Hindi Christian Video “परिवार में रक्तिम पुनर्शिक्षा” क्लिप 6 – मसीह को अस्वीकार करने और उनकी निंदा करने के पीछे सीसीपी के असल इरादे
अनुग्रह के युग में जबप्रभु यीशुदेह बन गया, तो वह बाहर से मनुष्य की तरह दिखता था, लेकिन उसने सलीब पर चढ़ाए जाने और संपूर्ण मानवजाति को छुटकारा दिलाने का कार्य किया। अंत के दिनों में, देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मानवजाति को शुद्ध करने और बचाने के लिए सभी सच्चाइयों को व्यक्त किया है और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य किया है। यह दर्शाता है कि प्रभु यीशु औरसर्वशक्तिमान परमेश्वरदोनों ही देह में मसीह हैं, और वे स्वयं परमेश्वर हैं। तो क्यों सीसीपी प्रभु यीशु और सर्वशक्तिमान परमेश्वर को औसत लोगों के रूप में परिभाषित करती है और मसीह के दिव्य सार से इनकार करती है? क्या सीसीपी अविश्वसनीय रूप से बेतुकी और हास्यास्पद नहीं है?
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Hindi Christian Video “परिवार में रक्तिम पुनर्शिक्षा” क्लिप 7 – सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की निंदा और बदनामी करने के पीछे सीसीपी के असल इरादे
प्रभु में विश्वास करने वाला हर कोई जानता है कि प्रभु यीशु के प्रकटन और कार्य के बिना, प्रभु के कोई भी विश्वासी या अनुयायी नहीं होते। इससे भी अधिक,ईसाई धर्मकभी अस्तित्व में ही नहीं आया होता—चाहे धर्मदूत कितने ही प्रतिभाशाली क्यों न थे, वे कलीसिया का सृजन नहीं कर सकते थे। इसी तरह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीह, के प्रकटन और कार्य की वजह से अस्तित्व में आई। ऐसा इसलिए है क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कई सच्चाइयों को व्यक्त किया और उसकी इस वाणी को सुनने के बाद कि कलीसिया का गठन हो गया है, लोग परमेश्वर की ओर वापस आ गए। लेकिन चीनी कम्युनिस्ट सरकार, यह कहते हुए कि यह तो सिर्फ एक मानव संगठन है,सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर लांछन लगाती है। उनकी किस तरह की भयावह मंशा है?
देहधारी परमेश्वर मसीह कहलाता है, तथा मसीह परमेश्वर के आत्मा के द्वारा धारण किया गया देह है। यह देह किसी भी मनुष्य की देह से भिन्न है। यह भिन्नता इसलिए है क्योंकि मसीह मांस तथा खून से बना हुआ नहीं है बल्कि आत्मा का देहधारण है। उसके पास सामान्य मानवता तथा पूर्ण दिव्यता दोनों हैं। उसकी दिव्यता किसी भी मनुष्य द्वारा धारण नहीं की जाती है। उसकी सामान्य मानवता देह में उसकी समस्त सामान्य गतिविधियों को बनाए रखती है, जबकि दिव्यता स्वयं परमेश्वर के कार्य करती है। चाहे यह उसकी मानवता हो या दिव्यता, दोनों स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति समर्पित हैं। मसीह का सार पवित्र आत्मा, अर्थात्, दिव्यता है। इसलिए, उसका सार स्वयं परमेश्वर का है; यह सार उसके स्वयं के कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं करेगा, तथा वह संभवतः कोई ऐसा कार्य नहीं कर सकता है जो उसके स्वयं के कार्य को नष्ट करता हो, ना वह ऐसे वचन कहेगा जो उसकी स्वयं की इच्छा के विरूद्ध जाते हों। इसलिए, देहधारी परमेश्वर अवश्य ही कभी भी कोई ऐसा कार्य नहीं करेगा जो उसके अपने प्रबंधन में बाधा उत्पन्न करता हो। यह वह बात है जिसे सभी मनुष्यों को समझना चाहिए। पवित्र आत्मा के कार्य का सार मनुष्य को बचाना तथा परमेश्वर के अपने प्रबंधन के वास्ते है। इसी प्रकार, मसीह का कार्य मनुष्य को बचाना है तथा यह परमेश्वर की इच्छा के वास्ते है। पढना जारी रखे →
मानव को आज तक का समय लग गया है यह समझ पाने में कि उसमें केवल आध्यात्मिक जीवन की आपूर्ति और परमेश्वर को जानने के अनुभव का ही अभाव नहीं है, बल्कि—इससे भी अधिक महत्वपूर्ण—उसके स्वभाव में परिवर्तन का अभाव है। अपनी ही जाति के इतिहास और प्राचीन संस्कृति के बारे में मनुष्य की पूर्ण अज्ञानता का यह परिणाम हुआ है कि वह परमेश्वर के कार्य के बारे में बिलकुल भी नहीं जानता। सभी लोगों को उम्मीद है कि मनुष्य अपने दिल के भीतर गहराई में परमेश्वर से जुड़ा हो सकता है, लेकिन चूँकि मनुष्य की देह अत्यधिक भ्रष्ट है, और जड़ तथा कुंठित दोनों है, इस कारण उसे परमेश्वर का कुछ भी ज्ञान नहीं है। आज मनुष्यों के बीच आने का परमेश्वर का प्रयोजन और कुछ नहीं, बल्कि उनके विचारों और आत्माओं, और साथ ही उनके दिलों में लाखों वर्षों से मौजूद परमेश्वर की छवि को भी बदलना है। वह इस अवसर का इस्तेमाल मनुष्य को पूर्ण बनाने के लिए करेगा। अर्थात, वह मनुष्यों के ज्ञान के माध्यम से परमेश्वर को जानने के उनके तरीके और अपने प्रति उनका दृष्टिकोण बदल देगा, ताकि उन्हें परमेश्वर को जानने के लिए एक विजयी नई शुरुआत करने में सक्षम बना सके, और इस प्रकार मनुष्य की आत्मा का नवीकरण और रूपांतरण हासिल कर सके। निपटारा और अनुशासन साधन हैं, जबकि विजय और नवीकरण लक्ष्य हैं। पढना जारी रखे →
तुम लोग परमेश्वर के विश्वासी होने के मार्ग में बहुत ही थोड़ा चले हो, और तुम लोगों के लिए सही मार्ग पर प्रवेश करना अभी बाकी है, अतः तुम लोग परमेश्वर के स्तर को प्राप्त करने से अभी भी दूर हो।इस समय, तुम लोगों की क्षमता उसकी माँगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। तुम लोगोंकी योग्यता और साथ ही साथ तुम लोगों के आंतरिक भ्रष्ट स्वभाव के कारण तुम लोग हमेशा परमेश्वर के कार्य को लापरवाही के साथ देखते हो और इसे गंभीरता से नहीं लेते। यह तुम लोगों की सबसे बड़ी कमी है। इसके साथ-साथ, तुम लोग पवित्र आत्मा के मार्ग को ढूँढने में असमर्थ हो। तुम लोगों में से अधिकाँश इसे नहीं समझते और इसे स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते। इससे बढ़कर, तुम लोगों में से अधिकाँश इस विषय पर कोई ध्यान नहीं देते, और इसके बारे में बहुत ही कम गंभीर हो। पढना जारी रखे →
परमेश्वर के समक्ष अपने आप को शांत रखना, परमेश्वर के वचन में प्रवेश करने का एक महत्वपूर्ण क़दम है, और यह एक ऐसा पाठ है जो समय की मांग है। परमेश्वर के समक्ष अपने आप को शांत रखने की प्रक्रिया में प्रवेश करने का तरीका यह है:
1. अपने मन को बाहरी चीज़ों से हटाले, परमेश्वर के समक्ष शांत रह और अपने आप को केंद्रित करके परमेश्वर से प्रार्थना कर।
2. परमेश्वर के समक्ष शांत रहकर परमेश्वर के वचनों को खा, पीऔर उनका आनंद ले।
3. अपने हृदय में परमेश्वर के प्रेम पर ध्यान लगा और परमेश्वर के कार्य पर मनन कर। पढना जारी रखे →
तहेदिल से परमेश्वर की आत्मा को स्पर्श करके लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उससे प्रेम करते हैं, और उसे संतुष्ट करते हैं, और इस प्रकार वे परमेश्वर की संतुष्टि प्राप्त करते हैं; जब वेपरमेश्वर के वचनोंके संपर्क में आते हैं, तो परमेश्वर का आत्मा का उन पर भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। यदि तुम एक उचित आध्यात्मिक जीवन प्राप्त करना चाहते हो और परमेश्वर के साथ एक उचित संबंध स्थापित करना चाहते हो, तो तुम्हें पहले उसे अपना हृदय अर्पित करना होगा, और अपने हृदय को उसके सामने शांत करना होगा। अपने पूरे हृदय को परमेश्वर की स्तुति में डुबोकर ही तुम धीरे-धीरे एक उचित आध्यात्मिक जीवन का विकास कर सकते हो। यदि लोग परमेश्वर को अपना हृदय अर्पित नहीं करते हैं और उस पर पूरी तरह विश्वास नहीं करते हैं, और अगर उनका दिल उन्हें महसूस नहीं करता है और वे परमेश्वर के बोझ को अपना बोझ नहीं मानते हैं, तो जो कुछ भी वे कर रहे हैं उससे केवल परमेश्वर को धोखा दे रहे हैं, और ये धार्मिक व्यक्तियों का केवल व्यवहार है—ये परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त नहीं कर सकता है।पढना जारी रखे →
स्वभाव में बदलाव पवित्र आत्मा के काम से अलग नहीं हो सकता | Hindi Christian Song With Lyrics
पवित्र आत्मा का कार्य और मौजूदगी
तय करता है कि तुम खोजते हो निष्ठा से,
न कि दूसरों का न्याय तुम पर और न ही उनकी राय से।
पर इससे ज़्यादा,
क्या पवित्र आत्मा का कार्य समय के साथ तुम्हें बदलकर,
परमेश्वर का ज्ञान कराता है,
तुम्हारी ईमानदारी को तय करता है।
पवित्र आत्मा के कार्य के साथ, तुम सबका स्वभाव बदलेगा,
तुम सबकी आस्था पर राय शुद्ध होंगी।
परिवर्तन का अर्थ है कि पवित्र आत्मा कार्य पर है,
चाहे कितनी भी देर से तुम सबने उसका अनुसरण किया हो।
गर तुम सब में बदलाव नहीं है, तो ये दर्शाता है कि
पवित्रात्मा तुम सब पर कार्य नहीं करता है।
यद्यपि तुम सब सेवा करते हो,
तुम करते हो इसे प्राप्त करने को आशीष।
कभी-कभी सेवा करने का मतलब नहीं
स्वभाव में परिवर्तन का होना।
सेवा-कर्ताओं को नष्ट कर दिया जाएगा
क्योंकि राज्य को उनकी ज़रूरत नहीं है।
राज्य को ज़रूरत नहीं अपरिवर्तित लोगों की
वफ़ादार और पूर्ण किए हुये लोगों की सेवा करने के लिए।
पवित्र आत्मा के कार्य के साथ, तुम सबका स्वभाव बदलेगा,
तुम सबकी आस्था पर राय शुद्ध होंगी।
परिवर्तन का अर्थ है कि पवित्र आत्मा कार्य पर है,
चाहे कितनी भी देर से तुम सबने उसका अनुसरण किया हो,
अनुसरण किया हो।
Hindi Christian Song | सत्य को स्वीकारने वाले ही परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं
जहाँ परमेश्वर का प्रकटन है, वहाँ सत्य की अभिव्यक्ति है, परमेश्वर की वाणी है। वही सुन सकते हैं परमेश्वर की वाणी, वही देख सकते हैं प्रकटन परमेश्वर का, सत्य को जो करते हैं स्वीकार। नामुमकिन जैसे विचार कर दो दरकिनार। नामुमकिन जैसे विचारों का मुमकिन होना सम्भव है। स्वर्ग से ऊँची है परमेश्वर की बुद्धि की उड़ान। उसके ख़्याल और काम बहुत परे हैं, इंसान के सारे ख़्यालों से। कोई चीज़ होती है नामुमकिन जितनी, होता उतना ही ज़्यादा सत्य वहाँ खोज के लिये। होता जितना परे इंसान की संकल्पना से, होता है उतना ही समावेश परमेश्वर के सत्य का उसमें। प्रकट कहीं भी हो वो, परमेश्वर फिर भी परमेश्वर है। कहाँ हुआ वो प्रकट, उसका सार नहीं बदलता इससे। दरकिनार करो अपनी धारणाएँ, ख़ामोश करो दिल को अपने, और पढ़ो इन वचनों को। गर सत्य की तड़प होगी तुम में, तो ज़ाहिर कर देगा परमेश्वर अपनी इच्छा और वचन तुम पर, इच्छा और वचन तुम पर, इच्छा और वचन तुम पर।
वही रहता है स्वभाव परमेश्वर का। जहाँ भी हैं कदम उसके, वहीं है वो मानवता का परमेश्वर। यीशु परमेश्वर है इस्राएलियों का, एशिया का, यूरोप का, सारे जहाँ का। परमेश्वर की इच्छा खोजो उसके कथन से, ढूँढो उसका प्रकटन, अनुसरण करो उसके पदचिन्हों का। सत्य है, मार्ग है, जीवन है परमेश्वर। उसके वचन और प्रकटन उसका, रहते हैं साथ-साथ। स्वभाव और पदचिन्ह उसका, कर दिए जाते हैं इंसानों पर ज़ाहिर सदा। भाइयो-बहनो, उम्मीद है देख सकते हो, तुम इन वचनों में प्रकटन परमेश्वर का। करो अनुसरण उसका एक नए युग में, नए स्वर्ग में, नई धरती की ओर, किया गया तैयार जिसे, उन सब की ख़ातिर, परमेश्वर का इंतज़ार है जिनको, इंतज़ार है जिनको। दरकिनार करो अपनी धारणाएँ, ख़ामोश करो दिल को अपने, और पढ़ो इन वचनों को। गर सत्य की तड़प होगी तुम में, तो ज़ाहिर कर देगा परमेश्वर अपनी इच्छा और वचन तुम पर, इच्छा और वचन तुम पर, इच्छा और वचन तुम पर। “मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना” से
2019 Best Hindi Christian Song | ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर | New Hind Gospel Song
मौन है परमेश्वर, सामने हमारे कभी प्रकट हुआ नहीं,
फिर भी कार्य उसका कभी रुका नहीं।
नज़र रखता है पूरी धरती पर, नियंत्रित करता है हर चीज़ को।
देखता है इंसान के सभी शब्दों को और काम को।
उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन।
ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम।
न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में,
उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में,
उसके सिंहासन का हमारे मध्य में।
कैसा शानदार, भव्य और गंभीर नज़ारा है।
कपोत और सिंह के मानिंद, आत्मा का आगमन होता है।
सचमुच बुद्धिमान है, धार्मिक है, प्रतापी है वो।
अधिकार सहित, प्रेम और करुणा से भरपूर है वो।
उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन।
ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम, उसके कदम।
न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में,
उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में,
उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में।