4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?

4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?

  संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

  ”पिता किसी का न्याय नहीं करता, परन्तु न्याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है” (यूहन्ना 5:22)।

  ”वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है” (यूहन्ना 5:27)।

  परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

  परमेश्वर की सम्पूर्ण प्रबंधकीय योजना के कार्य को व्यक्तिगत तौर पर स्वयं परमेश्वर के द्वारा किया गया है। प्रथम चरण – संसार की सृष्टि – को परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत तौर पर किया गया था, और यदि इसे नहीं किया गया होता, तो कोई भी मानवजाति की सृष्टि करने में सक्षम नहीं होता; दूसरा चरण सम्पूर्ण मानवजाति का छुटकारा था, और इसे भी स्वयं परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत तौर पर किया गया था; तीसरा चरण स्पष्ट है: परमेश्वर के सम्पूर्ण कार्य के अन्त को स्वयं परमेश्वर के द्वारा किये जाने की तो और भी अधिक आवश्यकता है। सम्पूर्ण मानवजाति के छुटकारे, उस पर विजय पाने, उसे हासिल करने, एवं सिद्ध बनाने के समस्त कार्य को स्वयं परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत तौर पर सम्पन्न किया जाता है। पढना जारी रखे

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो

  मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य परस्पर क्रिया के समान प्रतीत होता है, जैसे कि यह मानव प्रबंधों के द्वारा उत्पन्न हुआ हो, या मानविक हस्तक्षेप के माध्यम से। परन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी होती है और परमेश्वर के लिए एक दृढ़ गवाह बने रहने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब की परीक्षा ली जा रही थी: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के सामने शर्त लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कार्य थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था। हर कदम के पीछे जो परमेश्वर ने शैतान के साथ बाज़ी में परमेश्वर ने तेरे लिए उठाए—उन सभी के पीछे एक युद्ध था। उदाहरण के लिए, यदि तू अपने भाइयों और बहनों के प्रति पक्षपातपूर्ण भावना रखता है, तो तेरे पास वे शब्द होंगे जो तू कहना चाहता है—वे शब्द जो परमेश्वर को अप्रसन्न करने वाले हो सकते हैं—परन्तु यह तेरे लिए भीतरी तौर पर कठिन होगा, और इस क्षण में, तेरे भीतर एक युद्ध आरंभ होगा: क्या मैं बोलूँ या नहीं? यही एक युद्ध है। पढना जारी रखे

3. देह-धारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?

3. देह-धारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?

  संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

  ”मूसा ने कहा, “मुझे अपना तेज दिखा दे। उसने कहा, … तू मेरे मुख का दर्शन नहीं कर सकता; क्योंकि मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता” (निर्गमन 33:18-20)।

  ”और यहोवा सीनै पर्वत की चोटी पर उतरा; और मूसा को पर्वत की चोटी पर बुलाया, और मूसा ऊपर चढ़ गया। तब यहोवा ने मूसा से कहा, “नीचे उतर के लोगों को चेतावनी दे, कहीं ऐसा न हो कि वे बाड़ा तोड़ के यहोवा के पास देखने को घुसें, और उनमें से बहुत से नष्‍ट हो जाएँ” (निर्गमन 19:20-21)।

  ”सब लोग गर्जन और बिजली और नरसिंगे के शब्द सुनते, और धूआँ उठते हुए पर्वत को देखते रहे, और देख के, काँपकर दूर खड़े हो गए; 19और वे मूसा से कहने लगे, “तू ही हम से बातें कर, तब तो हम सुन सकेंगे; परन्तु परमेश्‍वर हम से बातें न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएँ” (निर्गमन 20:18-19)।

  ”तब यह आकाशवाणी हुई, मैं ने उसकी महिमा की है, और फिर भी करूँगा।” तब जो लोग खड़े हुए सुन रहे थे उन्होंने कहा कि बादल गरजा। दूसरों ने कहा, “कोई स्वर्गदूत उससे बोला” (युहन्ना 12:28-29)। पढना जारी रखे

2. देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?

2. देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?

  संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

  ”और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।” (युहन्ना 1:14)।

  ”मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ” (युहन्ना 14:6)।

  ”यीशु ने उससे कहा, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। मेरा विश्‍वास करो कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरा विश्‍वास करो” (युहन्ना 14:9-11)।

  ”मैं और पिता एक हैं” (युहन्ना 10:30)। पढना जारी रखे

1. प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

  1. प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।

  संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

  ”तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा” (लूका 12:40)।

  ”क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ” (लूका 17:24-25)।

  ”आधी रात को धूम मची: ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो” (मत्ती 25:6)।

  ”देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

  ”देख, मैं चोर के समान आता हूँ; धन्य वह है जो जागता रहता है, और अपने वस्त्र की चौकसी करता है कि नंगा न फिरे, और लोग उसका नंगापन न देखें” (प्रकाशितवाक्य 16:15)। पढना जारी रखे

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक

  आज, जैसे तुम लोग परमेश्वर को जानने और प्रेम करने की कोशिश करते हो, एक प्रकार से तुम लोगों को कठिनाई और परिष्करण से होकर जाना होगा और दूसरे में, तुम लोगों को एक मूल्य चुकाना होगा। परमेश्वर को प्रेम करने के सबक से ज्यादा कुछ भी गहरा सबक नहीं है और ऐसा कहा जा सकता है कि सबक जो मनुष्य जीवन भर विश्वास करने से सीखते हैं वह परमेश्वर को किस प्रकार से प्रेम करना होता है। अर्थात् यदि तू परमेश्वर पर विश्वास करता है तो तुझे उसे प्रेम करना होगा। यदि तू केवल परमेश्वर पर विश्वास करता है परन्तु उससे प्रेम नहीं करता है, परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है, और कभी भी परमेश्वर को अपने हृदय से निकलने वाले सच्चे प्रेम से प्रेम नहीं किया है, तो परमेश्वर पर तेरा विश्वास करना व्यर्थ है; यदि परमेश्वर पर अपने विश्वास में, तू परमेश्वर से प्रेम नहीं करता है, तो तू व्यर्थ में ही जी रहा है, और तेरा सम्पूर्ण जीवन सभी जीवन से सबसे निम्न स्तर पर है। पढना जारी रखे

प्रश्न 10: तुम इसका प्रमाण प्रस्तुत करते हो कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य को अभिव्यक्त करता है और अंतिम दिनों में न्याय का अपना कार्य करता है। मुझे लगता है कि प्रभु यीशु में हमारा विश्वास और पवित्र आत्मा के कार्य की स्वीकृति का मतलब है कि हमने पहले से ही परमेश्वर के न्याय का अनुभव किया है। सबूत के तौर पर यहाँ प्रभु यीशु के वचन दिए गए हैं: “क्योंकि यदि मैं न जाऊँ तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा; परन्तु यदि मैं जाऊँगा, तो उसे तुम्हारे पास भेजूँगा। वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर या कायल करेगा” (योहन 16:7-8)। हमारा मानना है कि, हालांकि प्रभु यीशु का कार्य छुटकारे का कार्य था, जब वह स्वर्ग तक पहुंच गया तो पेन्तेकोस्त के दिन, पवित्र आत्मा उतर आया और उसने मनुष्यों पर काम किया: “पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर या कायल करेगा”। यह आखिरी दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य होना चाहिए, इसलिए मैं जिस बात का अनुसरण करना चाहता हूँ, वो यह है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा अंतिम दिनों में किए गए न्याय के कार्य और प्रभु यीशु के कार्य के बीच वास्तव में क्या भिन्नताएँ हैं?

प्रश्न 10: तुम इसका प्रमाण प्रस्तुत करते हो कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य को अभिव्यक्त करता है और अंतिम दिनों में न्याय का अपना कार्य करता है। मुझे लगता है कि प्रभु यीशु में हमारा विश्वास और पवित्र आत्मा के कार्य की स्वीकृति का मतलब है कि हमने पहले से ही परमेश्वर के न्याय का अनुभव किया है। सबूत के तौर पर यहाँ प्रभु यीशु के वचन दिए गए हैं: “क्योंकि यदि मैं न जाऊँ तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा; परन्तु यदि मैं जाऊँगा, तो उसे तुम्हारे पास भेजूँगा। वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर या कायल करेगा” (योहन 16:7-8)। हमारा मानना है कि, हालांकि प्रभु यीशु का कार्य छुटकारे का कार्य था, जब वह स्वर्ग तक पहुंच गया तो पेन्तेकोस्त के दिन, पवित्र आत्मा उतर आया और उसने मनुष्यों पर काम किया: “पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर या कायल करेगा”। यह आखिरी दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य होना चाहिए, इसलिए मैं जिस बात का अनुसरण करना चाहता हूँ, वो यह है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा अंतिम दिनों में किए गए न्याय के कार्य और प्रभु यीशु के कार्य के बीच वास्तव में क्या भिन्नताएँ हैं? पढना जारी रखे

Hindi Christian Movie | स्वप्न से जागृति | Revealing the Mystery of Entering the Kingdom of Heaven

Hindi Christian Movie | स्वप्न से जागृति | Revealing the Mystery of Entering the Kingdom of Heaven

  यू फान भी प्रभु यीशु में विश्वास करने वाले अन्य बहुतेरे लोगों के समान ही हैं—उन्हें लगता है कि प्रभु यीशु को जब सूली पर चढ़ाया गया, तो उन्होंने पहले ही इंसान के पापों को क्षमा कर दिया था। उन्हें लगता है कि अपनी आस्था के कारण उन्होंने धार्मिकता पाई है और यदि वे सर्वस्व त्यागकर प्रभु के लिये कड़ी मेहनत करेंगी, तो प्रभु यीशु के लौटने पर वे निश्चित रूप से स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर पाएंगी। लेकिन उनके सहकर्मियों को संदेह है: प्रभु में हमारी आस्था के कारण हमें क्षमा कर दिया गया है, हम प्रभु के लिये त्याग और खुद को व्यय कर सकते हैं, लेकिन अक्सर पाप और प्रभु का विरोध करते रहते हैं। क्या हम इस प्रकार सचमुच स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं? … अंतत: जब यू फान सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के गवाहों से संगति और विचार-विमर्श करती हैं, तो उन्हें प्रभु के आगमन और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश के रहस्य समझ में आते हैं और आखिरकार वे सपने से जाग जाती हैं…

Hindi New Gospel Movie | Is Life From the Bible or From God | “बाइबल और परमेश्वर”

Hindi New Gospel Movie | Is Life From the Bible or From God | “बाइबल और परमेश्वर”

  लियू झिझोंग चीन में एक स्थानीय कलीसिया के एल्डर हैं। वह 30 वर्षों से भी अधिक समय से एक विश्वासी रहे हैं, और उन्होंने निरंतर विश्वास किया है कि “बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है,” “बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करती है, परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, बाइबलमें विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करना है।” उनके हृदय में बाइबल सर्वोपरि है। बाइबिल में अपनी गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के कारण, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य को देखने या समझने की मांग नहीं की है। एक दिन, जब उन्होंने विश्वासियों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को ऑनलाइन पढ़ने से रोक दिया, तो उनका सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के उपदेशकों के साथ आमना-सामना हो गया। सत्य के बारे में गंभीर बहस के बाद, क्या वह अंततः बाइबल और परमेश्वर के बीच के रिश्ते को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम थे? क्या वह बाइबल से हटकर यह समझने में सक्षम थे कि यीशु ही सत्य, मार्ग और जीवन है? क्या वह परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहण किए जाएंगे?

Hindi Christian Video | संकट में स्वर्गारोहण | The Salvation of the Last Days (Hindi Dubbed)

Hindi Christian Video | संकट में स्वर्गारोहण | The Salvation of the Last Days (Hindi Dubbed)

  झो झिगांग चीन के एक स्थानीय कलीसिया में एल्डर है। बहुत से ईसाईयों की तरह, प्रभु के एक विश्वासी के रूप में उसकी जीवित स्वर्गाहोण किए जाने की, प्रभु से मिलने की और उसके साथ शासन करने की सबसे बड़ी आशा है। 1999 में, जब कलीसिया के अगुवा ने संदेश जारी किया कि, “वर्ष 2000 में प्रभु फिर से आएगा, और उसके विश्वासियों का जीवित स्वर्गारोहण किया जाएगा,” तो वह पहले की तुलना में और भी ज़्यादा उत्तेजित और उत्साही हो गया था। आस्था और आत्मविश्वास से लबालब भरे उसे भविष्य में आशा और अपेक्षा दिखायी देने लगीं।… हालाँकि, वर्ष 2000 आया और चला गया, उनकी आशाएँ बिखर गईं। उसके संप्रदाय में आस्था का एक अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया, और वह यह सोचने के अलावा और कुछ नहीं कर सका कि उसने सही मार्ग चुना भी था या नहीं?

  उसके पूरे संप्रदाय में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य के अवतरण के सुसमाचार के फैलने के बाद, झो झिगांग और सहकर्मियों का एक समूह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के उपदेशकों के साथ गहन चर्चा और वाद-विवाद करने लगे। यह चर्चा उनके संप्रदाय में बरसों से बनाए रखे गए विश्वास के इर्द-गिर्द ही घूमती थी। … अंत में, झाओ झिगांग साफ़ तौर पर देख सका था कि उन्हें धार्मिक मसीह-विरोधियों ने भ्रमित करके गुमराह किया है। उसने तुरंत ही सत्य को पहचान लिया और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया। आखिरकार परमेश्वर के सिंहासन के सामने उसका स्वर्गाहण कर लिया गया, जहाँ वह विलाप करने के अलावा कुछ नहीं कर सका कि, “मेरा स्वर्गारोहण सचमुच संकट में था!”