Author Archives: studyingeasternlightning

बहुत-से लोग मानते हैं कि परमेश्वर में विश्वास करने का अर्थ बाइबल से कभी भी भटकना नहीं है, और बाइबल से भटकने का अर्थ परमेश्वर को धोखा देना है। क्या यह नज़रिया सही है?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

यहूदी फरीसी यीशु को दोषी ठहराने के लिए मूसा की व्यवस्था का उपयोग करते थे। उन्होंने उस समय के यीशु के अनुकूल होने की खोज नहीं की, बल्कि नियम का अक्षरशः पालन कर्मठतापूर्वक किया, इस हद तक किया कि अंततः उन्होंने निर्दोष यीशु को, पुराने नियम की व्यवस्था का पालन न करने और मसीहा न होने का आरोप लगाते हुए, क्रूस पर चढ़ा दिया। उनका सारतत्व क्या था? क्या यह ऐसा नहीं था कि उन्होंने सत्य के अनुकूल होने के मार्ग की खोज नहीं की? उनमें पवित्रशास्त्र के हर एक वचन का जुनून सवार हो गया था, जबकि मेरी इच्छा और मेरे कार्य के चरणों और कार्य की विधियों पर कोई भी ध्यान नहीं दिया। ये वे लोग नहीं थे जो सत्य को खोज रहे थे, बल्कि ये वे लोग थे जो कठोरता से पवित्रशास्त्र के वचनों का पालन करते थे; पढना जारी रखे

परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का ज़रूरी रास्ता | Hindi Christian Song With Lyrics

परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का ज़रूरी रास्ता | Hindi Christian Song With Lyrics

ईश्वर का भय मानने का अर्थ नहीं
अनजान डर, बच निकलना, मूर्ति पूजन या अंधविश्वास।
बल्कि, ईश्वर का भय मानने का अर्थ है
प्रशंसा, विश्वास, सम्मान, समझ, देखभाल, आज्ञापालन करना।
ये है पवित्रीकरण, प्रेम, पूर्ण आराधना,
प्रतिदान, समर्पण बिन शिकायत के।

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क्या आप जानते हैं कि अंत के दिनों के मसीह के उद्धार के बिना मानवजाति किस तरह की आपदाओं का सामना करती है?

परमेश्वर कहते हैं, “अंत के दिनों में परमेश्वर के काम का उद्देश्य स्वर्ग के परमेश्वर को मनुष्यों के बीच पृथ्वी पर रहते हुए दिखाना है, और मनुष्यों को इस योग्य बनाना है कि वे परमेश्वर की आज्ञा मानें, आदर करें, और परमेश्वर से प्रेम करना जानें। यही कारण है कि वह देह में लौटकर आया है। यद्यपि आज मनुष्य देखता है कि परमेश्वर मनुष्यों के समान है, उसकी एक नाक और दो आंखें हैं और वह साधारण परमेश्वर है, अंत में परमेश्वर उन्हें दिखाएगा कि इस मनुष्य के अस्तित्व के बिना, स्वर्ग और पृथ्वी एक अभूतपूर्व बदलाव से होकर गुज़रेंगे; पढना जारी रखे

Hindi Christian Movie अंश 6 : “सिंहासन से बहता है जीवन जल” – पश्‍चाताप के मार्ग और अनन्‍त जीवन के मार्ग के मध्‍य अन्‍तर

प्रभु यीशु और सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर एक ही परमेश्‍वर हैं। प्रभु यीशु छुटकारे का कार्य करते हैं, वे पश्‍चाताप का मार्ग सिखाते हैं। अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर मानवजाति का शुद्धिकरण करने के लिए न्‍याय-कार्य करते हैं, वे अनन्‍त जीवन का मार्ग लाते हैं। अब, यदि आप पश्‍चाताप के मार्ग और अनन्‍त जीवन के मार्ग के मध्‍य के अन्‍तर को जानना चाहते हैं, तो यह लघु फिल्‍म देखें।

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परमेश्वर के नाम में एक रहस्य है : विभिन्न युगों में परमेश्वर के अलग-अलग नाम का क्या महत्व है

सूचीपत्र
यहोवा नाम यीशु क्यों बन गया?
“युगानुयुग” का अर्थ है परमेश्वर का सार और स्वभाव कभी नहीं बदलेगा, यह नहीं कि उसका नाम कभी नहीं बदलेगा
विभिन्न युगों में परमेश्वर को विभिन्न नामों से क्यों पुकारा जाता है, और परमेश्वर के नाम का क्या महत्व है?

यहोवा परमेश्वर ने पुराने नियम में हमें स्पष्ट रूप से बताया है: “मैं ही यहोवा हूँ और मुझे छोड़ कोई उद्धारकर्ता नहीं” (यशायाह 43:11)। “यहोवा … सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा” (निर्गमन 3:15)। और फिर नये नियम में लिखा है: “किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें” (प्रेरितों 4:12)। “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है” (इब्रानियों 13:8)। पुराने नियम में यह कहा जाता है कि केवल यहोवा ही परमेश्वर का नाम है और वह सदा के लिए ऐसा ही रहेगाI हालांकि, नये नियम में यह कहा जाता है कि किसी को भी केवल यीशु के नाम से ही बचाया जा सकता हैI चूँकि व्यवस्था के युग में परमेश्वर का नाम हमेशा के लिए यहोवा रहना था, तो अनुग्रह के युग में परमेश्वर को यीशु क्यों कहा गया? हम बाइबल में उल्लिखित शब्द “युगानुयुग” को कैसे समझ सकते हैं? परमेश्वर के नामों के पीछे कौन से सत्य और रहस्य छिपे हैं? चलिए, अब हम इस बारे में संगति करते हैंI

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बाइबल के अनुसार पाप क्या है? ईसाई कैसे पाप से छुटकारा पा सकते हैं?

प्रभु यीशु ने कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि जो कोई पाप करता है वह पाप का दास है। दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है” (यूहन्ना 8:34-35)। प्रभु के वचन हमें बताते हैं कि अगर लोग अपने आप को पाप के बंधन और बेड़ियों से मुक्त नहीं कर पाते, और वे पाप करना जारी रखते हैं, तो वे पाप के गुलाम हैं और कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं करेंगे। बाइबल के इस अंश को पढ़कर, कई विश्वासी भाई-बहन यह सोचेंगे कि किस तरह वे दिन में पाप करते हैं और रात में उन्हें कबूल करते हैं, और तब वे चिंता करेंगे कि वे पाप में जीते हैं और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते, और वे दिल से दुखी रहेंगे। वे प्रभु में विश्वास करते हैं, तो वे खुद को पाप से मुक्त क्यों नहीं कर पाते? हम पाप की बेड़ियों से कैसे छुटकारा पा सकते हैं? अब हम सत्य के इस पहलू पर सहभागिता करेंगे।

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किस तरह के लोग स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं?

बहुत से लोगों को लगता है कि प्रभु में विश्वास करके और अपने पापों की माफ़ी पाकर, वे पहले ही अनुग्रह के माध्यम से बचाये जा चुके हैं। उन्हें लगता है कि प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने, त्याग करने और खुद को खपाने से, भले ही वे पाप के बंधनों से मुक्त नहीं हुए हों, मगर जब प्रभु आयेगा तो उन्हें स्वर्ग के राज्य में आरोहित किया जाएगा। लेकिन क्या यह बात सच है? परमेश्वर कहते हैं, “इसलिये तुम पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ” (लैव्यव्यवस्था 11:45)। परमेश्वर धार्मिक और पवित्र है, तो वह ऐसे लोगों को अपने राज्य में कैसे प्रवेश करने दे सकता है जो लगातार पाप कर रहे हैं? किस तरह के लोग वास्तव में स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं?

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ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर

परमेश्वर कहते हैं, “परमेश्वर मौन है, और हमारे सामने कभी प्रकट नहीं हुआ, फिर भी उसका काम कभी नहीं रुका है। वह पूरी पृथ्वी पर निगाह रखता है, हर चीज़ पर नियंत्रण रखता है, और मनुष्य के सभी वचनों और कर्मों को देखता है। उसका प्रबंधन नपे-तुले चरणों में, उसकी योजना के अनुसार होता है। पढना जारी रखे

बाइबल क्या है? बाइबल किस तरह की पुस्तक है? बाइबल कैसे बनी?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर द्वारा व्यवस्था के युग का कार्य कर लेने के बाद पुराना विधान बनाया गया और तब से लोगों ने बाइबल पढ़ना शुरू किया। ने आने के बाद अनुग्रह के युग का कार्य किया, और उसके प्रेरितों ने नया विधान लिखा। इस प्रकार बाइबल के पुराने और नए विधान की रचना हुई, और आज तक वे सभी लोग, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं, बाइबल पढ़ते रहे हैं। बाइबल इतिहास की पुस्तक है। निस्संदेह, उसमें नबियों की कुछ भविष्यवाणियाँ भी शामिल हैं, और वे भविष्यवाणियाँ किसी भी मायने में इतिहास नहीं हैं। बाइबल में अनेक भाग शामिल हैं—उसमें केवल भविष्यवाणियाँ ही नहीं हैं, या केवल यहोवा का कार्य ही नहीं है, और न ही उसमें मात्र पौलुस के धर्मपत्र हैं। तुम्हें ज्ञात होना चाहिए कि बाइबल में कितने भाग शामिल हैं; पुराने विधान में उत्पत्ति, निर्गमन…शामिल हैं, और उसमें नबियों द्वारा लिखी गई भविष्यवाणियों की पुस्तकें भी हैं। अंत में, पुराना विधान मलाकी की पुस्तक के साथ समाप्त होता है। इसमें व्यवस्था के युग के कार्य को दर्ज किया गया है, जिसकी अगुआई यहोवा द्वारा की गई थी; उत्पत्ति से लेकर मलाकी की पुस्तक तक, यह व्यवस्था के युग के समस्त कार्य का विस्तृत अभिलेख है। पढना जारी रखे

बाइबल की भविष्यवाणियां पूरी हो चुकी हैं: यीशु के आगमन का स्वागत कैसे करें

लेखक: एन्युआन, फ़िलीपींस

सूचीपत्र
प्रभु का आगमन कैसे होगा?
लौटकर आने पर प्रभु कौन सा काम करेगा?
प्रभु की वापसी का स्वागत कैसे करें

बाइबल की भविष्यवाणियां पूरी हो चुकी हैं
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