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परमेश्वर के साथ सामान्य रिश्ता कैसे स्थापित करें | Christian devotional song in hindi

परमेश्वर के साथ सामान्य रिश्ता कैसे स्थापित करें | Christian devotional song in hindi


परमेश्वर से सामान्य रिश्ते की
शुरुआत होती है परमेश्वर के सामने अपना दिल करके शांत।
अगर तुम्हें समझ न आए परमेश्वर की इच्छा,
तो भी पूरे करो उसके प्रति अपने कर्तव्य।
परमेश्वर की इच्छा प्रकट होने और अभ्यास में लाने के लिए
इंतज़ार करने में बहुत देर नहीं हुई।
जब परमेश्वर से तुम्हारा रिश्ता होगा सही,
तो अपने आस-पास के लोगों के साथ भी रिश्ता होगा सही।
परमेश्वर से सामान्य रिश्ता होता है संदेह से मुक्त,
परमेश्वर के कार्य का करता है पालन।
सही इरादों के साथ आओ सिंहासन के सामने,
ख़ुद को रख दो अलग।
परमेश्वर की खोज करो स्वीकार, परमेश्वर के सामने हो समर्पित,
उसके परिवार के हितों को रखो आगे।
अगर तुम करते हो ऐसे अभ्यास,
तो परमेश्वर से तुम्हारा रिश्ता होगा सामान्य।
ओह, सामान्य। ओह, सामान्य।

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एक ईसाई की आपबीती : रोजगार की तलाश का एक अनूठा अनुभव

“हेलो, क्या मैं जान सकती हूँ कि क्या इस समय आपके रेस्तरां को किसी स्टाफ की जरूरत है?”

“क्या आप कोई विदेशी भाषा बोल सकती हैं? क्या आपको काम का कोई अनुभव है?”

“नहीं, सॉरी, मैं कोई विदेशी भाषा नहीं बोल पाती, और मुझे काम का कोई अनुभव भी नहीं है।”

“अगर ऐसी बात है तो आय एम सॉरी, हम फिलहाल कुशल कर्मचारी चाहते हैं, नौसिखिए नहीं।”

टेलीफोन पर बात खत्म होते ही मेरे दिमाग में खलबली-सी मच गई, “हे प्रभु, यह नौकरी के लिए आज मेरी तीसरी कॉल है। अगर काम नहीं मिला तो मैं इस महीने का किराया नहीं दे पाऊँगी।”

एक ईसाई की आपबीती : रोजगार की तलाश का एक अनूठा अनुभव
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सुसमाचार-सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

तुम यह गवाही देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सत्य को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो।

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है | Hindi Christian Song With Lyrics

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है | Hindi praise song

प्रकट कर दिया है अपना महिमामय देह,
सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सम्मुख सबके
हो चुका है प्रकट उसका पवित्र देह;
स्वयं परमेश्वर है वो: पूर्ण सच्चा परमेश्वर है वो।
जगत बदला है पूरा तो बदला है देह भी।
परमेश्वर का व्यक्तित्व है रूपांतरण उसका,
स्वर्ण मुकुट सिर पर उसके।
सफ़ेद लबादा तन पर, स्वर्ण बंध वक्ष पर उसके।
हर चीज़ जगत की है चरण-पीठ उसकी, आँखें अग्नि-लौ की मानिंद उसकी,
दुधारी तलवार मुख में, दाएं हाथ में सप्त-तारे।
राज्य-पथ असीम और प्रकाशमान,
उदित होकर जगमगाती महिमा परमेश्वर की।
पर्वत जयजयकार करें, जल ख़ुशियाँ मनाएँ;
सूरज, चाँद-सितारे घूमें अपनी व्यवस्था में,
करें अगवानी एक सच्चे परमेश्वर की,
पूरी की जिसने प्रबंधन योजना छ: हज़ार वर्षों की, लौटा है जीतकर!

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तुम्हें जानना चाहिए परमेश्वर को उसके कार्य द्वारा | हिंदी मसीही गीत

तुम्हें जानना चाहिए परमेश्वर को उसके कार्य द्वारा | हिंदी मसीही गीत

परमेश्वर देहधारी हुआ, आम इन्सान बना।
इस इंसां ने परमेश्वर के कार्य,
आदेश को स्वयं पर लिया।
उसे ऐसा काम करना था,
ऐसी पीड़ा सहनी थी
जो सह नहीं सकता आम इन्सा कोई।
उसकी पीड़ा दिखाती है इन्सा के लिए परमेश्वर की निष्ठा।
इन्सान को बचाने,
उसे पाप से छुड़ाने,
इस चरण को पूरा करने की कीमत का,
उसने जो सहा अपमान उसका यह प्रतीक है।
इसके मायने हैं कि परमेश्वर क्रूस पर से इन्सान को छुड़ाएगा।

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अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य

प्रश्न: व्यवस्था के युग का कार्य करने के लिए परमेश्वर ने मूसा का उपयोग किया, तो अंतिम दिनों में परमेश्वर अपने न्याय के कार्य को करने के लिए लोगों का इस्तेमाल क्यों नहीं करता है, बल्कि इस कार्य को उसे खुद करने के लिए देह बनने की ज़रूरत क्यों है? और देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर जिन लोगों का उपयोग करते हैं, उनमें क्या ख़ास अंतर है?

उत्तर:

ऐसा क्यों है कि परमेश्वर को अंत के दिनों में न्याय का कार्य करने के लिए देहधारण करने की ज़रूरत है, जिनको सत्‍य को जानने की तीव्र अभिलाषा है और जो परमेश्वर के प्रकटन की खोज करना चाहते हैं, उनको इस प्रश्‍न में अत्‍यधिक दिलचस्‍पी है। यह एक ऐसा सवाल भी है जिसका संबंध इस बात से है कि हमें स्वर्ग के राज्य में आरोहित किया जा सकता है या नहीं। इसलिए, सत्‍य के इस पहलू को समझना बहुत ज़रूरी है। ऐसा क्यों है कि परमेश्वर को अंत के दिनों में अपने न्याय के कार्य के लिए स्वयं देहधारण करना होगा, बजाय इसके कि वे अपना कार्य करने के लिए मनुष्य को इस्तेमाल करें? यह न्याय के कार्य के स्वभाव से तय होता है। क्योंकि न्याय का कार्य परमेश्वर द्वारा सत्‍य की अभिव्यक्ति है और यह मानवजाति को जीतने, शुद्ध करने और बचाने के लिए उनका जो धार्मिक स्वभाव है उसकी अभिव्यक्ति है। आइये सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के कुछ अंश पढ़ें।

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Hindi Christian Video | दिखावा, अब और नहीं

Hindi Christian Video | दिखावा, अब और नहीं

मोवेन कलीसिया में एक सुसमाचार उपयाजक है। अपने भाई-बहनों के काम में कुछ समस्याएँ सुलझा देने और अपने काम में कुछ हासिल कर लेने के कारण वह खुद को बाकी सभी लोगों से बेहतर समझने लगता है। वह अपनी हर बात और हर काम में, अपने गुणों और काबिलियत की शेखी बघारता है, और दिखावा करता है कि अपने कर्तव्य के लिए वह किस तरह कष्ट झेलता है। पढना जारी रखे

Christian Devotional Song in Hindi | इंसान ने ईश्वर को अपना दिल नहीं दिया है (Lyrics)

Christian Devotional Song in Hindi | इंसान ने ईश्वर को अपना दिल नहीं दिया है (Lyrics)

भले ही ईश्वर को अपने दिल मेंझाँकने देता हो इंसान,
इसके मायने नहीं कि ईश-व्यवस्था कापालन करता इंसान,
या अपनी नियति, अपना सब-कुछ
किया ईश्वर के हवाले इंसान ने।
ईश्वर के आगे तुम कोई भी शपथ लो,
कुछ भी ऐलान करो,
ईश्वर की नज़र में तुम्हारा दिलअभी भी बंद है उसके लिए,
क्योंकि तुम इस पर काबूकरने नहीं देते उसे।

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परमेश्वर का कार्य सदा नया होता है कभी पुराना नहीं होता | Hindi Christian Song With Lyrics

परमेश्वर का कार्य सदा नया होता है कभी पुराना नहीं होता | Hindi Christian Song With Lyrics

अनुग्रह के युग में पीछे रह गया था
यहोवा का काम, कहा था यीशु ने कभी।
उसी तरह पीछे रह गया है यीशु का काम
है आज मेरा यही बयान।
सिर्फ़ व्यवस्था का युग होता,
अगर अनुग्रह का युग न होता,
तो यीशु को सूली पर न चढ़ाया गया होता,
और उसने इंसान को छुटकारा न दिलाया होता।

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परमेश्वर के नामों के रहस्य को समझकर, मैं मेमने के पदचिह्नों पर चल पाती हूँ

लेखिका मु झेन, ताइवान

जब मैं छोटी थी, मैं एक तेज़ और समझदार बच्ची थी और इसलिए मुझे हमेशा मेरे माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों का भरपूर प्यार मिलता था। क्योंकि स्कूल में हमेशा मुझे अच्छे ग्रेड आते थे, मैं विनम्र और मिलनसार थी, इसलिये शिक्षक और सहपाठी मुझे काफ़ी पसंद करते थे। उस दौरान, मैं भविष्य के प्रति उम्मीदों से भरपूर थी। हालांकि, जब हाई स्कूल के टेस्ट का समय आया तो मैं हैरान रह गई, मैं सबसे अच्छी लड़कियों के स्कूल के लिये क्वालीफ़ाई करने से सिर्फ़ आधे पॉइंट से चूक गई थी, तब मुझे इसके बजाय दूसरी श्रेणी के स्कूल में दाखिला मिला। जो कुछ हुआ था, मैं उसे स्वीकार नहीं कर पाई थी और मैंने दो दिनों तक अपने आपको एक कमरे में बंद कर लिया था, मैंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। यह पहला अवसर था जब मैंने अपने जीवन में नाकामी का सामना किया था—मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि मैं रसातल में गिर गई थी, मैं पीड़ा और संताप से भर गई थी।

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