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परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 266

परमेश्वर का वचन इन हिंदी को और अधिक पढ़ने के लिए हमारे आधिकारिक पृष्ठ पर आपका स्वागत है

परमेश्वर द्वारा व्यवस्था के युग का कार्य कर लेने के बाद पुराना विधान बनाया गया और तब से लोगों ने बाइबल पढ़ना शुरू किया। यीशु ने आने के बाद अनुग्रह के युग का कार्य किया, और उसके प्रेरितों ने नया विधान लिखा। इस प्रकार बाइबल के पुराने और नए विधान की रचना हुई, और आज तक वे सभी लोग, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं, बाइबल पढ़ते रहे हैं। बाइबल इतिहास की पुस्तक है। निस्संदेह, उसमें नबियों की कुछ भविष्यवाणियाँ भी शामिल हैं, और वे भविष्यवाणियाँ किसी भी मायने में इतिहास नहीं हैं। बाइबल में अनेक भाग शामिल हैं—उसमें केवल भविष्यवाणियाँ ही नहीं हैं, या केवल यहोवा का कार्य ही नहीं है, और न ही उसमें मात्र पौलुस के धर्मपत्र हैं। तुम्हें ज्ञात होना चाहिए कि बाइबल में कितने भाग शामिल हैं; पुराने विधान में उत्पत्ति, निर्गमन…शामिल हैं, और उसमें नबियों द्वारा लिखी गई भविष्यवाणियों की पुस्तकें भी हैं। अंत में, पुराना विधान मलाकी की पुस्तक के साथ समाप्त होता है। पढना जारी रखे

परमेश्वर के दैनिक वचन | “प्रार्थना की क्रिया के विषय में” | अंश 418

आज का वचन को पढ़ें, और आप जीवन का अर्थ और मूल्य समझ जायेंगे।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “प्रार्थना की क्रिया के विषय में” | अंश 418

प्रार्थना करने के विषय में आधारभूत ज्ञान:

  1. बिना सोचे-समझे वह सब न कहो जो मन में आता है। तुम्हारे हृदय में एक बोझ होना आवश्यक है, कहने का अर्थ है कि जब तुम प्रार्थना करो तो एक लक्ष्य होना चाहिए।
  2. तुम्हारी प्रार्थनाओं में परमेश्वर के वचन होने चाहिए; वे परमेश्वर के वचनों पर आधारित होनी चाहिए।
  3. प्रार्थना करते समय तुम्हें पुरानी हो चुकी बातों को दोहराते नहीं रहना चाहिए। तुम्हें परमेश्वर के वर्तमान के वचनों पर ध्यान देना चाहिए, और प्रार्थना करते समय परमेश्वर को अपने अंतरतम विचार बताने चाहिए।
  4. सामूहिक प्रार्थना एक सार पर केंद्रित होनी चाहिए, जो आज पवित्र आत्मा का कार्य होना चाहिए।
  5. सब लोगों को सीखना आवश्यक है कि किसी चीज़ के लिए प्रार्थना कैसे करें। यह परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने का एक प्रकटीकरण भी है।
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यीशु मसीह के पुनरुत्थान के पश्चात, उनका मनुष्य को दिखाई देने का क्या अर्थ था?

चेंग हांग के द्वारा

यीशु का पुनरुत्थान

सूचीपत्र
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परमेश्वर की वाणी सुनो और उनके सामने स्वर्गारोहण करो—प्रभु के साथ दावत में भाग लो

बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार, परमेश्वर आपदाओं से पहले आएँगे। अब जब कि एक के बाद एक आपदाएँ आ रही हैं, तो कैसे हम परमेश्वर का स्वागत कर सकते हैं, कैसे परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहण कर सकते हैं, और कैसे प्रभु के साथ दावत में भाग ले सकते हैं? प्रभु यीशु ने कहा, “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)। “आधी रात को धूम मची: ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो’” (मत्ती 25:6)। इससे हम देख सकते हैं कि वास्तव में स्वर्गारोहित होने के लिए, हमें उन बुद्धिमान कुंवारियों की तरह बनना होगा जो परमेश्वर की आवाज़ को सुनना सीखती हैं और दूल्हे का स्वागत करती हैं।


संदर्भ के लिए बाइबल के पद

“देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

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Hindi Christian Movie अंश 4 : “मायाजाल को तोड़ दो” – क्या बाइबल में विश्वास करना प्रभु में विश्वास करने के बराबर है?

अधिकांश पादरियों और धार्मिक जगत के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, और यह कि प्रभु में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, और बाइबल में विश्वास करना प्रभु में विश्वास करना है। उनका मानना है कि यदि कोई बाइबल की शिक्षाओं से हटकर कार्य करता है, तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता, और यह कि जब तक कोई बाइबल पर अवलंबित रहता है, तब तक उसे बचाया सकता है और वह स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है। क्या बाइबल वास्तव में प्रभु का प्रतिनिधित्व कर सकती है? बाइबल और प्रभु के बीच क्या संबंध है? प्रभु यीशु ने कहा था, “तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते।” (यूहन्ना 5:39-40)। (© BSI) सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं”आख़िरकार, कौन बड़ा हैः परमेश्वर या बाइबल? परमेश्वर का कार्य बाइबल के अनुसार क्यों होना चहिए? क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर को बाइबल से आगे बढ़ने का कोई अधिकार नहीं है? क्या परमेश्वर बाइबल से दूर नहीं जा सकता है और अन्य काम नहीं कर सकता है? … तुम्हें जानना चाहिए कि पहले कौन आया था, परमेश्वर या बाइबल! सब्त का प्रभु होते हुए, क्या वह बाइबल का भी प्रभु नहीं हो सकता है?” (“वचन देह में प्रकट होता है’’ से )


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बाइबल का सार — ईश्वर के कार्य को जानना-इसे सही से पढ़ना

उद्धारकर्ता सत्य को व्यक्त करने और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को पूरा करने के लिए गुप्त रूप से पहले ही आ गया है

दो हजार साल पहले, प्रभु यीशु ने अपनी वापसी की भविष्यवाणी की थी, और अब प्रभु की वापसी की भविष्यवाणियां मूलतः पूरी हो चुकी हैं। प्रभु यीशु, हमारा बहुप्रतीक्षित उद्धारकर्ता, गुप्त रूप से आ गया है, और वह अंत के दिनों का मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को पूरा किया है, परमेश्वर की छह हजार साल की प्रबंधन योजना के रहस्यों का खुलासा किया है, मानवजाति को शुद्ध करने और बचाने के लिये सभी सत्य व्यक्त किये हैं; उसने हम मनुष्यों के सामने, परमेश्वर के पवित्र और धार्मिक सार के साथ-साथ उसके प्रतापी और क्रोधी स्वभाव को प्रकट किया है जो किसी भी अपराध को सहन नहीं करेगा। उसने मानवजाति को उनके भ्रष्ट स्वभावों से पूरी तरह बचाने, उन्हें शैतान के प्रभाव से मुक्त होने में मदद करने, आपदा से पहले विजेताओं का एक समूह बनाने, और अंत में मानवजाति को उनकी ख़ूबसूरत मंज़िल पर पहुंचाने के लिये ऐसा किया है।

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प्रभु यीशु की वापसी के दो रास्ते हैं

प्रभु की वापसी के बारे में बाइबल की भविष्यवाणियों में सिर्फ़ उसका बादलों पर खुले तौर पर आना ही शामिल नहीं है, बल्कि एक चोर के रूप में गुप्त रूप से आना भी शामिल है। तो फिर, ये दोनों भविष्यवाणियां कैसे पूरी होंगी? अगर हम सिर्फ़ बादलों पर प्रभु के आने की प्रतीक्षा करते हैं, और एक चोर के रूप में उसके आने की भविष्यवाणी को अनदेखा कर देते हैं, तो क्या हम प्रभु के आगमन का स्वागत कर पायेंगे?


संदर्भ के लिए बाइबल के पद

“तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा” (लूका 12:40)।

“देख, मैं चोर के समान आता हूँ ” (प्रकाशितवाक्य 16:15)।

“देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

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Hindi Christian Video अंश 2 : “बाइबल और परमेश्वर” – क्या बाइबल में परमेश्‍वर के सभी कार्य और वचन हैं?

Hindi Christian Video अंश 2 : “बाइबल और परमेश्वर” – क्या बाइबल में परमेश्‍वर के सभी कार्य और वचन हैं?

संपूर्ण धार्मिक संसार विश्वास करता है कि परमेश्‍वर के सभी कार्य और वचन बाइबल में हैं, और बाइबल के अलावा, परमेश्वर ने कोई भी वचन नहीं कहा और कोई कार्य नहीं किया। इसलिए, जब आप बाइबल में श्रद्धा और विश्वास रखते हैं, तब यह सुनिश्चित है कि आप स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने में सफल होंगे। क्या ये सभी विचार परमेश्वर के कार्यों के अनुसार हैं? क्या परमेश्वर ने बाइबल से अलग कुछ भी कहा है? वह कौन-सा मार्ग है जिसके माध्यम से मनुष्य स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है। क्या यह कार्य बाइबल के मार्ग का अनुसरण करना है, या मेमने के पदचिन्हों पर चलना है? यह क्लिप आपके समक्ष सभी उत्तरों को पेश करेगी!



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बाइबल स्टडी – New Understanding of the Bible – Christian Essentials