परमेश्वर ने आपदा से हमारे परिवार की रक्षा की

वैंग लैन, बीजिंग

6 अगस्त, 2012

21 जुलाई 2012 को, साठ वर्षों में सबसे बड़ी बाढ़ ने हमारे गांव को तहस—नहस कर दिया। यह आपदा स्वर्ग से गिरी थी, बाढ़ के पानी में मिट्टी और पत्थर मिश्रित थे एवं इसने पूरे गांव को तबाह कर दिया था। अधिकांश घरों को पानी व कीचड़ के भूस्खलन ने नष्ट कर दिया था।

उस दोपहर पांच बजे के बाद, बारिश बहुत ही भयंकर हो रही थी। हमारे घर के ऊपर से बाढ़ का पानी और बड़े पत्थर बरस रहे थे, और हमारे घर के सामने व पीछे बाढ़ का बहुत पानी था। वे हजारों मुर्गियों के साथ मेरी बेटी के मुर्गियों के दरबे को बहाकर ले गए, वे सुअर के बाड़े को बहाकर ले गए, और सुअरों को भी। पानी हमारे घर से ऊपर बस बहने ही वाला था। हमारे साथ एक 94 साल के बुजुर्ग व दस माह का बच्चा था। हम बेहद डरे हुए थे। जब मैं 94 साल के बुजुर्ग व बच्चे को ऊंची इमारत में ले जा रही थी, तो पानी निचले हिस्से में आना शुरू हो गया था। बारिश जारी थी। हमारे देखते—देखते पानी ऊंची इमारत की ओर बढ़ने लगा। मैं खुद में डरी हुई थी। मैंने तुरंत ही गांव के सहयोगी को बुलाया, उसने कहा कि मुझे पहाड़ पर भाग जाना चाहिए, और यह कि वे भी खुद को सुरक्षित करने में काफी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, वहां हर व्यक्ति खुद की ही चिंता कर रहा था। इस व्याकुलता में, मैंने परमेश्वर के वचनों को याद किया, “संकट मेरे द्वारा ही लाया जाएगा और निश्चित रूप से मैं ही उसका क्रियान्वयन करूँगा।पढना जारी रखे

3 वैसी प्रार्थना कैसे करें जो परमेश्वर सुनें

भाइयो और बहनो:

प्रभु की शांति आपके साथ हो! प्रार्थना करना हम ईसाइयों का, परमेश्वर के साथ सामान्य संबंध स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। ऐसा विशेष रूप से सुबह और रात के समय किया जाता है। यही कारण है कि प्रार्थना करना सीखना बेहद जरूरी है। हालाँकि, कई भाई-बहन परेशानी महसूस करते हैं: हर दिन, हम सुबह और रात, दोनों समय प्रार्थना करते हैं; हम खाने से पहले और और खाने के बाद भी प्रार्थना करते हैं, साथ ही साथ जब हम सभा में होते हैं तब भी प्रार्थना करते हैं; इसके अलावा, हर बार जब हम प्रार्थना करते हैं, हम प्रभु से बहुत कुछ कहते हैं और लंबे समय तक प्रार्थना करते हैं। हालाँकि, हम हमेशा ऐसा महसूस करते हैं जैसे परमेश्वर वहाँ नहीं है; ऐसा लगता है जैसे हम प्रार्थना करते समय खुद से बात कर रहे हैं, और हमारी आत्मा शांति या आनंद महसूस नहीं करती है। परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं को क्यों नहीं सुनते? हम ऐसी प्रार्थना कैसे करें ताकि हम परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त कर सकें? पढना जारी रखे

पिछले कुछ सालों में हमने हमारे कलीसीया में बढ़ती हुई वीरानी को महसूस किया है। हमने अपने शुरुआती विश्वास और प्यार को खो दिया है, हम कमज़ोर और ज्‍़यादा नकारात्मक बन गए हैं। यहां तक कि कभी-कभी हम उपदेशक भी खोया-खोया महसूस करते हैं, और नहीं जानते कि किस बारे में बात करनी है। हमें लगता है कि हमने पवित्र आत्मा का कार्य खो दिया है। हमने पवित्र आत्मा के कार्य वाली किसी कलीसिया के लिए भी हर जगह खोज की। लेकिन जिस भी कलीसिया को हमने देखा, वह हमारी कलीसिया की तरह ही वीरान है। इतनी सारी कलीसियाएं भूखी और वीरान क्यों हैं?

उत्तर: आपका सवाल महत्वपूर्ण है। हम सभी जानते हैं कि हम अंत के दिनों की आखरी अवस्‍था में रहते हैं। प्रभु यीशु ने एक बार भविष्यवाणी की थी: “अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा पड़ जाएगा” (मत्ती 24:12)। धर्म की दुनिया में अराजकता बढ़ रही है। धार्मिक अगुवा प्रभु की आज्ञाओं का पालन नहीं करते, सिर्फ़ मनुष्यों की परंपराओं का पालन करते हैं। वे सिर्फ़ दिखावे के लिए बाइबल के ज्ञान का उपदेश देते हैं और ख़ुद की गवाही देते हैं। वे परमेश्‍वर की गवाही नहीं देते या उनकी बिल्कुल भी प्रशंसा नहीं करते हैं, और वे पूरी तरह से प्रभु के मार्ग से भटक गए हैं, यही कारण है कि परमेश्‍वर उन्हें अस्वीकार करते और खत्‍म करते हैं। धार्मिक जगत के पवित्र आत्मा के कार्यों को गंवाने का यही खास कारण है। लेकिन साथ ही, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि प्रभु ने फ़िर से देह में लौट आए है, और अंत के दिनों का “परमेश्‍वर के भवन से शुरू होने वाले न्याय” का कार्य प्रारंभ कर दिया है। अंत के दिनों के मसीह के रूप में – सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर मानव जाति को बचाने के लिये पूर्ण सत्‍य व्यक्त करते हैं, ताकि ऐसे सभी लोग जो अंत के दिनों में परमेश्‍वर के कार्य और पवित्र आत्मा के कार्य को स्‍वीकार करते हैं और परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य की ओर मुड़ते हैं, वे पवित्र किए जा सकें। जो लोग अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के न्याय के कार्य को स्वीकार करते हैं, उन्हें पवित्र आत्मा का कार्य मिलेगा, और वे जीवन के सजीव जल का पोषण और सिंचाई प्राप्त करेंगे। जो लोग उनके सिंहासन के सम्मुख लौट आएंगे, परमेश्‍वर उन्‍हें विजयी बनाएंगे, और उन्हें उनकी इच्छा के अनुरूप लाएंगे, जबकि वे लोग जो धार्मिक स्थान पर रुकते तो हैं, मगर अंत के दिनों के परमेश्‍वर के कार्य को स्‍वीकारने से इनकार करते हैं, उन्हें गहन विनाश की दशा में छोड़ दिया जाता हैं। यह बात बाइबल की इस भविष्यवाणी को साबित करती हैं: “जब कटनी के तीन महीने रह गएतब मैं ने तुम्हारे लिये वर्षा न कीमैं ने एक नगर में जल बरसाकर दूसरे में न बरसायाएक खेत में जल बरसाऔर दूसरा खेत जिस में न बरसावह सूख गया। इसलिये दो तीन नगरों के लोग पानी पीने को मारे मारे फिरते हुए एक ही नगर में आएपरन्तु तृप्‍त न हुएतौभी तुम मेरी ओर न फिरे, यहोवा की यह वाणी है” (आमोस 4:7-8)। “एक खेत में जल बरसा” का संदर्भ उन कलीसियाओं से है जो अंत के दिनों में परमेश्‍वर के न्याय के कार्य को स्वीकार और उनका आज्ञापालन करती हैं। उन्होंने परमेश्‍वर के मौजूदा वचनों को स्वीकार किया है, और इसलिए जीवन के सजीव जल के पोषण का आनंद उठाया जो सिंहासन से बहता है। “और दूसरा खेत जिस में न बरसावह सूख गया” का संदर्भ उन धार्मिक पादरियों और एल्डर्स से है जो प्रभु के वचनों पर अमल करने से इनकार करते हैं और उनकी आज्ञाओं का पालन नहीं करते हैं, साथ ही, वे अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के कार्य का अस्वीकार, प्रतिकार और निंदा करते हैं, जो धार्मिक जगत को परमेश्‍वर द्वारा अस्वीकार और अभिशापित किए जाने की ओर ले जाता हैं, जिस कारण वे पवित्र आत्मा के कार्य और जीवन के सजीव जल को पूरी तरह खो देते हैं, और तबाही में फंस कर रह जाते हैं। बिलकुल वैसे ही जैसे व्यवस्था के युग के अंत में, जब एक बार यहोवा परमेश्‍वर की भव्यता से भरपूर मंदिर वीरान बन बन गया था। जब यहूदी लोगों ने परमेश्‍वर की व्यवस्थाओं का पालन नहीं किया, अनुचित त्याग किये गए, तो मंदिर व्यापार की जगह, चोरों का अड्डा बन गए। ऐसा क्‍यों हुआ? इसका मूल कारण यह है कि यहूदी धार्मिक अगुवाओं ने यहोवा परमेश्‍वर की व्यवस्थाओं का पालन नहीं किया और उनके दिलों में परमेश्‍वर का भय भी नहीं था। उन्होंने मनुष्यों की परम्पराओं का पालन किया, लेकिन परमेश्‍वर की आज्ञाओं को नकार दिया। वे परमेश्‍वर के मार्ग से पूरी तरह से हट गए, इसलिए परमेश्‍वर ने उन्हें शाप दिया। लेकिन दूसरा कारण यह था कि अनुग्रह के युग में मानवजाति के छुटकारे का कार्य करने के लिए परमेश्‍वर ने देहधारण की थी। परमेश्‍वर का कार्य बदल गया था। वे सभी लोग जिन्होंने प्रभु यीशु का छुटकारे का कार्य का स्वीकार किया, उन्‍हें पवित्र आत्मा का कार्य और अपने विश्वास पर अमल करने का एक नया मार्ग मिला, लेकिन जिन लोगों ने प्रभु यीशु के कार्य को नकारा और उसका विरोध किया, उन्हें परमेश्‍वर के कार्य के ज़रिए हटा दिया गया, और वे अंधियारी वीरानी में गिर गए। अगर आप पवित्र आत्मा के कार्य और जीवन के सजीव जल का पोषण पाना चाहते हैं तो, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के कार्य को खोजना और उसकी जाँच करना है। इससे आपकी आत्माओं के अन्धकार और आपके कलीसिया की वीरानी की समस्या का जड़ से समाधान हो जाएगा। क्या आपको ऐसा नहीं लगता?

“सिंहासन से बहता है जीवन जल” फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

पवित्र आत्मा क्या है—इसकी अभिव्यक्तियाँ—ईसाई अवश्य-पढ़ें

यह क्यों कहा गया है कि “त्रित्व” सबसे बेतुकी बात है?

2. यह क्यों कहा गया है कि “त्रित्व” सबसे बेतुकी बात है?

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परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

यीशु के देहधारी होने के सत्य के अस्तित्व में आने के बाद, मनुष्य ने इस बात में विश्वास किया: वह न केवल स्वर्ग का परमेश्वर है, बल्कि वह पुत्र भी है, और यहां तक कि वह आत्मा भी है। यह पारम्परिक धारणा है जिसे मनुष्य धारण किए हुए है कि, एक ऐसा परमेश्वर है जो स्वर्ग में हैः एक त्रित्व जो पिता, पुत्र और है, और ये सभी एक में हैं। सभी मानवों की यही धारणाएं हैं: परमेश्वर केवल एक ही परमेश्वर है, परन्तु उसके तीन भाग हैं, जिसे कष्टदायक रूप से पारंपरिक धारणा में दृढ़ता से जकड़े सभी लोग पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा मानते हैं। केवल यही तीनों संपूर्ण परमेश्वर को बनाते हैं। बिना पवित्र पिता के परमेश्वर संपूर्ण नहीं बनता है। इसी प्रकार से परमेश्वर पुत्र और पवित्र आत्मा के बिना संपूर्ण नहीं है। उनके विचार में वे यह विश्वास करते हैं कि सिर्फ पिता और सिर्फ पुत्र को ही परमेश्वर नहीं माना जा सकता। केवल पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा को एक साथ मिलाकर स्वयं सम्पूर्ण परमेश्वर माना जा सकता है। अब, तुममें से प्रत्येक अनुयायी समेत, सभी धार्मिक विश्वासी, इस बात पर विश्वास करते हैं। फिर भी यह विश्वास सही है कि नहीं इस बात को कोई भी स्पष्ट नहीं कर पाता है, क्योंकि हमेशा तुम सब परमेश्वर के मामले में भ्रम के कोहरे में रहते हो। हालांकि तुम सब नहीं जानते कि ये विचार सही हैं या गलत, क्योंकि तुम धार्मिक विचारों से बुरी तरह से संक्रमित हो गए हो। धार्मिक भावनाओं की परम्परावादी धारणाओं को तुम सबने अत्यधिक गहराई से स्वीकार कर लिया है और यह ज़हर तुम्हारे भीतर बहुत ही गहराई से प्रवेश कर चुका है। पढना जारी रखे

Hindi Christian Song “एक निर्मित प्राणी के दिल की आवाज़” | A Song of Praise From Christians’ Hearts

Hindi Christian Song “एक निर्मित प्राणी के दिल की आवाज़” | A Song of Praise From Christians’ Hearts

मैंने चाहा रोना, कोई जगह नहीं थी सही।
मैंने चाहा गाना, मिला नहीं कोई गीत।
मैंने चाहा एक निर्मित प्राणी के प्रेम का करना इज़हार।
ऊपर-नीचे ढूंढा, पर कोई वचन न बता पाए,
न बता पाए मुझे होता जो महसूस।
व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
स्तुति में आपकी मैं उठाऊँ अपने हाथ, हूँ ख़ुश कि आप आए इस दुनिया में।

इंसान आया धूल से, और परमेश्वर ने दी उसे ज़िंदगी।
शैतान उतरा, दूषित किया मानव जाति को।
खो चुकी है उनकी इंसानियत और उनका तर्क।
पीढ़ी दर पीढ़ी, उस दिन से होती गई कम।
पर आप हैं व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
मैं हूँ धूल, पर देख सकता हूँ आपका चेहरा। कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?
व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
मैं हूँ धूल, पर देख सकता हूँ आपका चेहरा। कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?

परमेश्वर ने बनाया इंसान और करता है उसे इतना प्यार कि देहधारण किया उसने फिर,
बुरा और अच्छा, विपत्ति और दुख सब सहा,
हमें बचाया और ले आए हमें इस ख़ूबसूरत जगह में।
हम करेंगे आपका शुक्रिया हमेशा।
व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
दूषित था मैं, पर बचाया आपने! कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?
व्यावहारिक और सच्चे परमेश्वर, मेरे भीतर के प्रेम।
दूषित था मैं, पर बचाया आपने! कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?
कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?
कैसे नहीं करूँ मैं आपकी आराधना?

परमेश्वर के भजन – नये युग में स्तुति – प्रभु की वापसी का स्वागत करें

Hindi Christian Worship Songs – How to Seek God’s Appearance – Get the Answer in This Song

बाइबल परमेश्वर के कार्य का प्रमाण है; केवल बाइबल पढ़ने के द्वारा ही प्रभु पर विश्वास करने वाले लोग यह जान सकते हैं कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी और सभी चीजों को बनाया और इसी से वे परमेश्वर के अद्भुत कार्यों, उसकी महानता और सर्वशक्तिमानता को देख सकते हैं। बाइबल में परमेश्वर के बहुत सारे वचन और मनुष्य के अनुभवों की बहुत सारी गवाहियाँ हैं; यह मनुष्य के जीवन के लिए प्रावधान कर सकती है और मनुष्य के लिए बहुत लाभदायक हो सकती है, इसलिए मुझे जिसकी खोज करनी है वह यह है कि क्या हम वास्तव में बाइबल पढ़ने के द्वारा अनन्त जीवन को प्राप्त कर सकते हैं? क्या बाइबल के भीतर वास्तव में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है?

उत्तर:

बाइबल पढ़ने से हम यह समझ पाए कि परमेश्‍वर सभी चीजों का सृष्टिकर्ता है और हमने उसके चमत्कारिक कर्मों को पहचानना शुरू कर दिया। इसका कारण यह है कि बाइबल परमेश्वर के कार्य के प्रथम दो चरणों की गवाही है। यह परमेश्‍वर के वचनों और कार्य का अभिलेख है और व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान मनुष्य की गवाही है। इसलिए, हमारे विश्वास के लिए बाइबल बहुत महत्वपूर्ण है इसके बारे में सोचो, यदि बाइबल नहीं होती, तो मनुष्य कैसे परमेश्‍वर और परमेश्‍वर के वचनों को समझ पाता? और किस तरह से मनुष्‍य परमेश्‍वर के कर्मों की गवाही दे पाता और परमेश्‍वर में सच्‍चा विश्‍वास करना शुरू कर पाता? अगर मनुष्य बाइबल नहीं पढ़े, तो वह हर युग में परमेश्‍वर की आज्ञापालन करने वाले सभी संतों की असली गवाही का और कैसे गवाह बनेगा? इसलिए, विश्वास का अभ्यास करने के लिए बाइबल को पढ़ना आवश्यक है, और प्रभु के किसी भी विश्वासी को कभी भी बाइबिल से नहीं भटकना चाहिए। आप कह सकते हैं, जो बाइबल से भटक जाता है वह प्रभु में विश्वास नहीं कर सकता है। यह सभी युगों के संतों के अनुभवों में सत्यापित होता है। कोई भी विश्‍वास का अभ्यास करने में बाइबल को पढ़ने के मूल्य और अर्थ से इंकार करने की हिम्मत नहीं करता है। इसलिए, सभी युगों भर मे संतों और विश्वासियों ने बाइबल की पढ़ाई को एक महत्‍वपूर्ण विषय के रूप में देखा है। कुछ लोग यहाँ तक कह सकते हैं, कि बाइबल और प्रार्थना पढ़ना उतना ही जरूरी है जितना कि चलने के लिए हमारे दोनों पैर जरूरी हैं, जिसमें से एक के भी बिना हम आगे बढ़ने में विफल रहते हैं। पढना जारी रखे

सुसमाचार से सम्बन्धित सत्य

बाइबल में यह कहा गया है कि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों के बीच कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, एकमात्र उद्धारकर्ता यीशु मसीह हैं, कल भी वे ही थे, आज भी वे ही हैं, और सदा के लिए वे ही रहेंगे। लेकिन आज आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास क्यों करते हैं?

 

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

“जो जय पाए उसे मैं अपने परमेश्‍वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊँगा, और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्‍वर के पास से स्वर्ग पर से उतरनेवाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा” (प्रकाशितवाक्य 3:12)।

 

परमेश्वर के वचन से जवाब:

परमेश्वर की बुद्धि, परमेश्वर की चमत्कारिकता, परमेश्वर की धार्मिकता, और परमेश्वर का प्रताप कभी नहीं बदलेंगे। उसका सार और उसका स्वरूप कभी नहीं बदलेगा। उसका कार्य, हालाँकि, हमेशा आगे प्रगति कर रहा है और हमेशा गहरा होता जा रहा है, क्योंकि वह हमेशा नया रहता है और कभी पुराना नहीं पड़ता है।

“वचन देह में प्रकट होता है” से “परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)” से

ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि परमेश्वर अपरिवर्तशील है। यह सही है, किन्तु यह परमेश्वर के स्वभाव और सार की अपरिवर्तनशीलता का संकेत करता है। उसके नाम और कार्य में परिवर्तन से यह साबित नहीं होता है कि उसका सार बदल गया है; दूसरे शब्दों में, परमेश्वर हमेशा परमेश्वर रहेगा, और यह कभी नहीं बदलेगा। पढना जारी रखे

आध्यात्मिक उलझनों का समाधान

यह स्पष्ट रूप से बाइबल में लिखा है कि प्रभु यीशु मसीह है, परमेश्वर का पुत्र है, और वे सभी लोग जो प्रभु में विश्वास करते हैं, वे भी मानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह है और वह परमेश्वर का पुत्र है। और फिर भी तुम यह गवाही दे रहे हो कि देहधारी मसीह परमेश्वर का प्रकटन है, कि वह खुद परमेश्वर है। तुम कृपया हमें यह बताओगे कि क्या देहधारी मसीह, वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है या स्वयं परमेश्वर है?

 

उत्तर:

देहधारी मसीह स्वयं परमेश्वर हैं या परमेश्वर के पुत्र हैं? यह वास्तव में ऐसा सवाल है जिसे प्रभु के ज्यादातर विश्वासी बनहिं समझते हैं। जब देहधारी प्रभु यीशु मानवजाति के छुटकारे का कार्य करने के लिए आये थे, तो लोगों के बीच प्रकट होकर कार्य करते हुए, परमेश्वर मनुष्य के पुत्र बन गए। उन्होंने न केवल अनुग्रह के युग का आरंभ किया, बल्कि एक नए युग की भी शुरुआत की जिसमें परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच रहने के लिए मनुष्यों की दुनिया में आये। बड़ी श्रद्धा के साथ, जिन मनुष्यों ने प्रभु यीशु का अनुसरण किया उन्होंने उनको मसीह यानी परमेश्वर का पुत्र कहा। उस समय, पवित्र आत्मा ने भी इस तथ्य की गवाही दी कि प्रभु यीशु परमेश्वर के प्रिय पुत्र हैं, और प्रभु यीशु स्‍वर्ग के परमेश्‍वर को पिता कहते थे। इस तरीके से, पिता-पुत्र के इस संबंध की धारणा धार्मिक जगत में बनी। पढना जारी रखे

आध्यात्मिक उलझनों का समाधान

बाइबल में यह लिखा गया है: “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है” (इब्रानियों 13:8)। तो परमेश्वर का नाम कभी नहीं बदलता है! लेकिन तुम कहते हो कि जब परमेश्वर अंतिम दिनों में फिर से आएगा तो वह एक नया नाम लेगा और उसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहा जाएगा। तुम इसे कैसे समझा सकते हो?

 

उत्तर:

बाइबल में कहा गया है, “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है” (इब्रानियों 13:8)। इससे इस सच्‍चाई का पता चलता है कि ईश्‍वर का स्‍वभाव और उसका मूल सार शाश्‍वत है और यह बदलता नहीं है। इसका मतलब यह नहीं होता कि उसका नाम नहीं बदलेगा। चलिए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों पर नजर डालते हैं। पढना जारी रखे

Hindi Christian Devotional Song | मनुष्य की पुकार पर परमेश्वर देता है वो जिसकी उसे ज़रूरत है (Lyrics)

Hindi Prayer Song | मनुष्य की पुकार पर परमेश्वर देता है वो जिसकी उसे ज़रूरत है (Lyrics)

ईश्वर ने मानव को बनाने के बाद,
आत्माएँ उसने उन्हें दे दिये,
और कहा कि अगर वे न पुकारें उसे,
तो वे होंगे उसके आत्मा से जुदा,
और “स्वर्ग का प्रसारण”
पृथ्वी को प्राप्त न हो सकेगा।
मानवजाति के पुकारने से,
ईश्वर देता है जो उन्हें ज़रूरत है।
पहले तो वह उनमें निवास नहीं करता है,
पर देता है मदद क्योंकि वे पुकारते हैं।
आंतरिक शक्ति से वे पाते हैं मजबूती
और शैतान जुर्रत नहीं करता यहाँ खेलने की अपनी इच्छानुसार।

जब ईश्वर मानव की आत्मा में नहीं होता है,
एक ख़ाली स्थान खुल जाता है।
शैतान प्रवेश करने का मौक़ा लेता है।
पर जब वे ईश्वर से दिल से संपर्क करते हैं,
शैतान डर जाता है और बचकर भागने लगता है।
मानवजाति के पुकारने से,
ईश्वर देता है जो उन्हें ज़रूरत है।
पहले तो वह उनमें निवास नहीं करता है,
पर देता है मदद क्योंकि वे पुकारते हैं।
आंतरिक शक्ति से वे पाते हैं मजबूती
और शैतान जुर्रत नहीं करता यहाँ खेलने की अपनी इच्छानुसार।

यदि मानव पवित्रात्मा से जुड़ा रहे,
शैतान दख़्ल की जुर्रत नहीं कर सकता।
बिन शैतान की दख़्ल अंदाज़ी के
लोग जी सकते हैं सामान्य जीवन,
और ईश्वर उनके भीतर कार्य कर सकता है
बिन किसी रुकावट के।
इस तरह, जो ईश्वर करना चाहता है
मानव द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मानवजाति के पुकारने से,
ईश्वर देता है जो उन्हें ज़रूरत है।
पहले तो वह उनमें निवास नहीं करता है,
पर देता है मदद क्योंकि वे पुकारते हैं।
आंतरिक शक्ति से वे पाते हैं मजबूती
और शैतान जुर्रत नहीं करता यहाँ खेलने की,
खेलने की अपनी इच्छानुसार।
“मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना” से

प्रार्थनाओं का सही तरीका क्या है, परमेश्वर से वास्तव में प्रार्थना कैसे करें?