प्रभु के स्वागत के लिए सही दृष्टिकोण : विनम्र होकर खोज करने से आशीष मिलती है धार्मिकता की प्यास तृप्ति लाती है

“धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है” (मत्ती 5:3)।

परमेश्वर कहते हैं, “यीशु का लौटना उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, परन्तु उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, यह निंदा का एक संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के विरोध में तिरस्कार नहीं करना चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज करने के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। निष्कर्ष पर न पहुँचो; इससे ज्यादा और क्या, परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और विचारहीन न बनो। पढना जारी रखे

मानवजाति पर परमेश्वर की दया | मसीही गीत हिंदी में

मानवजाति पर परमेश्वर की दया | मसीही गीत हिंदी में

दया का अर्थ हो सकता है, दिल से प्रेम करना।
दया का अर्थ हो सकता है, प्रेम और रक्षा करना।
दया का अर्थ हो सकता है, चोट न देना चाहना।
दया का अर्थ हो सकता है, कोमलता महसूस करना।
दया दिखा सकती है कोमल प्रेम और अनुराग।
दया का अर्थ हो सकता है हार मानना न चाहना।
दया है इन्सान के प्रति परमेश्वर की कृपा और सहनशीलता।
यह शब्द परमेश्वर के दिल और रवैये को उजागर करता है।

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मसीह का सारतत्व है परमेश्वर

परमेश्वर कहते हैं, “देहधारी परमेश्वर को मसीह कहा जाता है, और इसलिए वह मसीह, जो लोगों को सत्य दे सकता है परमेश्वर कहलाता है। इसमें कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि वह परमेश्वर के सार को धारण किए है, और अपने कार्य में परमेश्वर के स्वभाव और बुद्धि को धारण करता है, और ये चीजें मनुष्य के लिये अप्राप्य हैं। जो अपने आप को मसीह कहते हैं, फिर भी परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते, वे सभी धोखेबाज़ हैं। पढना जारी रखे

परमेश्वर के परिवार में न्याय शुरू हो चुका है

ऐशन, अमेरिका

मैं एक ईसाई हूँ। जब मैंने पहली बार परमेश्वर में विश्वास करना शुरू किया, तो मैंने अकसर उन उपदेशों को सुना जहाँ लोग कहा करते थे, “प्रभु यीशु हमारा उद्धार करने वाला है। वह हमारे पापों के कारण क्रूस पर चढ़ाया गया था। यीशु दयालु और प्यार करने वाला है। जब तक हम प्रभु के सामने अक्सर आते हैं और प्रार्थना के माध्यम से हमारे पापों को स्वीकार करते हैं, हमारे पाप क्षमा किए जाएँगे और जब प्रभु लौटेगा, तो हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।” बाद में, जब मैंने बाइबल पढ़ी, तो मैंने कई उन कई हिस्सों पर ध्यान दिया जहाँ “न्याय” का उल्लेख किया गया है। उदाहरण के लि: “क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए” (1 पतरस 4:17)। “क्योंकि उस ने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है” (प्रेरितों के काम 17:31)। उस समय, मैं नहीं समझती थी कि न्याय का अर्थ क्या था। तो, मैं उपदेशक से पूछने गई। उपदेशक ने मुझे बताया, “जब प्रभु लौटता है, तो वह मनुष्यों के पापों का निर्धारण करने के लिए न्याय का कार्य करेगा। चूँकि यीशु हमारे प्रायश्चित के लिए बलिदान है, इसलिए हमारे पाप क्षमा किए जाएँगे और हमें दोषी नहीं ठहराया जाएगा। इसके अलावा, जो लोग प्रभु के लिए खर्च और परिश्रम करते हैं उन्हें उनके योगदान के अनुसार मुकुट प्राप्त होंगे। मुकुट बड़े और छोटे होंगे”। प्रचारक ने मुझसे जो कहा, वह मेरी समझ में नहीं आया। मुझे लगा कि यह “मुकुट” का विचार धर्मनिरपेक्ष दुनिया के उस विचार की तरह था कि वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मेरा दिल इसे स्वीकार नहीं कर सका।

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Hindi Christian Movie अंश 4 : “भक्ति का भेद – भाग 2” – परमेश्वर मानवजाति को बचाने के लिए दो बार देहधारण क्यों करते हैं

Hindi Christian Movie अंश 4 : “भक्ति का भेद – भाग 2” – परमेश्वर मानवजाति को बचाने के लिए दो बार देहधारण क्यों करते हैं

अनुग्रह के युग में, देहधारी परमेश्वर को जब सूली पर चढ़ा दिया गया था, तब उन्होंने मनुष्य के पापों को अपने ऊपर लिया था और मानवजाति के छुटकारे का कार्य पूरा किया था। अंत के दिनों में, परमेश्वर ने सत्य व्यक्त करने और मनुष्य का पूरी तरह से शुद्धिकरण और बचाव करने के लिए एक बार फिर से देह धारण की है। परमेश्वर को मनुष्य के उद्धार का कार्य करने के लिए दो बार देहधारण करने की ज़रूरत आख़िर क्यों पड़ती है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “प्रथम देहधारण यीशु की देह के माध्यम से मनुष्य को पाप से छुटकारा देने के लिए था, अर्थात्, उसने मनुष्य को सलीब से बचाया, परन्तु भ्रष्ट शैतानी स्वभाव तब भी मनुष्य के भीतर रह गया था। दूसरा देहधारण अब और पापबलि के रूप में कार्य करने के लिए नहीं है परन्तु उन्हें पूरी तरह से बचाने के लिए है जिन्हें पाप से छुटकारा दिया गया था। इसे इसलिए किया जाता है ताकि जिन्हें क्षमा किया गया उन्हें उनके पापों से दूर किया जा सके और पूरी तरह से शुद्ध किया जा सके, और वे स्वभाव में परिवर्तन प्राप्त कर शैतान के अंधकार के प्रभाव को तोड़कर आज़ाद हो जाएँ और परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आएँ। केवल इसी तरीके से ही मनुष्य को पूरी तरह से पवित्र किया जा सकता है” (वचन देह में प्रकट होता है)। यह वीडियो परमेश्वर के दो देहधारणों के रहस्य को उजागर करता है।

यीशु मसीह का दूसरा आगमन | भविष्यवाणियां सच साबित हो गई हैं | विश्वास दर्शिका

तीन पहलुओं के द्वारा  परमेश्वर की वापसी का रहस्य जानें, जिससे आप परमेश्वर का स्वागत कर पाएंगे।

Christian Movie अंश 5 : “भक्ति का भेद – भाग 2” – परमेश्वर के दो बार देहधारण करने के महत्व को समझना

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 70

खोई हुई भेड़ का दृष्टान्त

(मत्ती 18:12-14) तुम क्या सोचते हो? यदि किसी मनुष्य की सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक भटक जाए, तो क्या वह निन्यानबे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को न ढूँढ़ेगा? और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूँ कि वह उन निन्यानबे भेड़ों के लिये जो भटकी नहीं थीं, इतना आनन्द नहीं करेगा जितना कि इस भेड़ के लिये करेगा। ऐसा ही तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है यह इच्छा नहीं कि इन छोटों में से एक भी नष्‍ट हो।

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Hindi Christian Movie | नूह का समय आ चुका है | God’s Warning to Man in the Last Days (Hindi Dubbed)

बुराई और अविवेकी पुराने युग को बाढ़ में डूबा दिया गया और पूरी तरह से साफ कर दिया गया, यह नूह का दिन है।प्रभु ने कहा है, “जैसे नूह के दिनों में हुआ, वैसे ही मनुष्य का पुत्र का आना भी होगा।” (मत्ती 24:37)(ERV-HI)। आजकल, लोगों की बुराई और भ्रष्टाचार नूह के युग के लोगों से आगे निकल गयी है और इस हद तक पहुंच गयी है जो असहनीय है।इस डॉक्यूमेंट्री में आज के दिनों के तथ्य हज, कृपया वीडियो देखें, नूह के दिन आ चुके है। खतरे की घंटी बज चुकी है, आप अभी भी क्या इंतजार कर रहे हैं? लिंक को क्लिक करे और देखे। और ज्यादा लोगो के साथ साझा करने के लिए याद रखे!

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पूरब की ओर लाया है परमेश्वर अपनी महिमा

परमेश्वर कहते हैं, “मैंने अपनी महिमा इज़राइल को दी और फिर उसे हटा लिया, इसके बाद मैं इज़राइलियों के साथ-साथ पूरी इंसानियत को पूरब में ले आया। मैं उन सभी को प्रकाश में लेकर आया हूँ ताकि वे इसके साथ फिर से मिल जाएं और इससे जुड़े रह सकें, और उन्हें इसकी खोज न करनी पड़े। जो प्रकाश की खोज कर रहे हैं उन्हें मैं फिर से प्रकाश देखने दूंगा और उस महिमा को देखने दूंगा जो मेरे पास इज़राइल में थी; मैं उन्हें यह देखने दूंगा कि मैं बहुत पहले एक सफ़ेद बादल पर सवार होकर मनुष्यों के बीच आ चुका हूँ, मैं उन्हें असंख्य सफ़ेद बादल और प्रचुर मात्रा में फलों के समूह देखने दूंगा। पढना जारी रखे

क्या आप आत्मा और सच्चाई से परमेश्वर की आराधना करते हैं?

शियांशिन द्वारा

प्रभु यीशु ने कहा है, “जिसमें सच्‍चे भक्‍त पिता की आराधना आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही आराधकों को ढूँढ़ता है। परमेश्‍वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसकी आराधना करनेवाले आत्मा और सच्‍चाई से आराधना करें” (यूहन्ना 4:23-24)। प्रभु की अपेक्षा है कि हम आत्मा और सच्चाई से परमेश्वर की आराधना करें, केवल इसी तरीके से हम उनकी स्वीकृति पा सकते हैं। लेकिन वास्तव में आत्मा और सच्चाई से परमेश्वर की आराधना करने में कौन सी बात अति आवश्यक है? कुछ भाई-बहन मानते हैं कि हर दिन बाइबल पढ़ना और दिल लगाकर प्रार्थना करना है, और कुछ लोगों का मानना है कि समय पर बैठकों में भाग लेना और हर हफ्ते कलीसिया जाना परमेश्वर की आराधना है, कुछ ऐसे भी लोग हैं जो मानते हैं कि मेहनत करना, काम करना, त्याग करना, और प्रभु के लिए स्वयं को खपाना परमेश्वर की आराधना करना है, इत्यादि। परमेश्वर की आराधना का अभ्यास करने के कई तरीके हैं, लेकिन क्या हम आत्मा और सच्चाई से उनकी आराधना कर रहे हैं? क्या परमेश्वर इस प्रकार के अभ्यास की प्रशंसा करते हैं? आइये, इस पर एक साथ संगति करें।

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ईसाई प्रार्थना | प्रार्थना करने का सही तरीका | अपनी प्रार्थनाओ का जवाब पाएँ

प्रभावी रूप से प्रार्थना करना और परमेश्वर के साथ उचित संबंध रखना महत्वपूर्ण है। प्रार्थना के ये 4 प्रमुख तत्व आपको आपकी आध्यात्मिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

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