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मसीह के वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 74

मसीह के वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 74

जब परमेश्वर देहधारी हुआ और मानव जाति के बीच रहने लगा, तो उसने अपनी देह में किस प्रकार के दुख का अनुभव किया? क्या कोई सचमुच में समझ सकता है? कुछ लोग कहते हैं कि परमेश्वर ने बड़ा दुःख सहा, और यद्यपि वह स्वयं परमेश्वर है, लोगों ने उसके सार को नहीं समझा और हमेशा उसके साथ एक मनुष्य के समान व्यवहार किया, जिस से वह दुखित और चोटिल महसूस करता है—वे कहते हैं कि परमेश्वर का दुःख भोग सचमुच बहुत बड़ा था। कुछ अन्य लोग कहते हैं कि परमेश्वर निर्दोष और निष्पाप है, परन्तु उसने मनुष्य के समान दुःख उठाया और मनुष्य के साथ साथ सताव, निंदा, और अपमान सहता है; वे कहते हैं कि वह अपने अनुयायियों की ग़लतफहमियों और अनाज्ञाकारिता को भी सहता है—परमेश्वर के दुःख भोग को सचमुच में नापा नहीं जा सकता है। ऐसा दिखाई देता है कि तुम लोग सचमुच में परमेश्वर को नहीं समझते हो। पढना जारी रखे

2020 Hindi Christian Song | परमेश्वर के वचनों के प्रति कैसा दृष्टिकोण अपनायें

सुनिए एक साथ परमेश्वर के भजन

2020 Hindi Christian Song| परमेश्वर के वचनों के प्रति कैसा दृष्टिकोण अपनायें

मैंने दी हैं तुम सबको कई चेतावनी।
दिये सत्य ताकि जीत सकूँ तुम्हें।
न शक करो, न छोड़ो मेरे वचनों को;
यह मुझे बर्दाश्त नहीं।

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Hindi Christian Movie अंश 1 : “विजय गान” – अपने पुनरागमन पर प्रभु कैसे प्रकट होंगे और वे अपना कार्य कैसे करेंगे?

बाइबिल के उपदेश: “लेकिन उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता” के रहस्य का खुलासा

Hindi Christian Film अंश 1 : “विजय गान” – अपने पुनरागमन पर प्रभु कैसे प्रकट होंगे और वे अपना कार्य कैसे करेंगे?

अंत के दिनों में भीषण आपदा के अपशकुन–चार रक्तिम चंद्रमा प्रकट हो चुके हैं और आसमान में सितारों ने एक अजीब रूप ले लिया है; भीषण आपदायें करीब आ रही हैं, और प्रभु में विश्वास करने वाले कई लोगों को यह अनुभव होने लगा था कि प्रभु का दूसरा आगमन होने वाला है या उनका आगमन पहले ही हो चुका है। पढना जारी रखे

Hindi Christian Film अंश 1 : “बेड़ियों को तोड़ो और भागो” – बेड़ियों को तोड़ डालो और सच्चे मार्ग का अध्ययन करो

Hindi Christian Film अंश 1 : “बेड़ियों को तोड़ो और भागो” – बेड़ियों को तोड़ डालो और सच्चे मार्ग का अध्ययन करो

धार्मिक पादरियों की बातों पर आँखें मूंदकर विश्वास करने के कारण, एल्डर ली ने महसूस किया कि परमेश्वर के सभी कार्य और वचन बाइबल में दर्ज थे और बाइबल के बाहर जो कुछ भी है वे परमेश्वर के कार्य और वचन नहीं हो सकते। पढना जारी रखे

सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय केवल परमेश्वर की वाणी को ही सुनें—आपको शैतान की अफ़वाहों और झूठों को नहीं सुनना चाहिए

02सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय शैतान की अफ़वाहों और झूठों पर विश्वास करने का परिणाम

सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करने में सबसे महत्वपूर्ण बात केवल परमेश्वर की वाणी को सुनना और शैतान की अफवाहों और झूठों को पूरी तरह से अनसुना करना है; सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है, इसका हमारे परिणाम और अंतिम मंजिल पर सीधा असर पड़ता है। अगर लोग केवल सीसीपी सरकार के साथ-साथ पादरियों और एल्डर की अफ़वाहों और झूठों को सुनते रहें और उन बातों को न सुनें जो कि आत्मा कलीसियाओं से कहता है, तो फ़िर उनका क्या होगा?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद

“मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्‍ट हो गई” (होशे 4:6)।

“परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने के कारण मर जाते हैं” (नीतिवचन 10:21)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन

प्रभु यीशु मसीह का स्वागत कैसे करें
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परमेश्वर के भजन | परमेश्वर के प्रकटन की महत्ता (Lyrics)

परमेश्वर के भजन | परमेश्वर के प्रकटन की महत्ता (Lyrics)

परमेश्वर के प्रकटन के मायने हैं,
अपने काम की ख़ातिर धरती पर उसका निजी आगमन।
वो अपनी पहचान, अपने स्वभाव, अपने तरीके से,
युग शुरु करने, युग का अंत करने, इंसानों के बीच आता है।
ऐसा प्रकटन न प्रतीक है, न तस्वीर है।
ये रस्म का रूप नहीं।
ये चमत्कार नहीं, ये भव्य दर्शन नहीं।
ये धार्मिक रीति तो बिल्कुल नहीं।
ये हकीकत है, सच्चाई है जिसे छुआ और देखा जा सकता है,
ये हकीकत है, सच्चाई है जिसे छुआ और देखा जा सकता है,
ऐसा सच जिसे छुआ और देखा जा सकता है।
ऐसा प्रकटन किसी व्यवस्था के पालन के लिए नहीं है,
न ही ये थोड़े वक्त का वचन है;
बल्कि ये परमेश्वर की प्रबंधन योजना में, काम के चरण के लिए है,
काम के चरण के लिए है।

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सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय केवल परमेश्वर की वाणी को ही सुनें—आपको शैतान की अफ़वाहों और झूठों को नहीं सुनना चाहिए

01सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करते समय सबसे आसानी से हो सकने वाली गलती

क्या आप जानते हैं कि क्यों शैतान हव्वा को धोखा देने और उसके ऊपर से परमेश्वर का आशीष हटाने में कामयाब हो पाया? क्या आप जानते हैं कि क्यों आम यहूदी लोग प्रभु का विरोध करने के लिए फ़रीसियों के साथ मिल गये और इस तरह प्रभु के उद्धार को गँवा बैठे? इसका मुख्य कारण यह था कि उन्होंने परमेश्वर के वचनों को नहीं सुना, बल्कि केवल शैतान की अफ़वाहों और झूठ को सुनते रहे। प्रभु काफ़ी समय पहले लौट आया है : वह सत्य को व्यक्त करता है और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य करता है, बहुत से लोग आज उसी ग़लती को दोहरा रहे हैं जो हव्वा और आम यहूदी लोगों ने की थी। वे धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डर की उन भ्रांतियों और झूठों पर आँखें बंद करके विश्वास कर लेते हैं, जो प्रभु के वचनों के विरुद्ध होते हैं, जैसे कि “ऐसा कोई भी उपदेश जो कहता है कि परमेश्वर ने देहधारण किया है, गलत है।” वे यह सुनना ही नहीं चाहते कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है, जैसा कि अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किया गया है। क्या ऐसे संभ्रमित, अविवेकी लोग प्रभु के आगमन पर उसका स्वागत कर सकते हैं?

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अब मुझे बाइबल और परमेश्वर के बीच का रिश्ता समझ आ गया है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “बहुत सालों से, लोगों के विश्वास का परम्परागत माध्यम (दुनिया के तीन मुख्य धर्मों में से एक, मसीहियत के विषय में) बाइबल पढ़ना ही रहा है; बाइबल से दूर जाना प्रभु में विश्वास नहीं है, बाइबल से दूर जाना एक पाषंड और विधर्म है, और यहाँ तक कि जब लोग अन्य पुस्तकों को पढ़ते हैं, तो इन पुस्तकों की बुनियाद, बाइबल की व्याख्या ही होनी चाहिए। कहने का अर्थ है कि, यदि तुम प्रभु में विश्वास करते हो, तो तुम्हें बाइबल अवश्य पढ़नी चाहिए, बाइबल के अलावा तुम्हें किसी अन्य पुस्तक की आराधना नहीं करनी चाहिए जिस में बाइबल शामिल नहीं हो। यदि तुम करते हो, तो तुम परमेश्वर के साथ विश्वासघात कर रहे हो। उस समय से जब बाइबल थी, प्रभु के प्रति लोगों का विश्वास, बाइबल के प्रति विश्वास रहा है। यह कहने के बजाए कि लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, यह कहना बेहतर है कि वे बाइबल में विश्वास करते हैं; यह कहने की अपेक्षा की उन्होंने बाइबल पढ़नी आरम्भ कर दी है, यह कहना बेहतर है कि उन्होंने बाइबल पर विश्वास करना आरम्भ कर दिया है; और यह कहने की अपेक्षा कि वे प्रभु के सामने वापस आ गए हैं, यह कहना बेहतर होगा कि वे बाइबल के सामने वापस आ गए हैं। इस तरह से, लोग बाइबल की आराधना ऐसे करते हैं मानो कि यह परमेश्वर है, मानो कि यह उनका जीवन रक्त है और इसे खोना अपने जीवन को खोने के समान होगा। लोग बाइबल को परमेश्वर के समान ही ऊँचा देखते हैं, और यहाँ तक कुछ ऐसे भी हैं जो इसे परमेश्वर से भी ऊँचा देखते हैं। यदि लोग पवित्र आत्मा के कार्य के बिना हैं, यदि वे परमेश्वर का एहसास नहीं कर सकते हैं, तो वे जीवन जीते रह सकते हैं— परंतु जैसे ही वे बाइबल को खो देते हैं, या बाइबल के प्रसिद्ध अध्यायों और कथनों को खो देते हैं, तो यह ऐसा है मानो उन्होंने अपना जीवन खो दिया हो। … बाइबल लोगों के मनों में एक आदर्श बन चुकी है, यह उनके मस्तिष्कों में एक पहेली बन चुकी है, वे मात्र यह विश्वास करने में असमर्थ हैं कि परमेश्वर बाइबल से अलग भी काम कर सकता है, वे यह विश्वास करने में बिल्कुल असमर्थ हैं कि लोग बाइबल के बाहर भी परमेश्वर को पा सकते हैं, और वे यह बिलकुल भी विश्वास करने में सक्षम नहीं हैं कि परमेश्वर अंतिम कार्य के दौरान बाइबल से दूर जा सकता है और एक नए सिरे से शुरू कर सकता है। पढना जारी रखे

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 81

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 81

अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है

(लूका 24:30-32) जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उनकी आँखों से छिप गया। उन्होंने आपस में कहा, “जब वह मार्ग में हम से बातें करता था और पवित्रशा स्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हुई?”

चेलों ने यीशु को खाने के लिए भूनी हुई मछली दी

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अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य और महत्व

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

“परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा कि जगत पर दण्ड की आज्ञा दे, परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए” (यूहन्ना 3:17)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

यीशु अनुग्रह के युग के समस्त कार्य का प्रतिनिधित्व करता है; वह देहधारी हुआ और उसे सलीब पर चढ़ाया गया, और उसने अनुग्रह के युग का आरम्भ भी किया। छुटकारे के कार्य को पूरा करने, व्यवस्था के युग का अंत करने और अनुग्रह के युग का आरम्भ करने के लिए उसे सलीब पर चढ़ाया गया था, और इसलिए उसे “सर्वोच्च सेनापति,” “पाप बलि,” और “छुटकारा दिलाने वाला” कहा गया। इस प्रकार यीशु के कार्य की विषय सूची यहोवा के कार्य से अलग थी, यद्यपि वे सैद्धान्तिक रूप से एक ही थे। यहोवा ने व्यवस्था का युग आरम्भ किया, गृह आधार स्थापित किया, अर्थात्, पृथ्वी पर अपने कार्य का उद्गम स्थल, और व्यवस्थाओं व आज्ञाओं को जारी किया; ये उसकी ऐसी दो उपलब्धियां थीं, जो व्यवस्था के युग का प्रतिनिधित्व करती हैं। जिस कार्य को यीशु ने अनुग्रह के युग में किया, वह व्यवस्थाओं को जारी करना नहीं था बल्कि आज्ञाओं को पूरा करना था, परिणामस्वरूप अनुग्रह के युग का सूत्रपात करना और व्यवस्था के युग को समाप्त करना था जो दो हज़ार सालों तक रहा था। वह अग्रणी था, जो अनुग्रह के युग को शुरू करने के लिए आया, उसके कार्य का मुख्य भाग छुटकारे में रहता है। इसलिए उसकी उपलब्धियाँ भी दोगुनी थीं: एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करना, और अपने सलीब पर चढ़ने के माध्यम से छुटकारे के कार्य को पूरा करना। तब वह चला गया। उसके बाद से व्यवस्था का युग समाप्त हो गया और अनुग्रह का युग शुरू हो गया।

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