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बहुत-से लोग यह मानते हैं कि मनुष्य द्वारा लिखे जाने के बावजूद बाइबल के सभी वचन पवित्र आत्मा से आये हैं और वे परमेश्वर के वचन हैं। क्या यह सही है?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

आज, लोग यह विश्वास करते हैं कि बाइबल परमेश्वर है, और परमेश्वर बाइबल है। इस प्रकार वे यह भी विश्वास करते हैं कि बाइबल के सारे वचन सिर्फ वे वचन हैं जिन्हें परमेश्वर ने कहा था, और उन सभी को परमेश्वर के द्वारा बोला गया था। वे जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं वे यह भी मानते हैं कि यद्यपि पुराने और नए नियम की छियासठ पुस्तकों को लोगों के द्वारा लिखा गया था, फिर भी उन सभी को परमेश्वर की अभिप्रेरणा के द्वारा दिया गया था, और वे पवित्र आत्मा के कथनों के लिखित दस्तावेज़ हैं। यह लोगों का त्रुटिपूर्ण अनुवाद है, और यह तथ्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाता है। वास्तव में, भविष्यवाणियों की पुस्तकों को छोड़कर, पुराने नियम का अधिकांश भाग ऐतिहासिक अभिलेख है। नए नियम के कुछ धर्मपत्र लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों से आए हैं, और कुछ पवित्र आत्मा के प्रकाशन से आए हैं; उदाहरण के लिए, पौलुस के धर्मपत्र एक मनुष्य के कार्य से उदय हुए थे, वे सभी पवित्र आत्मा के प्रकाशन के परिणामस्वरूप थे, और वे कलीसिया के लिए लिखे गए थे, और वे कलीसिया के भाइयों एवं बहनों के लिए प्रोत्साहन और उत्साह के वचन हैं। पढना जारी रखे

परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 272

परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 272

आज लोग यह विश्वास करते हैं कि बाइबल परमेश्वर है और परमेश्वर बाइबल है। इसलिए वे यह भी विश्वास करते हैं कि बाइबल के सारे वचन ही वे वचन हैं, जिन्हें परमेश्वर ने बोला था, और कि वे सब परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन थे। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, वे यह भी मानते हैं कि यद्यपि पुराने और नए नियम की सभी छियासठ पुस्तकें लोगों द्वारा लिखी गई थीं, फिर भी वे सभी परमेश्वर की अभिप्रेरणा द्वारा दी गई थीं, और वे पवित्र आत्मा के कथनों के अभिलेख हैं। पढना जारी रखे

परमेश्वर का वचन वीडियो | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 271

परमेश्वर का वचन वीडियो | “बाइबल के विषय में (3)” | अंश 271

बाइबल में हर चीज़ परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों का अभिलेख नहीं है। बाइबल बस परमेश्वर के कार्य के पिछले दो चरण दर्ज करती है, जिनमें से एक भाग नबियों की भविष्यवाणियों का अभिलेख है, और दूसरा भाग युगों-युगों में परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए गए लोगों द्वारा लिखे गए अनुभवों और ज्ञान का अभिलेख है। मनुष्य के अनुभव उसके मतों और ज्ञान से दूषित हैं, जो एक अपरिहार्य चीज़ है। बाइबल की कई पुस्तकों में मनुष्य की धारणाएँ, पूर्वाग्रह और बेतुकी समझ शामिल हैं। बेशक, अधिकतर वचन पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और रोशनी का परिणाम हैं और वे सही समझ हैं—फिर भी अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वे पूरी तरह से सत्य की सटीक अभिव्यक्ति हैं। कुछ चीज़ों पर उनके विचार व्यक्तिगत अनुभव से प्राप्त ज्ञान या पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता से बढ़कर कुछ नहीं हैं। नबियों के पूर्वकथन परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से निर्देशित किए गए थे : यशायाह, दानिय्येल, एज्रा, यिर्मयाह और यहेजकेल जैसों की भविष्यवाणियाँ पवित्र आत्मा के सीधे निर्देशन से आई थीं; ये लोग द्रष्टा थे, उन्होंने भविष्यवाणी के आत्मा को प्राप्त किया था, और वे सभी पुराने नियम के नबी थे। पढना जारी रखे

परमेश्वर के दैनिक वचन | “पतरस ने यीशु को कैसे जाना” | अंश 520

परमेश्वर के दैनिक वचन | “पतरस ने यीशु को कैसे जाना” | अंश 520

यीशु का अनुसरण करने के अपने समय के दौरान, उसके बारे में पतरस के कई अभिमत थे और वह अपने परिप्रेक्ष्य से आँकलन करता था। यद्यपि पवित्रात्मा के बारे में उसकी एक निश्चित अंश में समझ थी, तब भी पतरस बहुत प्रबुद्ध नहीं था, इसलिए वह अपनी बातों में कहता हैः “मुझे उसका अवश्य अनुसरण करना चाहिए जिसे स्वर्गिक पिता द्वारा भेजा जाता है। मुझे उसे अवश्य अभिस्वीकृत करना चाहिए जो पवित्र आत्मा के द्वारा चुना जाता है। मैं तेरा अनुसरण करूँगा।” उसने यीशु के द्वारा की गई चीज़ों को नहीं समझा और कोई प्रबुद्धता प्राप्त नहीं की। कुछ समय तक उसका अनुसरण करने के बाद उसकी उन चीज़ों में जो उसने की और कही, और स्वयं यीशु में रुचि बढ़ी। पढना जारी रखे

अपने दिल से सुनने के बाद, मैंने प्रभु की वापसी का स्वागत किया है

मैक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका

1994 में, मेरा जन्म संयुक्त राज्य में हुआ था। मेरे माता-पिता दोनों चीनी थे। मेरी मां एक सफल कामकाजी महिला का विशिष्ट उदाहरण थी। वह अपने बारे में सोचने में सक्षम है और काफी निपुण है। मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं। जब मैं दूसरी कक्षा में था, तो मेरे माता-पिता मुझे अध्ययन करने के लिए चीन वापस ले गए ताकि मैं चीनी सीख सकूं। इसी दौरान मैंने प्रभु यीशु से परिचित होना शुरू किया था। मुझे याद है कि 2004 में एक दिन, जब मैं विद्यालय से घर पहुंचा, तो मेरे घर में कुछ मेहमान थे। मेरी मां ने उनसे मेरा परिचय कराया और मुझे बताया कि वह संयुक्त राज्य से आए एक पादरी हैं। मैं काफी खुश था क्योंकि तभी मुझे पता चला था कि मेरी मां कुछ समय से प्रभु यीशु में विश्वास कर रही थी। पहले, वह नहीं करती थी। हर चीनी नव वर्ष में, वे अगरबत्ती जलाया करती थी और बुद्ध की पूजा किया करती थी। हालांकि, जब से मेरी मां ने प्रभु यीशु में विश्वास करना शुरू किया था, तब से मुझे जलती अगरबत्ती की खुशबू नहीं आई थी। उस दिन, उस अमेरिकी पादरी ने मुझे प्रभु यीशु के बारे में एक कहानी सुनाई। कुछ समय बाद, मुझे बाथरूम में ले जाया गया और इससे पहले कि मैं कुछ प्रतिक्रिया दे पाता, ‘अचानक ही’ उस पादरी ने मेरा सिर बाथटब में डाल दिया और कुछ पल के बाद, मेरे सिर को बाहर निकाल लिया। मुझे बस मेरी मां और उस पादरी की बातें सुनाई दे रही थी, “परमेश्वर के अनुग्रह में तुम्हारा स्वागत है। हम सभी खोई हुई भेड़े हैं।” इस प्रकार से, इससे पहले कि मैं इसे जान पाता, मैंने एक नई जीवन यात्रा की शुरुआत की। चूंकि परमेश्वर मेरे साथ था, इसलिए मेरा दिल बहुत खुश था। उसके बाद, प्रत्येक रविवार, मैं पूजा करने, पादरी से बाइबल की कहानियाँ सुनने और ग्रंथों से कथन पढ़ने के लिए कलीसिया जाया करता था। मैं पूरी तरह से खुश था। मेरा दिल स्थिर था और मैं मानता था कि प्रभु यीशु में विश्वास करना वाकई अच्छी बात है।

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अटूट आस्था

मेंग योंग, चीन

मैं स्वभाव से ही एक ईमानदार आदमी हूँ और यही कारण है कि मैं हमेशा दूसरे लोगों द्वारा सताया गया हूँ। इस वजह से मैंने लोगों की इस दुनिया मेँ उदासीनता का अनुभव किया और मुझे लगा कि यह जीवन निस्सार और निरर्थक है। लेकिन जब से मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर मेँ विश्वास करना शुरू किया, उनके वचनों के अध्ययन और कलीसिया मेँ जीवन जीने के बाद, मेरे दिल ने एक ऐसी गंभीरता और सुख-चैन का अनुभव किया, जैसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। यह देखकर कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई बहन, परिवार के सदस्यों की तरह, एक दूसरे को परस्पर स्नेह कर रहे हैं, मुझे यह आभास हुआ कि सिर्फ परमेश्वर ही धर्मी हैं और सिर्फ परमेश्वर की कलीसिया ही वह स्थान है जहां आलोक है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्यों को अनेक वर्षों तक अनुभव करने के बाद मुझे इस रहस्य का पता चल गया था कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों मेँ वह शक्ति है जो मनुष्य को वाकई बदल सकती है और उसकी रक्षा कर सकती है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्यार हैं और वही उद्धार हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग परमेश्वर के प्यार का आनंद ले सकें और उद्धार प्राप्त कर सकें, मेरे भाई, बहन और मैं, सुसमाचार के प्रचार-प्रसार के लिए पूरे मनोयोग से काम कर रहे थे, लेकिन हमें यह किंचित पता नहीं था कि हमें कम्युनिस्ट पार्टी बंदी बनाएगी और यातनाएँ देगी।

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ईसाई आत्मिक जीवन के लिए 3 सिद्धांत

सूचीपत्र

  1. भक्ति के समय अपना ध्‍यान परमेश्‍वर के समक्ष अपने आप को शांत करने पर केंद्रित करें
  2. भक्ति में परमेश्‍वर के वचनों का मनन करने पर ध्यान केंद्रित करें
  3. अपनी भक्ति में व्यवहारिक समस्याओं और कठिनाइयों पर विचार करें

क्या आपने कभी इस उलझन का सामना किया है कि भक्ति और प्रार्थना के बावजूद भी, कुछ ज्यादा हासिल नहीं हो रहा है या प्रेरणा का अनुभव नहीं हो रहा है? ऐसा क्यों है? हमें अपनी दैनिकभक्ति से फल कैसे प्राप्‍त हो सकता है? निम्‍नांकित अभ्यास के तीन सिद्धांतों का पालन करके, हम अपना आत्मिक जीवन से प्राप्त होने वाले फलों में सुधार ला सकते हैं और इससे जीवन में हम तेजी से विकसित होंगे।

1. भक्ति के समय अपना ध्‍यान परमेश्‍वर के समक्ष अपने आप को शांत करने पर केंद्रित करें

भक्ति का सही नजरिया हमारे आत्मिक जीवन की सफलता के लिए आवश्यक है। सबसे पहले, हमें परमेश्‍वर के सामने अपने आपको शांतचित्‍त करना चाहिए। जितना ज्‍़यादा हम ऐसा करेंगे, उतना ही पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और रोशनी आसानी से मिलेगी। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो परमेश्वर के वचनों को पढ़ते समय हमारे मन में काम, स्कूल और परिवार जैसी बाते आती हैं। ऐसे में हम बस खानापूर्ति करते हैं और अपनी भक्ति में बस परमेश्‍वर का मान-मनुहार करने का प्रयास करते हैं क्योंकि हम तन-मन से परमेश्‍वर की भक्ति करने और प्रार्थनापूर्वक उसके वचनों को पढ़ने पर ध्यान नहीं केंद्रित करते हैं। इस कारण कोई संभावना नहीं रह जाती है कि हमें पवित्र आत्मा द्वारा कोई प्रबुद्धता मिलेगी, भले ही हम परमेश्वर के वचनों का शाब्दिक अर्थ समझने सक्षम क्यों न हों।

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Hindi Christian Song | “परमेश्वर का न्याय है प्यार” (Lyrics)

Hindi Christian Song | “परमेश्वर का न्याय है प्यार” (Lyrics)


क्या गवाही देता है अंत में इंसान?
परमेश्वर धार्मिक है, गवाही देता है इंसान,
क्रोध है, ताड़ना है, न्याय है परमेश्वर।
इंसान गवाही देता है, धार्मिक है परमेश्वर।
इंसान को पूर्ण बनाने की ख़ातिर, न्याय का प्रयोग करता है परमेश्वर।
इंसान को प्रेम करता, बचाता आ रहा है परमेश्वर।
कितना कुछ निहित है मगर उसके प्यार में?
न्याय है, प्रताप है, बद्दुआ है, क्रोध है उसके प्यार में।
श्राप देता है तुम्हें परमेश्वर, ताकि उसे प्रेम कर सको तुम,
और जानो देह के सार-तत्वों को तुम।
ताड़ना देता है तुम्हें परमेश्वर, ताकि जागो तुम,
और अपनी नाकाबिलियत को जानो तुम।
इसलिये परमेश्वर का न्याय, प्रताप, श्राप,
जो धार्मिकता दिखाता है वो तुम्हारे भीतर,
ये सब करता है तुम्हें पूर्ण बनाने के लिये परमेश्वर।
यही प्रेम परमेश्वर का, पाया जाता है तुम्हारे भीतर।

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 286

आज का वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 286

फरीसियों ने यीशु का विरोध क्यों किया, क्या तुम लोग उसका कारण जानना चाहते हो? क्या तुम फरीसियों के सार को जानना चाहते हो? वे मसीहा के बारे में कल्पनाओं से भरे हुए थे। इससे ज्यादा और क्या, उन्होंने केवल इस बात पर विश्वास किया कि मसीहा आएगा, मगर जीवन के इस सत्य की खोज नहीं की। और इसलिए, वे आज भी मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं, क्यों उन्हें जीवन के मार्ग के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है, और नहीं जानते कि सत्य का मार्ग क्या है? तुम लोग कैसे कहते हो कि ऐसे मूर्ख, हठधर्मी और अज्ञानी लोग परमेश्वर के आशीष प्राप्त करेंगे? वे मसीहा को कैसे देख सकते हैं? वे यीशु का विरोध करते थे क्योंकि वे पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा को नहीं जानते थे, क्योंकि वे यीशु के द्धारा कहे गए सत्य के मार्ग को नहीं जानते थे, और, ऊपर से, क्योंकि उन्होंने मसीहा को नहीं समझा था। पढना जारी रखे

मसीह के वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265

मसीह के वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265

बहुत सालों से, लोगों के विश्वास का परम्परागत माध्यम (दुनिया के तीन मुख्य धर्मों में से एक, मसीहियत के विषय में) बाइबल पढ़ना ही रहा है; बाइबल से दूर जाना प्रभु में विश्वास नहीं है, बाइबल से दूर जाना एक दुष्ट पंथ और विधर्म है, और यहाँ तक कि जब लोग अन्य पुस्तकों को पढ़ते हैं, तो इन पुस्तकों की बुनियाद, बाइबल की व्याख्या ही होनी चाहिए। कहने का अर्थ है कि, यदि तुम कहते हो कि तुम प्रभु में विश्वास करते हो, तो तुम्हें बाइबल अवश्य पढ़नी चाहिए, तुम्हें बाइबल खानी और पीनी चाहिए, बाइबल के अलावा तुम्हें किसी अन्य पुस्तक की आराधना नहीं करनी चाहिए जिस में बाइबल शामिल नहीं हो। पढना जारी रखे