवित्र आत्मा के कथनों के लिखित दस्तावेज़ हैं। यह लोगों का त्रुटिपूर्ण अनुवाद है, और यह तथ्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाता है। वास्तव में, भविष्यवाणियों की पुस्तकों को छोड़कर, पुराने नियम का अधिकांश भाग ऐतिहासिक अभिलेख है। नए नियम के कुछ धर्मपत्र लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों से आए हैं, और कुछ पवित्र आत्मा के प्रकाशन से आए हैं; उदाहरण के लिए, पौलुस के धर्मपत्र एक मनुष्य के कार्य से उदय हुए थे, वे सभी पवित्र आत्मा के प्रकाशन के परिणामस्वरूप थे, और वे कलीसिया के लिए लिखे गए थे, और वे कलीसिया के भाइयों एवं बहनों के लिए प्रोत्साहन और उत्साह के वचन हैं। पढना जारी रखे

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 272

परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 272

आज लोग यह विश्वास करते हैं कि बाइबल परमेश्वर है और परमेश्वर बाइबल है। इसलिए वे यह भी विश्वास करते हैं कि बाइबल के सारे वचन ही वे वचन हैं, जिन्हें परमेश्वर ने बोला था, और कि वे सब परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन थे। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, वे यह भी मानते हैं कि यद्यपि पुराने और नए नियम की सभी छियासठ पुस्तकें लोगों द्वारा लिखी गई थीं, फिर भी वे सभी परमेश्वर की अभिप्रेरणा द्वारा दी गई थीं, और वे पवित्र आत्मा के कथनों के अभिलेख हैं। पढना जारी रखे

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परमेश्वर का वचन वीडियो | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 271

परमेश्वर का वचन वीडियो | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 271

बाइबल में हर चीज़ परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों का अभिलेख नहीं है। बाइबल बस परमेश्वर के कार्य के पिछले दो चरण दर्ज करती है, जिनमें से एक भाग नबियों की भविष्यवाणियों का अभिलेख है, और दूसरा भाग युगों-युगों में परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए गए लोगों द्वारा लिखे गए अनुभवों और ज्ञान का अभिलेख है। मनुष्य के अनुभव उसके मतों और ज्ञान से दूषित हैं, जो एक अपरिहार्य चीज़ है। बाइबल की कई पुस्तकों में मनुष्य की धारणाएँ, पूर्वाग्रह और बेतुकी समझ शामिल हैं। बेशक, अधिकतर वचन पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और रोशनी का परिणाम हैं और वे सही समझ हैं—फिर भी अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वे पूरी तरह से सत्य की सटीक अभिव्यक्ति हैं। कुछ चीज़ों पर उनके विचार व्यक्तिगत अनुभव से प्राप्त ज्ञान या पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता से बढ़कर कुछ नहीं हैं। नबियों के पूर्वकथन परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से निर्देशित किए गए थे : यशायाह, दानिय्येल, एज्रा, यिर्मयाह और यहेजकेल जैसों की भविष्यवाणियाँ पवित्र आत्मा के सीधे निर्देशन से आई थीं; ये लोग द्रष्टा थे, उन्होंने भविष्यवाणी के आत्मा को प्राप्त किया था, और वे सभी पुराने नियम के नबी थे। पढना जारी रखे

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “पतरस ने यीशु को कैसे जाना” | अंश 520

परमेश्वर के दैनिक वचन | “पतरस ने यीशु को कैसे जाना” | अंश 520

यीशु का अनुसरण करने के अपने समय के दौरान, उसके बारे में पतरस के कई अभिमत थे और वह अपने परिप्रेक्ष्य से आँकलन करता था। यद्यपि पवित्रात्मा के बारे में उसकी एक निश्चित अंश में समझ थी, तब भी पतरस बहुत प्रबुद्ध नहीं था, इसलिए वह अपनी बातों में कहता हैः “मुझे उसका अवश्य अनुसरण करना चाहिए जिसे स्वर्गिक पिता द्वारा भेजा जाता है। मुझे उसे अवश्य अभिस्वीकृत करना चाहिए जो पवित्र आत्मा के द्वारा चुना जाता है। मैं तेरा अनुसरण करूँगा।” उसने यीशु के द्वारा की गई चीज़ों को नहीं समझा और कोई प्रबुद्धता प्राप्त नहीं की। कुछ समय तक उसका अनुसरण करने के बाद उसकी उन चीज़ों में जो उसने की और कही, और स्वयं यीशु में रुचि बढ़ी। पढना जारी रखे

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अपने दिल से सुनने के बाद, मैंने प्रभु की वापसी का स्वागत किया है

मैक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका

1994 में, मेरा जन्म संयुक्त राज्य में हुआ था। मेरे माता-पिता दोनों चीनी थे। मेरी मां एक सफल कामकाजी महिला का विशिष्ट उदाहरण थी। वह अपने बारे में सोचने में सक्षम है और काफी निपुण है। मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं। जब मैं दूसरी कक्षा में था, तो मेरे माता-पिता मुझे अध्ययन करने के लिए चीन वापस ले गए ताकि मैं चीनी सीख सकूं। इसी दौरान मैंने प्रभु यीशु से परिचित होना शुरू किया था। मुझे याद है कि 2004 में एक दिन, जब मैं विद्यालय से घर पहुंचा, तो मेरे घर में कुछ मेहमान थे। मेरी मां ने उनसे मेरा परिचय कराया और मुझे बताया कि वह संयुक्त राज्य से आए एक पादरी हैं। मैं काफी खुश था क्योंकि तभी मुझे पता चला था कि मेरी मां कुछ समय से प्रभु यीशु में विश्वास कर रही थी। पहले, वह नहीं करती थी। हर चीनी नव वर्ष में, वे अगरबत्ती जलाया करती थी और बुद्ध की पूजा किया करती थी। हालांकि, जब से मेरी मां ने प्रभु यीशु में विश्वास करना शुरू किया था, तब से मुझे जलती अगरबत्ती की खुशबू नहीं आई थी। उस दिन, उस अमेरिकी पादरी ने मुझे प्रभु यीशु के बारे में एक कहानी सुनाई। कुछ समय बाद, मुझे बाथरूम में ले जाया गया और इससे पहले कि मैं कुछ प्रतिक्रिया दे पाता, ‘अचानक ही’ उस पादरी ने मेरा सिर बाथटब में डाल दिया और कुछ पल के बाद, मेरे सिर को बाहर निकाल लिया। मुझे बस मेरी मां और उस पादरी की बातें सुनाई दे रही थी, “परमेश्वर के अनुग्रह में तुम्हारा स्वागत है। हम सभी खोई हुई भेड़े हैं।” इस प्रकार से, इससे पहले कि मैं इसे जान पाता, मैंने एक नई जीवन यात्रा की शुरुआत की। चूंकि परमेश्वर मेरे साथ था, इसलिए मेरा दिल बहुत खुश था। उसके बाद, प्रत्येक रविवार, मैं पूजा करने, पादरी से बाइबल की कहानियाँ सुनने और ग्रंथों से कथन पढ़ने के लिए कलीसिया जाया करता था। मैं पूरी तरह से खुश था। मेरा दिल स्थिर था और मैं मानता था कि प्रभु यीशु में विश्वास करना वाकई अच्छी बात है।

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अटूट आस्था

मेंग योंग, चीन

मैं स्वभाव से ही एक ईमानदार आदमी हूँ और यही कारण है कि मैं हमेशा दूसरे लोगों द्वारा सताया गया हूँ। इस वजह से मैंने लोगों की इस दुनिया मेँ उदासीनता का अनुभव किया और मुझे लगा कि यह जीवन निस्सार और निरर्थक है। लेकिन जब से मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर मेँ विश्वास करना शुरू किया, उनके वचनों के अध्ययन और कलीसिया मेँ जीवन जीने के बाद, मेरे दिल ने एक ऐसी गंभीरता और सुख-चैन का अनुभव किया, जैसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। यह देखकर कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई बहन, परिवार के सदस्यों की तरह, एक दूसरे को परस्पर स्नेह कर रहे हैं, मुझे यह आभास हुआ कि सिर्फ परमेश्वर ही धर्मी हैं और सिर्फ परमेश्वर की कलीसिया ही वह स्थान है जहां आलोक है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्यों को अनेक वर्षों तक अनुभव करने के बाद मुझे इस रहस्य का पता चल गया था कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों मेँ वह शक्ति है जो मनुष्य को वाकई बदल सकती है और उसकी रक्षा कर सकती है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्यार हैं और वही उद्धार हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग परमेश्वर के प्यार का आनंद ले सकें और उद्धार प्राप्त कर सकें, मेरे भाई, बहन और मैं, सुसमाचार के प्रचार-प्रसार के लिए पूरे मनोयोग से काम कर रहे थे, लेकिन हमें यह किंचित पता नहीं था कि हमें कम्युनिस्ट पार्टी बंदी बनाएगी और यातनाएँ देगी।

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Hindi Christian Song | “परमेश्वर का न्याय है प्यार” (Lyrics)

Hindi Christian Song | “परमेश्वर का न्याय है प्यार” (Lyrics)


क्या गवाही देता है अंत में इंसान?
परमेश्वर धार्मिक है, गवाही देता है इंसान,
क्रोध है, ताड़ना है, न्याय है परमेश्वर।
इंसान गवाही देता है, धार्मिक है परमेश्वर।
इंसान को पूर्ण बनाने की ख़ातिर, न्याय का प्रयोग करता है परमेश्वर।
इंसान को प्रेम करता, बचाता आ रहा है परमेश्वर।
कितना कुछ निहित है मगर उसके प्यार में?
न्याय है, प्रताप है, बद्दुआ है, क्रोध है उसके प्यार में।
श्राप देता है तुम्हें परमेश्वर, ताकि उसे प्रेम कर सको तुम,
और जानो देह के सार-तत्वों को तुम।
ताड़ना देता है तुम्हें परमेश्वर, ताकि जागो तुम,
और अपनी नाकाबिलियत को जानो तुम।
इसलिये परमेश्वर का न्याय, प्रताप, श्राप,
जो धार्मिकता दिखाता है वो तुम्हारे भीतर,
ये सब करता है तुम्हें पूर्ण बनाने के लिये परमेश्वर।
यही प्रेम परमेश्वर का, पाया जाता है तुम्हारे भीतर।

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 286

आज का वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 286

फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया, क्या तुम लोग उसका कारण जानना चाहते हो? क्या तुम फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे ज्यादा और क्या, उन्होंने केवल इस बात पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, मगर जीवन के इस सत्य की खोज नहीं की। और इसलिए, वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं, क्यों उन्हें जीवन के मार्ग के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है, और नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है? तुम लोग कैसे कहते हो कि ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर के आशीष प्राप्त करेंगे? वे मसीहा को कैसे देख सकते हैं? वे यीशु का विरोध करते थे क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा को नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु के द्धारा कहे गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे, और, ऊपर से, क्योंकि उन्होंने मसीहा को नहीं समझा था। पढना जारी रखे

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मसीह के वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265

मसीह के वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265

बहुत सालों से, लोगों के विश्वास का परम्परागत माध्यम (दुनिया के तीन मुख्य धर्मों में से एक, मसीहियत के विषय में) बाइबल पढ़ना ही रहा है; बाइबल से दूर जाना प्रभु में विश्वास नहीं है, बाइबल से दूर जाना एक दुष्ट पंथ और विधर्म है, और यहाँ तक कि जब लोग अन्य पुस्तकों को पढ़ते हैं, तो इन पुस्तकों की बुनियाद, बाइबल की व्याख्या ही होनी चाहिए। कहने का अर्थ है कि, यदि तुम कहते हो कि तुम प्रभु में विश्वास करते हो, तो तुम्हें बाइबल अवश्य पढ़नी चाहिए, तुम्हें बाइबल खानी और पीनी चाहिए, बाइबल के अलावा तुम्हें किसी अन्य पुस्तक की आराधना नहीं करनी चाहिए जिस में बाइबल शामिल नहीं हो। पढना जारी रखे

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परमेश्वर के साथ सामान्य रिश्ता कैसे स्थापित करें | Christian devotional song in hindi

परमेश्वर के साथ सामान्य रिश्ता कैसे स्थापित करें | Christian devotional song in hindi


परमेश्वर से सामान्य रिश्ते की
शुरुआत होती है परमेश्वर के सामने अपना दिल करके शांत।
अगर तुम्हें समझ न आए परमेश्वर की इच्छा,
तो भी पूरे करो उसके प्रति अपने कर्तव्य।
परमेश्वर की इच्छा प्रकट होने और अभ्यास में लाने के लिए
इंतज़ार करने में बहुत देर नहीं हुई।
जब परमेश्वर से तुम्हारा रिश्ता होगा सही,
तो अपने आस-पास के लोगों के साथ भी रिश्ता होगा सही।
परमेश्वर से सामान्य रिश्ता होता है संदेह से मुक्त,
परमेश्वर के कार्य का करता है पालन।
सही इरादों के साथ आओ सिंहासन के सामने,
ख़ुद को रख दो अलग।
परमेश्वर की खोज करो स्वीकार, परमेश्वर के सामने हो समर्पित,
उसके परिवार के हितों को रखो आगे।
अगर तुम करते हो ऐसे अभ्यास,
तो परमेश्वर से तुम्हारा रिश्ता होगा सामान्य।
ओह, सामान्य। ओह, सामान्य।

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एक ईसाई की आपबीती : रोजगार की तलाश का एक अनूठा अनुभव

“हेलो, क्या मैं जान सकती हूँ कि क्या इस समय आपके रेस्तरां को किसी स्टाफ की जरूरत है?”

“क्या आप कोई विदेशी भाषा बोल सकती हैं? क्या आपको काम का कोई अनुभव है?”

“नहीं, सॉरी, मैं कोई विदेशी भाषा नहीं बोल पाती, और मुझे काम का कोई अनुभव भी नहीं है।”

“अगर ऐसी बात है तो आय एम सॉरी, हम फिलहाल कुशल कर्मचारी चाहते हैं, नौसिखिए नहीं।”

टेलीफोन पर बात खत्म होते ही मेरे दिमाग में खलबली-सी मच गई, “हे प्रभु, यह नौकरी के लिए आज मेरी तीसरी कॉल है। अगर काम नहीं मिला तो मैं इस महीने का किराया नहीं दे पाऊँगी।”

एक ईसाई की आपबीती : रोजगार की तलाश का एक अनूठा अनुभव
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सुसमाचार-सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

तुम यह गवाही देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सत्य को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो।

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है | Hindi Christian Song With Lyrics

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है | Hindi praise song

प्रकट कर दिया है अपना महिमामय देह,
सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सम्मुख सबके
हो चुका है प्रकट उसका पवित्र देह;
स्वयं परमेश्वर है वो: पूर्ण सच्चा परमेश्वर है वो।
जगत बदला है पूरा तो बदला है देह भी।
परमेश्वर का व्यक्तित्व है रूपांतरण उसका,
स्वर्ण मुकुट सिर पर उसके।
सफ़ेद लबादा तन पर, स्वर्ण बंध वक्ष पर उसके।
हर चीज़ जगत की है चरण-पीठ उसकी, आँखें अग्नि-लौ की मानिंद उसकी,
दुधारी तलवार मुख में, दाएं हाथ में सप्त-तारे।
राज्य-पथ असीम और प्रकाशमान,
उदित होकर जगमगाती महिमा परमेश्वर की।
पर्वत जयजयकार करें, जल ख़ुशियाँ मनाएँ;
सूरज, चाँद-सितारे घूमें अपनी व्यवस्था में,
करें अगवानी एक सच्चे परमेश्वर की,
पूरी की जिसने प्रबंधन योजना छ: हज़ार वर्षों की, लौटा है जीतकर!

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तुम्हें जानना चाहिए परमेश्वर को उसके कार्य द्वारा | हिंदी मसीही गीत

तुम्हें जानना चाहिए परमेश्वर को उसके कार्य द्वारा | हिंदी मसीही गीत

परमेश्वर देहधारी हुआ, आम इन्सान बना।
इस इंसां ने परमेश्वर के कार्य,
आदेश को स्वयं पर लिया।
उसे ऐसा काम करना था,
ऐसी पीड़ा सहनी थी
जो सह नहीं सकता आम इन्सा कोई।
उसकी पीड़ा दिखाती है इन्सा के लिए परमेश्वर की निष्ठा।
इन्सान को बचाने,
उसे पाप से छुड़ाने,
इस चरण को पूरा करने की कीमत का,
उसने जो सहा अपमान उसका यह प्रतीक है।
इसके मायने हैं कि परमेश्वर क्रूस पर से इन्सान को छुड़ाएगा।

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अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य

प्रश्न: व्यवस्था के युग का कार्य करने के लिए परमेश्वर ने मूसा का उपयोग किया, तो अंतिम दिनों में परमेश्वर अपने न्याय के कार्य को करने के लिए लोगों का इस्तेमाल क्यों नहीं करता है, बल्कि इस कार्य को उसे खुद करने के लिए देह बनने की ज़रूरत क्यों है? और देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर जिन लोगों का उपयोग करते हैं, उनमें क्या ख़ास अंतर है?

उत्तर:

ऐसा क्यों है कि परमेश्वर को अंत के दिनों में न्याय का कार्य करने के लिए देहधारण करने की ज़रूरत है, जिनको सत्‍य को जानने की तीव्र अभिलाषा है और जो परमेश्वर के प्रकटन की खोज करना चाहते हैं, उनको इस प्रश्‍न में अत्‍यधिक दिलचस्‍पी है। यह एक ऐसा सवाल भी है जिसका संबंध इस बात से है कि हमें स्वर्ग के राज्य में आरोहित किया जा सकता है या नहीं। इसलिए, सत्‍य के इस पहलू को समझना बहुत ज़रूरी है। ऐसा क्यों है कि परमेश्वर को अंत के दिनों में अपने न्याय के कार्य के लिए स्वयं देहधारण करना होगा, बजाय इसके कि वे अपना कार्य करने के लिए मनुष्य को इस्तेमाल करें? यह न्याय के कार्य के स्वभाव से तय होता है। क्योंकि न्याय का कार्य परमेश्वर द्वारा सत्‍य की अभिव्यक्ति है और यह मानवजाति को जीतने, शुद्ध करने और बचाने के लिए उनका जो धार्मिक स्वभाव है उसकी अभिव्यक्ति है। आइये सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के कुछ अंश पढ़ें।

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Hindi Christian Video | दिखावा, अब और नहीं

Hindi Christian Video | दिखावा, अब और नहीं

मोवेन कलीसिया में एक सुसमाचार उपयाजक है। अपने भाई-बहनों के काम में कुछ समस्याएँ सुलझा देने और अपने काम में कुछ हासिल कर लेने के कारण वह खुद को बाकी सभी लोगों से बेहतर समझने लगता है। वह अपनी हर बात और हर काम में, अपने गुणों और काबिलियत की शेखी बघारता है, और दिखावा करता है कि अपने कर्तव्य के लिए वह किस तरह कष्ट झेलता है। पढना जारी रखे

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Christian Devotional Song in Hindi | इंसान ने ईश्वर को अपना दिल नहीं दिया है (Lyrics)

Christian Devotional Song in Hindi | इंसान ने ईश्वर को अपना दिल नहीं दिया है (Lyrics)

भले ही ईश्वर को अपने दिल मेंझाँकने देता हो इंसान,
इसके मायने नहीं कि ईश-व्यवस्था कापालन करता इंसान,
या अपनी नियति, अपना सब-कुछ
किया ईश्वर के हवाले इंसान ने।
ईश्वर के आगे तुम कोई भी शपथ लो,
कुछ भी ऐलान करो,
ईश्वर की नज़र में तुम्हारा दिलअभी भी बंद है उसके लिए,
क्योंकि तुम इस पर काबूकरने नहीं देते उसे।

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परमेश्वर का कार्य सदा नया होता है कभी पुराना नहीं होता | Hindi Christian Song With Lyrics

परमेश्वर का कार्य सदा नया होता है कभी पुराना नहीं होता | Hindi Christian Song With Lyrics

अनुग्रह के युग में पीछे रह गया था
यहोवा का काम, कहा था यीशु ने कभी।
उसी तरह पीछे रह गया है यीशु का काम
है आज मेरा यही बयान।
सिर्फ़ व्यवस्था का युग होता,
अगर अनुग्रह का युग न होता,
तो यीशु को सूली पर न चढ़ाया गया होता,
और उसने इंसान को छुटकारा न दिलाया होता।

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परमेश्वर के नामों के रहस्य को समझकर, मैं मेमने के पदचिह्नों पर चल पाती हूँ

लेखिका मु झेन, ताइवान

जब मैं छोटी थी, मैं एक तेज़ और समझदार बच्ची थी और इसलिए मुझे हमेशा मेरे माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों का भरपूर प्यार मिलता था। क्योंकि स्कूल में हमेशा मुझे अच्छे ग्रेड आते थे, मैं विनम्र और मिलनसार थी, इसलिये शिक्षक और सहपाठी मुझे काफ़ी पसंद करते थे। उस दौरान, मैं भविष्य के प्रति उम्मीदों से भरपूर थी। हालांकि, जब हाई स्कूल के टेस्ट का समय आया तो मैं हैरान रह गई, मैं सबसे अच्छी लड़कियों के स्कूल के लिये क्वालीफ़ाई करने से सिर्फ़ आधे पॉइंट से चूक गई थी, तब मुझे इसके बजाय दूसरी श्रेणी के स्कूल में दाखिला मिला। जो कुछ हुआ था, मैं उसे स्वीकार नहीं कर पाई थी और मैंने दो दिनों तक अपने आपको एक कमरे में बंद कर लिया था, मैंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। यह पहला अवसर था जब मैंने अपने जीवन में नाकामी का सामना किया था—मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि मैं रसातल में गिर गई थी, मैं पीड़ा और संताप से भर गई थी।

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हम लोग अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि परमेश्वर का राज्य धरती पर है या स्वर्ग में। प्रभु यीशु ने “स्वर्ग का राज्य पास में हैं” और “स्वर्ग का राज्य आता है” के बारे में बात की थी। अगर यह “स्वर्ग का राज्य,” है तो यह स्वर्ग में होना चाहिये। यह धरती पर कैसे हो सकता है?

उत्तर: हमें एक बात स्पष्ट होनी चाहिये कि “स्वर्ग” को हमेशा परमेश्वर के रूप में, देखते हैं। “स्वर्ग का राज्य” यानी परमेश्वर का राज्य। प्रकाशित-वाक्य में लिखा है, “परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है।” “जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया।” इसका मतलब है कि परमेश्वर का राज्य पृथ्वी पर स्थापित होगा। अंत में, पृथ्वी का राज्य परमेश्वर का राज्य बनेगा। महाविपदा में पुराने विश्व के तबाह होने के बाद, सहस्राब्दि राज्य प्रकट होगा। पृथ्वी के राज्य हमारे प्रभु और उनके मसीह के राज्य बनेंगे। तब, परमेश्वर की इच्छा पृथ्वी पर, पूरी होगी, जैसी कि यह स्वर्ग में है। पढना जारी रखे

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आज का वचन | “मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना” | अंश 2

आज का वचन | “मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना” | अंश 2

6,000 वर्षों के परमेश्वर के प्रबधंन के कार्य को तीन चरणों में बांटा गया है: व्यवस्था का युग, अनुग्रह का युग, और राज्य का युग। इन तीन चरणों का सम्पूर्ण कार्य मानवजाति के उद्धार के लिए है, कहने का तात्पर्य है, वे ऐसी मानवजाति के उद्धार के लिए हैं जिसे शैतान के द्वारा बुरी तरह से भ्रष्ट कर दिया गया है। फिर भी, ठीक उसी समय वे इसलिए भी हैं ताकि परमेश्वर शैतान के साथ युद्ध कर सके। इस प्रकार, जैसे उद्धार के कार्य को तीन चरणों में बांटा गया है, वैसे ही शैतान के साथ युद्ध को भी तीन चरणों में बांटा गया है, और परमेश्वर के कार्य के इन दो चरणों को एक ही समय में संचालित किया जाता है। पढना जारी रखे

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स्वर्गारोहण करना और आपदाओं से पहले प्रभु के साथ दावत में भाग लेना

01परमेश्वर की वाणी सुनो और उनके सामने स्वर्गारोहण करो—प्रभु के साथ दावत में भाग लो

बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार, परमेश्वर आपदाओं से पहले आएँगे। अब जब कि एक के बाद एक आपदाएँ आ रही हैं, तो कैसे हम परमेश्वर का स्वागत कर सकते हैं, कैसे परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहण कर सकते हैं, और कैसे प्रभु के साथ दावत में भाग ले सकते हैं? प्रभु यीशु ने कहा, “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)। “आधी रात को धूम मची: ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो’” (मत्ती 25:6)। इससे हम देख सकते हैं कि वास्तव में स्वर्गारोहित होने के लिए, हमें उन बुद्धिमान कुंवारियों की तरह बनना होगा जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनना सीखती हैं और दूल्हे का स्वागत करती हैं।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद

“देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

“जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है” (प्रकाशितवाक्य 2:7)।

“मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं” (यूहन्ना 10:27)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया|बुद्धिमान कुँवारियाँ दूल्हे का स्वागत करती हैं
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सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय केवल परमेश्वर की वाणी को ही सुनें—आपको शैतान की अफ़वाहों और झूठों को नहीं सुनना चाहिए

03सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय केवल परमेश्वर की वाणी को सुनें

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक यह भविष्यवाणी करती है, “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर—अंत के दिनों का मसीह—अपने कथनों के माध्यम से मनुष्य के सामने प्रकट होता है। बुद्धिमान कुंवारियाँ सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को सुनती हैं और उन्हें सत्य यानी परमेश्वर की वाणी मानती हैं। वे किसी भी अफ़वाह या झूठ से लेशमात्र भी धोखा नहीं खाती हैं और वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर का दृढ़ता से अनुसरण करती हैं। फिर वे प्रभु का स्वागत करने, मेमने की दावत में शामिल होने और अंत के दिनों के परमेश्वर का उद्धार प्राप्त करने में सक्षम होती हैं। यह स्पष्ट है कि परमेश्वर की वाणी को सुनना ही सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करने और प्रभु का स्वागत करने का एकमात्र रास्ता है।

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मसीही वीडियो | युवा हूँ मगर अब बेपरवाह नहीं

मसीही वीडियो | युवा हूँ मगर अब बेपरवाह नहीं

मुख्य किरदार ने बचपन से ही गुझेंग बजाने का अध्ययन किया और एक संगीत अकादमी से स्नातक हुई। अपना कर्तव्य निभाने के दौरान कुछ बहनों के साथ काम करते हुए, वह खुद को दूसरों से ऊपर रखने और अधिकार चलाकर उन्हें खरी-खोटी सुनाने के लिए अक्सर अपने पेशेवर हुनर का इस्तेमाल करती है। पढना जारी रखे

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मसीही वीडियो | परमेश्वर का नाम वाकई रहस्यमयी है

मसीही वीडियो | परमेश्वर का नाम वाकई रहस्यमयी है

मुख्य किरदार एक ईसाई परिवार में पैदा हुआ था, उसने बचपन से अपने परिवार को यह कहते सुना था कि सिर्फ़ प्रभु यीशु के नाम पर प्रार्थना करने से ही वह स्वर्ग के राज्य में जा सकता है। डिविनिटी स्कूल से स्नातक करने के बाद, वह स्थानीय विश्वासियों को मार्ग दिखाना शुरू कर देता है। लेकिन बाद में, कलीसिया सूनी होती चली जाती है, ढेरों प्रार्थना करने, बाइबल पढ़ने, और व्रत रखने के बावजूद भी, वह पवित्र आत्मा के कार्य को महसूस नहीं कर पाता। पढना जारी रखे

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Christian Movie अंश 4 : “तोड़ डालो अफ़वाहों की ज़ंजीरें” – परमेश्वर इन्सान को शैतान से कैसे बचाता है

Hindi Christian Movie अंश 4 : “तोड़ डालो अफ़वाहों की ज़ंजीरें” – परमेश्वर इन्सान को शैतान से कैसे बचाता है

बाइबल में कहा गया है, “क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए…” (1 पतरस 4:17)। (© BSI) अंत के दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य को शुद्ध करके बचाने वाले सभी सत्य व्यक्त करते हैं, और वे हमें अपना धर्मी, प्रतापी, और अपमानित न किया जा सकनेवाला स्वभाव प्रदर्शित करते हैं। परमेश्वर का अंत के दिनों का न्याय-कार्य मनुष्य को बचाने के लिए किया जाता है, ताकि लोग शैतान के दुष्प्रभावों को तोड़ सकें और सही मायनों में परमेश्वर की शरण में आ सकें। पढना जारी रखे

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Hindi Christian Video| बुद्धिमान कुँवारियों ने प्रभु का स्वागत कैसे किया

Hindi Christian Video| बुद्धिमान कुँवारियों ने प्रभु का स्वागत कैसे किया

ऐनिक और मिरेइल अच्छी मित्र हैं। एक दिन, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया द्वारा बनायी फ़िल्म “कहाँ है घर मेरा” देखते समय संयोग से उन्हें एक मौक़ा मिलता है। उन्हें यह फिल्म बहुत प्रेरक लगती है, और मुख्य किरदार की नियति बदल देने वाली क़िताब उनमें ख़ास उत्सुकता जगाती है। वे क़िताब के वचनों के स्नेह और अधिकार को समझ पाती हैं और उन्हें लगता है कि कोई भी साधारण इंसान ऐसे वचन नहीं बोल सकता। पढना जारी रखे
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बाइबिल के उपदेश: हम बुद्धिमान कुंवारियाँ परमेश्वर की वाणी कैसे सुनें?

बुद्धिमान कुँवारियाँ दूल्हे का स्वागत करती हैं
बाइबिल के उपदेश: हम बुद्धिमान कुंवारियाँ परमेश्वर की वाणी कैसे सुनें?

बहन मु झेन,

आपको प्रभु में शांति मिले! आपका पत्र पाकर मैं बहुत खुश हूँ। आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रभु के आगमन का दिन निकट है, आप स्वेच्छा से पवित्रशास्त्र पढ़ रही हैं, अधिक प्रार्थना भी कर रही हैं, और प्रभु के लिए अधिक कार्य कर रही हैं ताकि आप उन बुद्धिमान कुंवारियों में से एक हो सकें जो प्रभु के आगमन की सतर्कता से प्रतीक्षा करती हैं। हालाँकि, इन बातों ने आपकी आध्यात्मिक तीक्ष्णता को न तो तेज किया है, न ही प्रभु के प्रति आपके विश्वास या प्रेम को बढ़ाया है। आप इस बारे में भ्रमित हैं कि क्या इस तरह से तलाशने से आप एक बुद्धिमान कुंवारी के रूप में गिनी जा सकती हैं और यह जानना चाहती हैं कि प्रभु का स्वागत करने के लिए आपको किस प्रकार का अभ्यास करना चाहिए। बहन मु झेन, आपने जो प्रश्न उठाया है, वह इस बात के लिए महत्वपूर्ण है कि हम प्रभु का स्वागत कर सकते हैं या नहीं। हम सभी बुद्धिमान कुंवारी बनना चाहते हैं जो प्रभु की वापसी का स्वागत कर सकते हैं और उसके साथ स्वर्ग के राज्य के भोज में भाग ले सकते हैं—कोई भी मूर्ख कुंवारी नहीं बनना चाहता है जो प्रभु द्वारा अलग कर दी जाती है, लेकिन वास्तव में किस तरह का अभ्यास करना बुद्धिमान कुंवारी जैसा बनना है? मैं इस मुद्दे के बारे में अपनी व्यक्तिगत समझ साझा करना चाहती हूँ—मुझे उम्मीद है कि यह आपके लिए मददगार होगी।

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परमेश्वर का वचन वीडियो | “बाइबल के विषय में (2)” | अंश 270

परमेश्वर का वचन वीडियो | “बाइबल के विषय में (2)” | अंश 270

बाइबल को पुराना नियम और नया नियम भी कहते हैं। क्या तुम लोग जानते हो कि “नियम” से क्या तात्पर्य है? “पुराने नियम” में “नियम” इस्राएल के लोगों के साथ बांधी गई परमेश्वर की वाचा से आता है, जब उसने मिस्रियों को मार डाला था और इस्राएलियों को फिरौन से बचाया था। बेशक, इस वाचा का प्रमाण दरवाज़ों की चौखट के ऊपर पोता गया मेमने का लहू था, जिसके द्वारा परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बांधी थी, जिसमें कहा गया था कि वे सभी लोग, जिनके दरवाज़ों के ऊपर और अगल-बगल मेमने का लहू लगा हुआ है, इस्राएली हैं, वे परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं, और उन सभी को यहोवा द्वारा बख्श दिया जाएगा (क्योंकि यहोवा तब मिस्र के सभी ज्येष्ठ पुत्रों और ज्येष्ठ भेड़ों और मवेशियों को मारने ही वाला था)। पढना जारी रखे

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मसीह के वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 74

मसीह के वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 74

जब परमेश्वर देहधारी हुआ और मानव जाति के बीच रहने लगा, तो उसने अपनी देह में किस प्रकार के दुख का अनुभव किया? क्या कोई सचमुच में समझ सकता है? कुछ लोग कहते हैं कि परमेश्वर ने बड़ा दुःख सहा, और यद्यपि वह स्वयं परमेश्वर है, लोगों ने उसके सार को नहीं समझा और हमेशा उसके साथ एक मनुष्य के समान व्यवहार किया, जिस से वह दुखित और चोटिल महसूस करता है—वे कहते हैं कि परमेश्वर का दुःख भोग सचमुच बहुत बड़ा था। कुछ अन्य लोग कहते हैं कि परमेश्वर निर्दोष और निष्पाप है, परन्तु उसने मनुष्य के समान दुःख उठाया और मनुष्य के साथ साथ सताव, निंदा, और अपमान सहता है; वे कहते हैं कि वह अपने अनुयायियों की ग़लतफहमियों और अनाज्ञाकारिता को भी सहता है—परमेश्वर के दुःख भोग को सचमुच में नापा नहीं जा सकता है। ऐसा दिखाई देता है कि तुम लोग सचमुच में परमेश्वर को नहीं समझते हो। पढना जारी रखे

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2020 Hindi Christian Song | परमेश्वर के वचनों के प्रति कैसा दृष्टिकोण अपनायें

सुनिए एक साथ परमेश्वर के भजन

2020 Hindi Christian Song| परमेश्वर के वचनों के प्रति कैसा दृष्टिकोण अपनायें

मैंने दी हैं तुम सबको कई चेतावनी।
दिये सत्य ताकि जीत सकूँ तुम्हें।
न शक करो, न छोड़ो मेरे वचनों को;
यह मुझे बर्दाश्त नहीं।

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Hindi Christian Movie अंश 1 : “विजय गान” – अपने पुनरागमन पर प्रभु कैसे प्रकट होंगे और वे अपना कार्य कैसे करेंगे?

बाइबिल के उपदेश: “लेकिन उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता” के रहस्य का खुलासा

Hindi Christian Film अंश 1 : “विजय गान” – अपने पुनरागमन पर प्रभु कैसे प्रकट होंगे और वे अपना कार्य कैसे करेंगे?

अंत के दिनों में भीषण आपदा के अपशकुन–चार रक्तिम चंद्रमा प्रकट हो चुके हैं और आसमान में सितारों ने एक अजीब रूप ले लिया है; भीषण आपदायें करीब आ रही हैं, और प्रभु में विश्वास करने वाले कई लोगों को यह अनुभव होने लगा था कि प्रभु का दूसरा आगमन होने वाला है या उनका आगमन पहले ही हो चुका है। पढना जारी रखे

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Hindi Christian Film अंश 1 : “बेड़ियों को तोड़ो और भागो” – बेड़ियों को तोड़ डालो और सच्चे मार्ग का अध्ययन करो

Hindi Christian Film अंश 1 : “बेड़ियों को तोड़ो और भागो” – बेड़ियों को तोड़ डालो और सच्चे मार्ग का अध्ययन करो

धार्मिक पादरियों की बातों पर आँखें मूंदकर विश्वास करने के कारण, एल्डर ली ने महसूस किया कि परमेश्वर के सभी कार्य और वचन बाइबल में दर्ज थे और बाइबल के बाहर जो कुछ भी है वे परमेश्वर के कार्य और वचन नहीं हो सकते। पढना जारी रखे

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सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय केवल परमेश्वर की वाणी को ही सुनें—आपको शैतान की अफ़वाहों और झूठों को नहीं सुनना चाहिए

02सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय शैतान की अफ़वाहों और झूठों पर विश्वास करने का परिणाम

सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करने में सबसे महत्वपूर्ण बात केवल परमेश्वर की वाणी को सुनना और शैतान की अफवाहों और झूठों को पूरी तरह से अनसुना करना है; सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है, इसका हमारे परिणाम और अंतिम मंजिल पर सीधा असर पड़ता है। अगर लोग केवल सीसीपी सरकार के साथ-साथ पादरियों और एल्डर की अफ़वाहों और झूठों को सुनते रहें और उन बातों को न सुनें जो कि आत्मा कलीसियाओं से कहता है, तो फ़िर उनका क्या होगा?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद

“मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्‍ट हो गई” (होशे 4:6)।

“परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने के कारण मर जाते हैं” (नीतिवचन 10:21)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन

प्रभु यीशु मसीह का स्वागत कैसे करें
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परमेश्वर के भजन | परमेश्वर के प्रकटन की महत्ता (Lyrics)

परमेश्वर के भजन | परमेश्वर के प्रकटन की महत्ता (Lyrics)

परमेश्वर के प्रकटन के मायने हैं,
अपने काम की ख़ातिर धरती पर उसका निजी आगमन।
वो अपनी पहचान, अपने स्वभाव, अपने तरीके से,
युग शुरु करने, युग का अंत करने, इंसानों के बीच आता है।
ऐसा प्रकटन न प्रतीक है, न तस्वीर है।
ये रस्म का रूप नहीं।
ये चमत्कार नहीं, ये भव्य दर्शन नहीं।
ये धार्मिक रीति तो बिल्कुल नहीं।
ये हकीकत है, सच्चाई है जिसे छुआ और देखा जा सकता है,
ये हकीकत है, सच्चाई है जिसे छुआ और देखा जा सकता है,
ऐसा सच जिसे छुआ और देखा जा सकता है।
ऐसा प्रकटन किसी व्यवस्था के पालन के लिए नहीं है,
न ही ये थोड़े वक्त का वचन है;
बल्कि ये परमेश्वर की प्रबंधन योजना में, काम के चरण के लिए है,
काम के चरण के लिए है।

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सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय केवल परमेश्वर की वाणी को ही सुनें—आपको शैतान की अफ़वाहों और झूठों को नहीं सुनना चाहिए

01सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय सबसे आसानी से हो सकने वाली गलती

क्या आप जानते हैं कि क्यों शैतान हव्वा को धोखा देने और उसके ऊपर से परमेश्वर का आशीष हटाने में कामयाब हो पाया? क्या आप जानते हैं कि क्यों आम यहूदी लोग प्रभु का विरोध करने के लिए फ़रीसियों के साथ मिल गये और इस तरह प्रभु के उद्धार को गँवा बैठे? इसका मुख्य कारण यह था कि उन्होंने परमेश्वर के वचनों को नहीं सुना, बल्कि केवल शैतान की अफ़वाहों और झूठ को सुनते रहे। प्रभु काफ़ी समय पहले लौट आया है : वह सत्य को व्यक्त करता है और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य करता है, बहुत से लोग आज उसी ग़लती को दोहरा रहे हैं जो हव्वा और आम यहूदी लोगों ने की थी। वे धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डर की उन भ्रांतियों और झूठों पर आँखें बंद करके विश्वास कर लेते हैं, जो प्रभु के वचनों के विरुद्ध होते हैं, जैसे कि “ऐसा कोई भी उपदेश जो कहता है कि परमेश्वर ने देहधारण किया है, गलत है।” वे यह सुनना ही नहीं चाहते कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है, जैसा कि अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किया गया है। क्या ऐसे संभ्रमित, अविवेकी लोग प्रभु के आगमन पर उसका स्वागत कर सकते हैं?

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अब मुझे बाइबल और परमेश्वर के बीच का रिश्ता समझ आ गया है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “बहुत सालों से, लोगों के विश्वास का परम्परागत माध्यम (दुनिया के तीन मुख्य धर्मों में से एक, मसीहियत के विषय में) बाइबल पढ़ना ही रहा है; बाइबल से दूर जाना प्रभु में विश्वास नहीं है, बाइबल से दूर जाना एक पाषंड और विधर्म है, और यहाँ तक कि जब लोग अन्य पुस्तकों को पढ़ते हैं, तो इन पुस्तकों की बुनियाद, बाइबल की व्याख्या ही होनी चाहिए। कहने का अर्थ है कि, यदि तुम प्रभु में विश्वास करते हो, तो तुम्हें बाइबल अवश्य पढ़नी चाहिए, बाइबल के अलावा तुम्हें किसी अन्य पुस्तक की आराधना नहीं करनी चाहिए जिस में बाइबल शामिल नहीं हो। यदि तुम करते हो, तो तुम परमेश्वर के साथ विश्वासघात कर रहे हो। उस समय से जब बाइबल थी, प्रभु के प्रति लोगों का विश्वास, बाइबल के प्रति विश्वास रहा है। यह कहने के बजाए कि लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, यह कहना बेहतर है कि वे बाइबल में विश्वास करते हैं; यह कहने की अपेक्षा की उन्होंने बाइबल पढ़नी आरम्भ कर दी है, यह कहना बेहतर है कि उन्होंने बाइबल पर विश्वास करना आरम्भ कर दिया है; और यह कहने की अपेक्षा कि वे प्रभु के सामने वापस आ गए हैं, यह कहना बेहतर होगा कि वे बाइबल के सामने वापस आ गए हैं। इस तरह से, लोग बाइबल की आराधना ऐसे करते हैं मानो कि यह परमेश्वर है, मानो कि यह उनका जीवन रक्त है और इसे खोना अपने जीवन को खोने के समान होगा। लोग बाइबल को परमेश्वर के समान ही ऊँचा देखते हैं, और यहाँ तक कुछ ऐसे भी हैं जो इसे परमेश्वर से भी ऊँचा देखते हैं। यदि लोग पवित्र आत्मा के कार्य के बिना हैं, यदि वे परमेश्वर का एहसास नहीं कर सकते हैं, तो वे जीवन जीते रह सकते हैं— परंतु जैसे ही वे बाइबल को खो देते हैं, या बाइबल के प्रसिद्ध अध्यायों और कथनों को खो देते हैं, तो यह ऐसा है मानो उन्होंने अपना जीवन खो दिया हो। … बाइबल लोगों के मनों में एक आदर्श बन चुकी है, यह उनके मस्तिष्कों में एक पहेली बन चुकी है, वे मात्र यह विश्वास करने में असमर्थ हैं कि परमेश्वर बाइबल से अलग भी काम कर सकता है, वे यह विश्वास करने में बिल्कुल असमर्थ हैं कि लोग बाइबल के बाहर भी परमेश्वर को पा सकते हैं, और वे यह बिलकुल भी विश्वास करने में सक्षम नहीं हैं कि परमेश्वर अंतिम कार्य के दौरान बाइबल से दूर जा सकता है और एक नए सिरे से शुरू कर सकता है। पढना जारी रखे

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 81

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 81

अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है

(लूका 24:30-32) जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उनकी आँखों से छिप गया। उन्होंने आपस में कहा, “जब वह मार्ग में हम से बातें करता था और पवित्रशा स्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हुई?”

चेलों ने यीशु को खाने के लिए भूनी हुई मछली दी

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क्या आकाश की ओर देखकर तुम वाकई प्रभु का स्वागत कर सकते हो?

बहुत-से विश्वासी प्रभु यीशु के बादल पर सवार होकर नीचे उतरने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि वे विपत्तियाँ आने से पहले परमेश्वर के राज्य में ले जाए जा सकें। लेकिन इस दौरान, वे विपत्तियों को तो बढ़ते देख रहे हैं, मगर प्रभु यीशु अब भी बादल पर सवार होकर नहीं आया। बहुत-से लोगों की आस्था डगमगाने लगी है। कुछ लोग कहते हैं, प्रभु अपनी मर्ज़ी से आयेगा, हमें बस प्रतीक्षा करनी चाहिए। दूसरे कहते हैं, अगर वह विपत्तियों के आने से पहले नहीं आया, तो हो सकता है वह विपत्तियों के दौरान या उनके बाद आये। इन बयानों से क्या पता चलता है? क्या ये नहीं दिखाते कि उनकी आस्था बिल्कुल सतही है? उन्होंने आस्था गँवा दी है, वे न इसे खोज रहे हैं और न ही इस पर गौर कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ विपत्तियों के आने का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि और क्या करें। वे वर्षों से आकाश की ओर टकटकी लगाये देख रहे हैं, मगर अभी तक प्रभु का स्वागत नहीं कर पाये। क्या वाकई यही तरीका सही है? प्रभु का स्वागत करने के लिए सबसे अहम क्या है? मुझे याद है प्रभु यीशु ने कहा : “मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं” (यूहन्ना 10:27)। “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)। प्रकाशित वाक्य में भी कई जगहों पर यह भविष्यवाणी की गयी है : “जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है” (प्रकाशितवाक्य अध्याय 2, 3)। ये पद दिखाते हैं कि प्रभु के आने का स्वागत करने की कुंजी है आत्मा द्वारा कलीसियाओं से कही गयी बातों को खोजना, और परमेश्वर की वाणी को सुनना। जो लोग परमेश्वर की वाणी को सुनते हैं, वे प्रभु का स्वागत करते हैं, वे ही बुद्धिमान कुँवारियाँ हैं। मैं इस सत्य को पहले नहीं समझ पाया था, मगर अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के भरोसे रहा, बस आकाश की ओर टकटकी लगाये देखता रहा। जब मैंने किसी व्यक्ति को गवाही देते सुना कि प्रभु यीशु पहले ही वापस आ चुका है और कई सत्य व्यक्त कर रहा है, तो मैंने न तो उसे खोजा, न ही उसकी जांच-पड़ताल की, मैंने प्रभु का स्वागत करने और स्वर्गारोहण का अपना मौक़ा लगभग गँवा दिया।

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कार्य और प्रवेश (6)

कार्य और प्रवेश अंतर्निहित रूप से व्यावहारिक हैं; वे परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के प्रवेश को संदर्भित करते हैं। परमेश्वर के वास्तविक चेहरे और उसके कार्य को समझने में मनुष्य की पूर्ण अक्षमता ने उसके प्रवेश में अत्यधिक कठिनाई लाई है। आज तक, बहुत-से लोग अब भी नहीं जानते कि अंत के दिनों में परमेश्वर कौन-सा कार्य संपन्न करेगा या परमेश्वर ने मनुष्य के साथ उसके सुख-दुःख में खड़े होने के लिए देह में आने हेतु चरम अपमान क्यों सहा? मनुष्य, परमेश्वर के कार्य के लक्ष्य से लेकर अंत के दिनों के लिए परमेश्वर की योजना के प्रयोजन तक सभी चीज़ों के बारे में पूरी तरह से अँधेरे में है। विभिन्न कारणों से, लोग सदैव उस प्रवेश के प्रति निरुत्साहित और अनिश्चित[1] रहते हैं, जिसकी परमेश्वर उनसे माँग करता है, जिसने देह में परमेश्वर के कार्य में अत्यधिक कठिनाई ला दी है। ऐसा प्रतीत होता है कि सभी लोग बाधाएँ बन गए हैं, और आज तक, वे सब अस्पष्ट ही हैं। इसलिए, मैं समझता हूँ कि हमें परमेश्वर द्वारा मनुष्य पर किए जाने वाले कार्य और परमेश्वर के अत्यावश्यक इरादे के बारे में बात करनी चाहिए, ताकि तुम सभी लोग परमेश्वर के वफ़ादार सेवक बन जाओ, जो अय्यूब की तरह परमेश्वर को अस्वीकार करने के बजाय हर अपमान सहते हुए मर जाएँगे; और जो पतरस की तरह अपना समस्त अस्तित्व परमेश्वर को अर्पित कर देंगे और अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए गए उसके अंतरंग बन जाएँगे। काश, सभी भाई-बहन परमेश्वर की स्वर्गिक इच्छा के लिए अपना सर्वस्व प्रदान कर दें और उसे अपना समस्त अस्तित्व अर्पित कर दें, परमेश्वर के घर में पवित्र सेवक बन जाएँ, और परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए अनंतता के वादे का आनंद लें, ताकि परमपिता परमेश्वर का हृदय शीघ्र ही शांतिपूर्ण आराम का आनंद ले सके। “परमपिता परमेश्वर की इच्छा पूरी करो” उन सभी का आदर्श वाक्य होना चाहिए, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं। इन वचनों को प्रवेश के लिए मनुष्य की मार्गदर्शिका और उसके कार्यों का निर्देशन करने वाले कम्पास का काम करना चाहिए। मनुष्य में यही संकल्प होना चाहिए। पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य को पूरी तरह से संपन्न करना और देह में परमेश्वर के कार्य में सहयोग करना—यही मनुष्य का कर्तव्य है, उस दिन तक, जब परमेश्वर का कार्य हो जाएगा और मनुष्य उसे स्वर्ग में परमपिता के पास शीघ्र लौटने पर विदाई देगा। क्या मनुष्य को यह दायित्व पूरा नहीं करना चाहिए?

जब, अनुग्रह के युग में, परमेश्वर तीसरे स्वर्ग में लौटा, तो समस्त मानव-जाति के छुटकारे का परमेश्वर का कार्य वास्तव में पहले ही अपने अंतिम भाग में पहुँच गया था। धरती पर जो कुछ शेष रह गया था, वह था सलीब जिसे यीशु ने अपनी पीठ पर ढोया था, बारीक सन का कपड़ा जिसमें यीशु को लपेटा गया था, और काँटों का मुकुट और लाल रंग का लबादा जो यीशु ने पहना था (ये वे वस्तुएँ थीं, जिनसे यहूदियों ने उसका मज़ाक उड़ाया था)। अर्थात्, यीशु के सलीब पर चढ़ने के कार्य से अत्यधिक सनसनी उत्पन्न होने के बाद, चीज़ें फिर से शांत हो गईं। तब से यीशु के शिष्यों ने हर जगह कलीसियाओं में चरवाही और सिंचन करते हुए उसके कार्य को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। उनके कार्य की विषयवस्तु यह थी : उन्होंने सभी लोगों से पश्चात्ताप करने, अपने पाप स्वीकार करने और बपतिस्मा लेने के लिए कहा; और सभी प्रेरित यीशु के सलीब पर चढ़ने की अंदर की कहानी, असली वृत्तांत फैलाने के लिए आगे बढ़ गए, और इसलिए हर कोई अपने पाप स्वीकार करने के लिए स्वयं को यीशु के सामने दंडवत होने से नहीं रोक पाया; और इसके अलावा प्रेरित हर जगह जाकर यीशु द्वारा बोले गए वचन सुनाने लगे। उस क्षण से अनुग्रह के युग में कलीसियाओं का निर्माण होना शुरू हुआ। उस युग में यीशु ने मनुष्य के जीवन और स्वर्गिक पिता की इच्छा के बारे में भी बात की, लेकिन चूँकि वह एक अलग युग था, इसलिए उनमें से कई उक्तियाँ और अभ्यास आज की उक्तियों और अभ्यासों से बहुत भिन्न थीं। किंतु दोनों का सार एक ही है : दोनों हूबहू और यथार्थत: देह में परमेश्वर के आत्मा के कार्य हैं। इस प्रकार का कार्य और कथन आज के दिन तक जारी है, और यही कारण है कि आज के धार्मिक संस्थानों में अभी भी इसी प्रकार की चीज़ों को साझा किया जाता है, और यह सर्वथा अपरिवर्तित है। जब यीशु का कार्य संपन्न हो गया और कलीसियाएँ पहले ही यीशु मसीह के सही मार्ग पर आ चुकी थीं, तब भी परमेश्वर ने अपने कार्य के एक अन्य चरण के लिए अपनी योजना शुरू कर दी, जो कि अंत के दिनों में उसका देह में आने का मामला था। जैसा कि मनुष्य इसे देखता है, परमेश्वर के सलीब पर चढ़ने ने परमेश्वर के देहधारण के कार्य को पहले ही संपन्न कर दिया था, समस्त मानव-जाति को छुटकारा दिला दिया था, और परमेश्वर को अधोलोक की चाबी लेने दी थी। हर कोई सोचता है कि परमेश्वर का कार्य पूरी तरह से निष्पादित हो चुका है। वस्तुत:, परमेश्वर के दृष्टिकोण से, उसके कार्य का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही निष्पादित हुआ है। उसने मानवजाति को केवल छुटकारा दिलाया था; उसने मानवजाति को जीता नहीं था, मनुष्य के शैतानी चेहरे को बदलने की बात तो छोड़ ही दो। इसीलिए परमेश्वर कहता है, “यद्यपि मेरे द्वारा धारित देह मृत्यु की पीड़ा से गुज़री, किंतु वह मेरे देहधारण का संपूर्ण लक्ष्य नहीं था। यीशु मेरा प्यारा पुत्र है और उसे मेरे लिए सलीब पर चढ़ा दिया गया, किंतु उसने मेरे कार्य का पूरी तरह से समापन नहीं किया। उसने केवल उसका एक अंश पूरा किया।” इस प्रकार परमेश्वर ने देहधारण के कार्य को जारी रखने के लिए योजनाओं के दूसरे चक्र की शुरुआत की। परमेश्वर का अंतिम इरादा शैतान के पंजों से बचाए गए हर व्यक्ति को पूर्ण बनाना और प्राप्त करना था, यही वजह है कि परमेश्वर एक बार फिर देह में आने का खतरा उठाने के लिए तैयार हो गया। “देहधारण” से तात्पर्य उससे है, जो महिमा नहीं लाता (क्योंकि परमेश्वर का कार्य अभी तक समाप्त नहीं हुआ है), बल्कि जो प्यारे पुत्र की पहचान में प्रकट होता है, और मसीह है, जिससे परमेश्वर बहुत प्रसन्न है। यही कारण है कि इसे “खतरा उठाना” कहा जाता है। धारित देह कमज़ोर सामर्थ्य वाला है और उसे अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए,[2] और उसका सामर्थ्य स्वर्गिक पिता के अधिकार से एकदम अलग है; वह अन्य कार्य में शामिल हुए बिना परमपिता परमेश्वर का कार्य और आज्ञा पूरी करता हुआ, केवल देह की सेवकाई पूरी करता है, और वह केवल कार्य के एक हिस्से को पूरा करता है। यही कारण है कि परमेश्वर के पृथ्वी पर आते ही उसे “मसीह” नाम दिया गया—यह इस नाम का सन्निहित अर्थ है। यह कहे जाने का कि आगमन के संग प्रलोभन भी होते हैं, यह कारण है कि कार्य का केवल एक हिस्सा पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा, परमपिता परमेश्वर द्वारा उसे केवल “मसीह” और “प्यारा पुत्र” कहने, लेकिन उसे महिमा न देने का ठीक-ठीक कारण यह है कि देहधारी केवल कार्य का एक हिस्सा करने के लिए आता है, स्वर्ग के परमपिता का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं, बल्कि प्यारे पुत्र की सेवकाई पूरी करने के लिए। जब प्यारा पुत्र अपने कंधे पर उठाए गए समस्त कार्यभार को पूरा कर लेता है, तो परमपिता उसे परमपिता की पहचान के साथ-साथ पूर्ण महिमा भी देता है। कहा जा सकता है कि यह “स्वर्ग की संहिता” है। चूँकि वह, जो देह में आया है, और स्वर्ग का परमपिता, दो अलग-अलग लोकों में हैं, दोनों आत्मा में एक-दूसरे को केवल निहारते हैं, परमपिता प्रिय पुत्र पर नज़र रखता है, किंतु पुत्र दूर से परमपिता को देखने में असमर्थ है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि देह जो कार्य करने में सक्षम है, वे बहुत छोटे हैं और उसे किसी भी क्षण मार दिए जाने की संभावना है, और कहा जा सकता है कि यह आगमन सबसे बड़े ख़तरे से भरा है। यह परमेश्वर द्वारा अपने प्रिय पुत्र को एक बार फिर शेर के मुँह में, जहाँ उसका जीवन ख़तरे में है, छोड़ने जैसा है, उसे ऐसी जगह छोड़ने के बराबर है जहाँ शैतान सबसे अधिक केंद्रित है। इन विकट स्थितियों में भी परमेश्वर ने अपने प्रिय पुत्र को एक गंदगी और व्यभिचार से भरे स्थान के लोगों को उसे “वयस्कता की अवस्था में लाने” के लिए सौंप दिया। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यही एक तरीका है जिससे परमेश्वर का कार्य उपयुक्त और स्वाभाविक प्रतीत हो सकता है, और यही एक तरीका है जिससे परमपिता परमेश्वर की सभी इच्छाएँ पूरी की जा सकती हैं और मानवजाति के बीच उसके कार्य के अंतिम हिस्से को पूरा किया जा सकता है। यीशु ने परमपिता परमेश्वर के कार्य का एक चरण निष्पादित करने से अधिक कुछ नहीं किया। धारित देह द्वारा लगाए गए अवरोध और पूरा किए जाने वाले कार्य में भिन्नताओं की वजह से यीशु स्वयं नहीं जानता था कि देह में एक दूसरा आगमन भी होगा। इसलिए बाइबल के किसी प्रतिपादक या नबी ने स्पष्ट रूप से यह भविष्यवाणी करने का साहस नहीं किया कि परमेश्वर अंत के दिनों में पुन: देहधारी होगा, अर्थात वह देह में अपने कार्य के दूसरे हिस्से को करने के लिए फिर से देह में आएगा। इसलिए, किसी को पता नहीं चला कि परमेश्वर पहले ही लंबे समय से स्वयं को देह में छिपाए हुए था। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं, क्योंकि यीशु ने पुनर्जीवित होने और स्वर्गारोहण करने के बाद ही इस कार्यभार को स्वीकार किया था, इसलिए परमेश्वर के दूसरे देहधारण के बारे में कोई स्पष्ट भविष्यवाणी नहीं है, और मानव-मस्तिष्क के लिए इस पर विचार कर पाना संभव नहीं। बाइबल की भविष्यवाणी की अनेक किताबों में ऐसा कोई भी वचन नहीं है, जो इसका स्पष्टता से उल्लेख करता हो। किंतु जब यीशु काम करने आया था, तो एक स्पष्ट भविष्यवाणी पहले से मौजूद थी, जिसमें कहा गया था कि एक कुँआरी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, अर्थात वह पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आया था। इसके बावजूद, परमेश्वर ने तब भी कहा कि यह मृत्यु के जोख़िम पर हुआ, तो आज यह मामला कितना अधिक जोखिम भरा होगा? इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि परमेश्वर कहता है कि इस देहधारण में खतरों का जोखिम अनुग्रह के युग के खतरों से हजारों गुना अधिक है। कई जगहों पर परमेश्वर ने सीनियों के देश में विजेताओं के एक समूह को प्राप्त करने की भविष्यवाणी की है। चूँकि विजेताओं को दुनिया के पूर्व में प्राप्त किया जाना है, इसलिए परमेश्वर अपने दूसरे देहधारण में जहाँ कदम रखता है, वह बिना किसी संदेह के सीनियों का देश है, ठीक वह स्थान, जहाँ बड़ा लाल अजगर कुंडली मारे पड़ा है। वहाँ परमेश्वर बड़े लाल अजगर के वंशजों को प्राप्त करेगा, ताकि वह पूर्णतः पराजित और शर्मिंदा हो जाए। परमेश्वर पीड़ा के बोझ से अत्यधिक दबे इन लोगों को जगाने जा रहा है, जब तक कि वे पूरी तरह से जाग नहीं जाते, वह उन्हें कोहरे से बाहर निकालेगा, और उनसे उस बड़े लाल अजगर को अस्वीकार करवाएगा। वे अपने सपने से जागेंगे, बड़े लाल अजगर के सार को जानेंगे, परमेश्वर को अपना संपूर्ण हृदय देने में सक्षम होंगे, अँधेरे की ताक़तों के दमन से बाहर निकलेंगे, दुनिया के पूर्व में खड़े होंगे, और परमेश्वर की जीत का सबूत बनेंगे। केवल इसी तरीके से परमेश्वर महिमा प्राप्त करेगा। केवल इसी कारण से परमेश्वर इस्राएल में समाप्त हुए कार्य को उस देश में लाया, जहाँ बड़ा लाल अजगर कुंडली मारे पड़ा है, और प्रस्थान करने के लगभग दो हजार वर्ष बाद वह अनुग्रह के कार्य को जारी रखने के लिए पुनः देह में आया है। मनुष्य की आँखों को लग रहा है कि, परमेश्वर देह में नए कार्य का शुभारंभ कर रहा है। किंतु परमेश्वर की दृष्टि से, वह अनुग्रह के युग के कार्य को जारी रख रहा है, पर केवल कुछ हजार वर्षों के अंतराल के बाद, और अपने कार्य के स्थान तथा कार्यक्रम में बदलाव के साथ। यद्यपि आज के कार्य में धारित देह की छवि यीशु से सर्वथा भिन्न है, फिर भी वे एक ही सार और मूल से उत्पन्न हुए हैं, और वे एक ही स्रोत से आते हैं। हो सकता है, बाहर उनमें कई अंतर हों, किंतु उनके कार्य के आंतरिक सत्य पूरी तरह से समान हैं। आख़िरकार उनके युगों में रात और दिन का अंतर है। तो फिर परमेश्वर के कार्य का स्वरूप अपरिवर्तित कैसे रह सकता है? या उसके कार्य के विभिन्न चरण एक-दूसरे के आड़े कैसे आ सकते हैं?

यीशु ने एक यहूदी का रूप धारण किया, यहूदियों जैसी पोशाक पहनी, और यहूदी भोजन खाते हुए बड़ा हुआ। यह उसका सामान्य मानवीय पहलू है। किंतु आज देहधारी परमेश्वर एशिया के एक नागरिक का रूप धारण करता है और बड़े लाल अजगर के देश में बढ़ता है। ये किसी भी तरह से परमेश्वर के देहधारण के लक्ष्य के साथ टकराव नहीं करते। बल्कि, वे परमेश्वर के देहधारण के वास्तविक अर्थ को अधिक पूर्णता से प्रकट करते हुए एक-दूसरे के पूरक हैं। क्योंकि देहधारी परमेश्वर का उल्लेख “मनुष्य का पुत्र” या “मसीह” के रूप में किया जाता है, इसलिए आज के मसीह के बाह्य स्वरूप के बारे में उसी रूप में नहीं बोला जा सकता, जिस रूप में यीशु मसीह के बारे में बोला जाता है। आख़िरकार, इस देहधारी को “मनुष्य का पुत्र” कहा जाता है और यह देह की छवि में है। परमेश्वर के कार्य का हर चरण काफी गहरा अर्थ रखता है। यीशु के पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आने का कारण यह है कि चूँकि उसे पापियों को छुटकारा दिलाना था, इसलिए उसे पापरहित होना था। किंतु केवल अंत में, जब उसे पापी देह जैसा बनने के लिए बाध्य किया गया और उसने पापियों के पाप धारण किए, तभी उसने उन्हें शापित सलीब से बचाया, सलीब जिससे परमेश्वर ने लोगों को ताड़ित किया। (सलीब लोगों को शाप देने और ताड़ित करने के लिए परमेश्वर का औजार है, जब भी शाप और ताड़ना देने का उल्लेख किया जाता है, तो वह पापियों के विशेष संदर्भ में होता है।) इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी पापी पश्चात्ताप करें और सलीब पर चढ़ने के माध्यम से उनसे उनके पाप स्वीकार करवाए जाएँ। अर्थात्, समस्त मानवजाति को छुटकारा दिलाने के वास्ते परमेश्वर ने देहधारण किया, जो पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आया था और जिसने समस्त मानवजाति के पाप धारण कर लिए। इसका रोज़मर्रा की भाषा में वर्णन किया जाए तो, उसने समस्त पापियों के बदले में अपना पवित्र शरीर अर्पित कर दिया, जो शैतान के सामने “पापमोचन बलि” के रूप में रखे गए यीशु के समतुल्य है जिससे शैतान से “विनती” की जा सके कि वह अपने द्वारा कुचली गई समस्त निर्दोष मानवजाति को परमेश्वर को वापस दे दे। यही कारण है कि इस तरह छुटकारे के कार्य के इस चरण को निष्पादित करने के लिए पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आना आवश्यक था। परमपिता परमेश्वर और शैतान के बीच लड़ाई में यह एक आवश्यक शर्त, एक “शांति-संधि” थी। यही कारण है कि यीशु को शैतान को सौंपे जाने के बाद ही कार्य के इस चरण का समापन हुआ। हालाँकि, परमेश्वर द्वारा छुटकारे का कार्य आज पहले की तुलना में भव्यता का अभूतपूर्व स्तर हासिल कर चुका है, और शैतान के पास और माँगें करने का कोई बहाना नहीं है, इसलिए परमेश्वर के देहधारण के लिए पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आने की अब आवश्यकता नहीं है। चूँकि परमेश्वर स्वाभाविक रूप से पवित्र और निर्दोष है, इसलिए इस देहधारण में परमेश्वर अब अनुग्रह के युग का यीशु नहीं है। किंतु वह अभी भी परमपिता परमेश्वर की इच्छा के वास्ते और उसकी इच्छाएँ पूरी करने के वास्ते देह धारण करता है। निश्चित रूप से यह चीज़ों को समझाने का अनुचित तरीका नहीं है? क्या परमेश्वर के देहधारण को नियमों के एक निश्चित ढाँचे का पालन करना आवश्यक है?

बहुत-से लोग परमेश्वर के देहधारण की कोई भविष्यवाणी पाने की आशा में साक्ष्य के लिए बाइबल में देखते हैं। मनुष्य अपने भ्रमित और अव्यवस्थित विचारों के साथ कैसे जान सकता है कि परमेश्वर ने बहुत पहले ही बाइबल में “कार्य करना” बंद कर दिया है और उसने जोश और चाव के साथ उस कार्य को करने के लिए उससे बाहर “छलाँग लगा दी” है, जिसकी उसने लंबे समय से योजना बनाई थी किंतु जिसके बारे में उसने मनुष्य को कभी नहीं बताया था? लोगों में समझ का अत्यंत अभाव है। परमेश्वर के स्वभाव का महज़ अनुभव लेने के बाद वे एक ऊँचे मंच पर चढ़ते हैं, और परमेश्वर के कार्य का निरीक्षण करने के लिए पूरी उदासीनता के साथ एक उच्च श्रेणी की “व्हीलचेयर” में बैठ जाते हैं, यहाँ तक कि दुनिया-जहान की हर चीज़ के बारे में आडंबरपूर्ण, असंगत बातें करते हुए परमेश्वर को सिखाना शुरू कर देते हैं। कई “वृद्ध व्यक्ति” पढ़ने का चश्मा लगाए हुए और अपनी दाढ़ी सहलाते हुए “पुरानी जंतरी” (बाइबल) के पीले पड़ चुके पन्ने खोलते हैं, जिसे वे जिंदगीभर पढ़ते रहे हैं। बुदबुदाए वचनों और आत्मा के साथ चमकती प्रतीत होने वाली आँखों के साथ वह वृद्ध अब प्रकाशितवाक्य की पुस्तक की ओर मुड़ता है, और अब दानिय्येल की पुस्तक की ओर, और अब यशायाह की पुस्तक की ओर, जिससे सब अच्छी तरह से परिचित हैं। छोटे-छोटे अक्षरों से गहनता से भरे एक के बाद एक पृष्ठ को घूरते हुए वह मौन में पढ़ता है, उसका मस्तिष्क निरंतर चल रहा है। अचानक दाढ़ी सहलाने वाला हाथ रुक जाता है और दाढ़ी खींचना शुरू कर देता है। यदा-कदा लोगों को दाढ़ी के बाल नोंचने की आवाज़ सुनाई देती है। ऐसा असामान्य व्यवहार उन्हें हक्का-बक्का कर देता है। “इतनी ताक़त लगाने की क्या ज़रूरत है? वह किस चीज़ के लिए इतना पागल हो रहा है?” वृद्ध व्यक्ति की ओर एक बार फिर देखने पर हम पाते हैं कि अब उसकी भौहें खड़ी हो गई हैं। सफ़ेद भौहें नीचे झुक आयीं हैं, बतख़ के पंखों की तरह उस वृद्ध व्यक्ति की पलकों से ठीक दो सेंटीमीटर ऊपर, मानो संयोगवश लेकिन बख़ूबी, उस वृद्ध व्यक्ति के अपनी आँखें पृष्ठों पर गड़ाए रखने पर वे ऐसी दिखाई देती हैं मानो उनमें फफूँद लगी हो। उन्हीं-उन्हीं पन्नों को कई-कई बार पढ़ने के बाद वह खुद खड़ा होने से नहीं रोक पाता और इस तरह बड़बड़ाना शुरू कर देता है, मानो किसी के साथ गपशप[3] कर रहा हो, यद्यपि उसकी आँखों की चमक ने जंतरी को नहीं छोड़ा है। अचानक वह वर्तमान पृष्ठ को ढक देता है और “दूसरी दुनिया” की ओर मुड़ जाता है। उसकी हरकतें इतनी जल्दबाज़ी भरी[4] और भयभीत कर देने वाली हैं कि लोगों को लगभग अप्रत्याशित ढंग से चौंका देती हैं। इस समय, वह चूहा जो अपने बिल से बाहर आ गया था और उसके मौन रहने के दौरान मुक्त रूप से घूमने के लिए तनावमुक्त महसूस कर ही रहा था, उसकी अप्रत्याशित हरकतों से इतना शंकित हो जाता है कि तेजी से दौड़कर अपने बिल में वापस चला जाता है और धुएँ के गुबार की तरह उसमें पुन: दिखाई न देने के लिए गायब हो जाता है। और अब वृद्ध व्यक्ति का अस्थायी रूप से निस्पंद हुआ बायाँ हाथ फिर से दाढ़ी को ऊपर-नीचे सहलाना शुरू कर देता है। फिर वह पुस्तक को मेज पर छोड़कर अपनी कुर्सी से उठकर चला जाता है। दरवाजे की दरार और खुली हुई खिड़की से हवा आती है और निर्दयतापूर्वक पुस्तक को बंद करके फिर खोल देती है। दृश्य में एक अकथनीय निराशा व्याप्त है, और पुस्तक के हवा से सरसराते हुए पन्नों की आवाज़ को छोड़कर, सारी सृष्टि मौन हो गई प्रतीत होती है। अपनी पीठ के पीछे हाथ बाँधे हुए वह कमरे में आगे-पीछे चलता है, कभी रुकता है, कभी फिर चलने लगता है, बीच-बीच में अपना सिर हिलाता रहता है, और अपने मुँह में ये शब्द दोहराता प्रतीत होता है, “ओह! परमेश्वर! क्या तू वास्तव में ऐसा करेगा?” बीच-बीच में वह सहमति में सिर हिलाता हुआ यह भी कहता है, “हे परमेश्वर! कौन तेरे कार्य की थाह पा सकता है? क्या तेरे पदचिह्नों को खोजना कठिन नहीं है? मुझे विश्वास है कि तू अकारण समस्या पैदा करने वाली चीज़ें नहीं करता।” इस समय वृद्ध व्यक्ति परेशानी का भाव और एक अत्यंत दर्दभरा भावदर्शाते हुए अपनी भौंहें कसकर सिकोड़ लेता है, आँखें भींच लेता है, मानो वह कोई धीमी और सुचिंतित गणना करने वाला हो। बेचारा बूढ़ा आदमी! अपना पूरा जीवन जी लेने के बाद “दुर्भाग्यवश” इतनी देर से यह मामला आ पड़ा है। इस बारे में क्या किया जा सकता है? मैं भी उलझन में हूँ और कुछ कर पाने में असमर्थ हूँ। किसने उसकी पुरानी जंतरी को समय के साथ पीला कर दिया? किसने उसकी समस्त दाढ़ी और भौहों को उसके चेहरे पर अलग-अलग जगहों में सफेद बर्फ की तरह निर्दयी ढंग से ढक दिया? मानो उसकी दाढ़ी के बाल उसकी वरिष्ठता दर्शाते हों। फिर भी, कौन जानता था कि मनुष्य इस हद तक मूर्ख हो सकता है कि परमेश्वर की उपस्थिति को पुरानी जंतरी में खोजेगा? पुरानी जंतरी में कागज के कितने पन्ने हो सकते हैं? क्या यह वाकई परमेश्वर के सभी कर्मों को पूरी सटीकता के साथ दर्ज कर सकती है? इसकी गारंटी देने का साहस कौन करता है? फिर भी मनुष्य वास्तव में वचनों का अत्यधिक पदभंजन करके और बाल की खाल निकालकर[5] परमेश्वर के प्रकटन की तलाश करने और उसकी इच्छा पूरी करने और इस तरह जीवन में प्रवेश करने की सोचता है। क्या इस तरह से जीवन में प्रवेश करने का प्रयास करना उतना आसान है, जितना यह प्रतीत होता है? क्या यह सबसे बेतुके और बेहूदे ढंग का ग़लत तर्क नहीं है? क्या तुम्हें यह हास्यास्पद नहीं लगता?

फुटनोट :

1. “अनिश्चित” संकेत करता है कि लोगों में परमेश्वर के कार्य के संबंध में स्पष्ट अंतर्दृष्टि नहीं है।

2. “कमज़ोर सामर्थ्य वाला है और उसे अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए” संकेत करता है कि देह की कठिनाइयाँ बहुत अधिक हैं और किया गया कार्य बहुत सीमित।

3. “गपशप” लोगों के उस वक्त बनने वाले बदसूरत चेहरे का रूपक है, जब वे परमेश्वर के कार्य में शोध करते हैं।

4. “जल्दबाज़ी भरी” बाइबल पढ़ते समय “वृद्ध व्यक्ति” की उत्सुक, हड़बड़ीयुक्त गतिविधियों की ओर संकेत करता है।

5. “वचनों का अत्यधिक पदभंजन करके और बाल की खाल निकालकर” का उपयोग भ्रांतियों में पड़े विशेषज्ञों का उपहास उड़ाने के लिए किया गया है, जो वचनों की बाल की खाल निकालते हैं, किंतु सत्य की तलाश नहीं करते या पवित्र आत्मा के कार्य को नहीं जानते।

स्रोत: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया