Hindi Christian Songs With Lyrics 2020 | कैसे जियें आज्ञाकारी जीवन

Hindi Christian Songs With Lyrics 2020 | कैसे जियें आज्ञाकारी जीवन

तुम सबके आत्मिक कद जांचे जाते हैं,
यह जानने के लिए, क्या बन सकती है कलीसिया,
क्या एक दूसरे का कहना मान सकोगे तुम।
यों देखा जाए तो, तुम्हारी आज्ञाकारिता
ऐसी है जैसी तुम चुनते हो।
शायद तुम एक का कहना मान भी लो,
पर दूसरे का कहना न मान पाओ।

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 78

फरीसियों के द्वारा यीशु पर दोष लगाया जाना

(मरकुस 3:21-22) जब उसके कुटुम्बियों ने यह सुना, तो वे उसे पकड़ने के लिए निकले; क्योंकि वे कहते थे कि उसका चित ठिकाने नहीं है। शास्त्री भी जो यरूशलेम से आए थे, यह कहते थे, “उसमें शैतान है,” और “वह दुष्टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता है।”

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परमेश्वर द्वारा अंत के दिनों में क्रियान्वित कार्य को देख कर, हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि यही सच्चा मार्ग है?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

परमेश्वर और मनुष्य को बराबर नहीं कहा जा सकता। उसका सार और उसका कार्य मनुष्य के लिये सर्वाधिक अथाह और समझ से परे है। यदि परमेश्वर व्यक्तिगत रूप में अपना कार्य न करे, और मनुष्यों के संसार में अपने वचन न कहें, तो मनुष्य कभी भी परमेश्वर की इच्छा को समझ नहीं सकता है, और इसलिए, यहाँ तक कि जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भी परमेश्वर को समर्पित कर दिया है, वे भी उसके अनुमोदन को पाने में सक्षम नहीं हैं। परमेश्वर के कार्य के बिना, चाहे मनुष्य कितना भी अच्छा करे, उसका कोई मूल्य नहीं होगा, क्योंकि परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचार से सदैव ऊँचे होंगे, और परमेश्वर की बुद्धि मनुष्यों के लिये अपरिमेय है। और इसीलिये मैं कहता हूँ कि जिन्होंने परमेश्वर और उसके काम की “वास्तविक प्रकृति का पता लगाया” है कि प्रभावहीन है, वे अभिमानी और अज्ञानी हैं। मनुष्य को परमेश्वर के कार्य को परिभाषित नहीं करना चाहिए; साथ ही, मनुष्य परमेश्वर के कार्य को परिभाषित नहीं कर सकता है। परमेश्वर की दृष्टि में मनुष्य चींटी से भी छोटा है, तो वह परमेश्वर के कार्य को कैसे माप सकता है? जो लगातार कहते रहते हैं, “परमेश्वर इस तरह या उस से तरह कार्य नहीं करता है,” या “परमेश्वर ऐसा या वैसा है”—क्या वे सब अभिमानी नहीं हैं? हम सबको जानना चाहिए कि वे सब लोग जो शरीरधारी हैं, शैतान के द्वारा भ्रष्ट किए जा चुके हैं। परमेश्वर का विरोध करना उनकी प्रकृति है, और वे परमेश्वर की बराबरी में नहीं हो सकते हैं। वे परमेश्वर के कार्य के लिये परामर्श तो बिल्कुल नहीं दे सकते हैं। परमेश्वर मनुष्यों को मार्गदर्शन कैसे करता है, यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। मनुष्य को समर्पण करना चाहिए, और कोई ऐसा-वैसा विचार नहीं रखना चाहिए, क्योंकि मनुष्य धूल मात्र है। चूँकि हम परमेश्वर को खोजने का प्रयास करते हैं, इसलिए हमें परमेश्वर के कार्य पर परमेश्वर के विचार करने के लिए अपनी अवधारणाएँ नहीं थोपनी चाहिए, और सबसे कम परिमाण में भी हमें जानबूझकर परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिये अपने भ्रष्ट स्वभाव को नहीं लगाना चाहिए। क्या ऐसा करना हमें मसीह-विरोधी नहीं बनाएगा? ऐसे लोग कैसे कह सकते हैं कि वे परमेश्वर में विश्वास करते हैं? चूँकि हम विश्वास करते हैं कि परमेश्वर है, और चूँकि हम उसे संतुष्ट करना और उसे देखना चाहते हैं, इसलिए हमें सत्य के मार्ग की खोज करनी चाहिए, और परमेश्वर के अनुकूल रहने के मार्ग को खोजना चाहिए। हमें परमेश्वर के विरुद्ध अभिमानी और जिद्दी बनकर खड़े नहीं होना चाहिए; ऐसे कार्यों से भला क्या हो सकता है?

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अंत के दिनों के संकेत: अंत समय में नूह के दिन आ गये हैं, तो यीशु कार्य करने के लिए कैसे लौटेगा?

सूचीपत्र
नूह के दिन आ गये हैं: यह क्या संकेत है?
अंत के दिनों में प्रभु का आगमन कैसे होगा?
अंत के दिनों में प्रभु क्या काम करने के लिए आता है?
हमें प्रभु के प्रकटन और कार्य का अभिवादन कैसे करना चाहिए?

नूह के दिन आ गये हैं: यह क्या संकेत है?

नूह के दिन आ गये हैं
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परमेश्वर के साथ कोई एक सामान्य सम्बन्ध कैसे स्थापित कर सकता है?

How to establish a proper relationship with God?
Keeping a proper relationship with God is of importance for every believer in God, it is because it decides whether we can gain the work of the Holy Spirit and whether we can act in accordance with God’s will and be commended by Him. Take me for example, if my heart had strayed from God for some time, I would have not known God’s will on the matters that don’t conform to my will, and thereby resist it in my heart, which would make me fall into pains. Then how can we establish a proper relationship with God? I got enlightened and understand the path of this aspect by reading some words today. So, I ‘d like to share it with all my friends.

परमेश्वर के साथ कोई एक सामान्य सम्बन्ध कैसे स्थापित कर सकता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

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परमेश्वर वास्तव में मनुष्यों के बीच आ गया है

परमेश्वर कहते हैं, “मैंने तुम लोगों के बीच बहुत काम किया है और, निस्संदेह, बहुत से कथन भी कहे हैं। फिर भी मुझे महसूस होता है कि मेरे वचनों और कार्य ने अंत के दिनों में मेरे कार्य के उद्देश्य को अच्छी तरह से पूरा नहीं किया है। क्योंकि, अंत के दिनों में, मेरा कार्य किसी खास व्यक्ति या खास लोगों के वास्ते नहीं है, बल्कि मेरे अन्तर्निहित स्वभाव को प्रदर्शित करने के लिए है। पढना जारी रखे

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 80

(यूहन्ना 21:16-17) उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु; तू जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ों की रखवाली कर।” उसने तीसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?” पतरस उदास हुआ कि उसने उससे तीसरी बार ऐसा कहा, “क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?” और उससे कहा, “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है; तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों को चरा।”

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हिंदी मसीही गीत 2020 | मानवता के लिये बहुत महत्वपूर्ण देहधारी परमेश्वर (Lyrics)

हिंदी मसीही गीत 2020 | मानवता के लिये बहुत महत्वपूर्ण देहधारी परमेश्वर (Lyrics)


देहधारी परमेश्वर कर सकता है वो काम, जिसे इंसान कर नहीं सकता,
क्योंकि वैसा नहीं है उसके भीतर का सार, जैसा इंसान का है।
बचा सकता है वो इंसान को, क्योंकि अलग है पहचान उसकी, इन्सान से।
मानवता के लिये बहुत ज़रुरी है ये देह,
क्योंकि मानव है वो, और सबसे बढ़कर परमेश्वर है वो।
क्योंकि जो कर सकता है वो, देह में कोई मामूली इंसान कर नहीं सकता,
बचा सकता है दूषित इंसान को वो,
जो रहता है इसी धरती पर संग उसके, संग उसके।

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पाप पर विजय कैसे पाएँ: अंतत: मैंने शुद्धता का पथ पा लिया और मुक्त हो गयी

सारा, अमेरिका

सूचीपत्र
पापों के बंधन से निकल न पाने में असमर्थता के कारण मैं व्यथित महसूस करती थी
जब प्रभु लौटेंगे तो क्या वे नए कार्य करेंगे?
क्या अच्छा व्यवहार दर्शाता है कि हमारे स्वभावों में बदलाव आया है?
तो परमेश्वर ऐसे मनुष्य का न्याय करता है और उसे शुद्ध करता है
मैं परमेश्वर की वाणी को पहचान जाती हूँ और खुशी से प्रभु की वापसी का स्वागत करती हूँ

पापों के बंधन से निकल न पाने में असमर्थता के कारण मैं व्यथित महसूस करती थी

मैं एक ईसाई हूँ। प्रभु में विश्वास करना शुरू करने से पहले, एक युवा महिला के नाते मुझमें हमेशा दूसरों से आगे निकलने की बड़ी चाह थी। चूँकि मैं अपनी माँ से अधिक शिक्षित थी इसलिए मैं हमेशा अपनी माँ के सुझावों की अवहेलना करती थी। मेरी माँ भी अपने ही विचारों पर अड़े रहने वालों में से थीं, हमेशा मुझसे अपना कहा मनवाने की कोशिश करती थीं, और इसलिए हम दोनों अक्सर अपनी अलग-अलग राय के कारण लड़ते रहते थे। मेरी माँ के साथ इस अटपटे रिश्ते के कारण मुझे बहुत बुरा लगता था, लेकिन मैं इसे बदलने के लिए मैं कुछ नहीं कर सकती थी। जब मैंने प्रभु पर विश्वास करना शुरू किया, तो मेरे भाई-बहनों ने मुझे संगति देते हुए कहा, “हमें छुटकारा दिलाने के लिए प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था और उन्होंने हमारे पापों को क्षमा कर दिया ताकि हम उनकी प्रचुर कृपा का आनंद ले सकें। पढना जारी रखे

हम सब जानते हैं कि प्रभु यीशु परमेश्वर का देहधारण थे। अपना कार्य पूरा करने के बाद, उन्हें सूली पर लटका दिया गया और तब वे फिर से जीवित हो उठे और अपने सभी शिष्यों के समक्ष प्रकट हुए और वे अपने तेजस्वी आध्यात्मिक शरीर के साथ स्वर्ग में पहुँच गए। जैसा कि बाइबल में कहा गया है: “हे गलीली पुरुषो, तुम क्यों खड़े आकाश की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा” (प्रेरितों 1:11)। इस प्रकार, बाइबल-संबंधी शास्‍त्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि जब प्रभु फिर से आएंगे, तो उनका पुनर्जीवित आध्यात्मिक शरीर हमारे सामने दिखाई देगा। अंत के दिनों में, परमेश्वर ने न्याय का कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारण क्यों किया है? प्रभु यीशु के पुनर्जीवित आध्यात्मिक शरीर और मनुष्य के पुत्र के रूप में उनके देहधारण के बीच क्या अंतर है?

उत्तर:

ज्यादातर विश्वासी यह मानते हैं कि वापस लौटे प्रभु अपने आध्यात्मिक शरीर में उनके सामने प्रकट होंगे, यानी प्रभु यीशु का आध्यात्मिक शरीर, जिसमें वे अपने पुनर्जीवन के बाद चालीस दिनों तक मनुष्य के सामने रहे थे। हम विश्वासियों को यह बात बिलकुल स्पष्ट है। बाहरी तौर पर, प्रभु यीशु के पुनर्जीवन के बाद उनका आध्यात्मिक शरीर उनके देहधारी शरीर की छवि में दिखाई देता है, लेकिन आध्यात्मिक शरीर भौतिक विश्व, अंतरिक्ष और स्थान के द्वारा सीमित नहीं है। वह अपनी इच्छा से प्रकट और गायब होकर मनुष्य को चकित और हैरान कर सकता है। इसके उदाहरण बाइबल में दर्ज हैं। पढना जारी रखे