Author Archives: studyingeasternlightning

एक बार बचाये जाने का अर्थ यह नहीं है कि हम हमेशा के लिए बचाये गए हैं

यांग शिन, शानडोंग प्रान्त

बैठक के बाद घर वापस लौटते वक्त, सूरज पश्चिम में डूब गया, और डूबते सूरज की आखिरी किरण दुनिया भर में फैल गई। मैं, पादरी ने जो कहा था उसके बारे में सोच रहा था: “एक बार बचाये गये, तो हम हमेशा के लिए बचाये जाते हैं, क्योंकि बाइबल कहती है, ‘कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे, और अपने मन से विश्‍वास करे कि परमेश्‍वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्‍चय उद्धार पाएगा। क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है’ (रोमियों 10:9-10)। चूँकि हम प्रभु यीशु पर विश्वास करते हैं, जब तक हम अपने दिलों में विश्वास करते हैं और उन्हें अपने मुँह से स्वीकार करते हैं, तब तक हम बचाये जाते हैं, और यदि हम एक बार बचाए जाते हैं तो हम हमेशा के लिए बचाए जाते हैं। जब तक हम काम करते रहते हैं और स्वयं को प्रभु के लिए व्यय करते हैं और बिल्कुल अंत तक सहन करते हैं, तो जब प्रभु वापस लौटेंगे, तो हम तुरंत स्वर्ग के राज्य में आरोहित किये जाएंगे!” मैंने पादरी की बातों पर आमीन कहा: “हाँ! प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था ताकि हमें छुटकारा दिलाया जा सके, इसलिए अगर जब तक हम प्रभु के नाम को पुकारते हैं, अपने पापों को स्वीकार करते हैं और प्रभु से पश्चात्ताप करते हैं, तब तक हमें पाप से मुक्त किया जायेगा और हम उनकी कृपा से बच जाएंगे—एक बार बचाये गये, हमेशा के लिए बचाये गये, और बाद में हम निश्चित रूप से स्वर्ग के राज्य में आरोहित किये जायेंगे।” प्रभु पर अपने विश्वास के इतने वर्षों में, मैंने हमेशा दृढ़ता से माना था कि यह दृष्टिकोण सही था, और मैंने कभी भी इस पर संदेह नहीं किया।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया|यीशु मसीह का प्रार्थना
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आज का वचन | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 8

आज का वचन | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 8

परमेश्वर के मार्ग पर चलें: परमेश्वर का भय मानें और बुराई से दूर रहें

एक कहावत है जिस पर तुम सब को ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि यह कहावत अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मेरे मन में हर दिन अनगिनत बार आती है। ऐसा क्यों है? क्योंकि जब भी मैं किसी के सामने होता हूँ, जब भी मैं किसी की कहानी सुनता हूँ, जब भी मैं परमेश्वर पर विश्वास करने के विषय में किसी व्यक्ति का अनुभव या उनकी गवाही को सुनता हूँ, तब मैं हमेशा यह तौलने के लिए इस कहावत का उपयोग करता हूँ कि वह व्यक्ति उस प्रकार का इंसान है या नहीं जिसे परमेश्वर चाहता है, और उस प्रकार का इंसान है या नहीं जिसे परमेश्वर पसन्द करता है। अतः फिर वह कहावत क्या है? अब तुम सब पूरी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हो। पढना जारी रखे

परमेश्वर के वचन | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 7

परमेश्वर का वचन इन हिंदी | “परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें” | अंश 7

उस मानक के सम्बन्ध में अनेक राय हैं जिसके तहत परमेश्वर किसी मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है

चूँकि प्रत्येक व्यक्ति अपने परिणाम को लेकर चिन्तित होता है, क्या तुम लोग जानते हो कि परमेश्वर किस प्रकार उस परिणाम को निर्धारित करता है? परमेश्वर किस रीति से किसी व्यक्ति के परिणाम को निर्धारित करता है? और किसी व्यक्ति के परिणाम को निर्धारित करने के लिए वह किस प्रकार के मानक का उपयोग करता है? और जब किसी मनुष्य का परिणाम अभी तक निर्धारित नहीं हुआ है, तो परमेश्वर इस परिणाम को प्रकट करने के लिए क्या करता है? क्या कोई इसे जानता है? जैसा मैं ने अभी अभी कहा था, कुछ लोग हैं जिन्होंने लम्बे समय पहले से ही परमेश्वर के वचन की खोजबीन की है। ये लोग मानवजाति के परिणाम के विषय में, उन श्रेणियों के विषय में जिस में यह परिणाम विभाजित होता है, और उन विभिन्न परिणामों के विषय में सुरागों की खोज कर रहे हैं जो विभिन्न प्रकार के लोगों का इंतज़ार कर रहे हैं। वे यह भी जानना चाहते हैं कि किस प्रकार परमेश्वर का वचन मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है, उस प्रकार का मानक जिसे परमेश्वर उपयोग करता है, और वह रीति जिसके अंतर्गत वह मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है। फिर भी अन्त में ये लोग किसी भी चीज़ का पता नहीं लगा पाते हैं। पढना जारी रखे

2020 Hindi Christian Testimony Video | मैंने जीवन जल का आनंद लिया है | मसीही जीवन

2020 Hindi Christian Testimony Video | मैंने जीवन जल का आनंद लिया है | मसीही जीवन

जिए जिंग एक ईसाई परिवार में पैदा हुई—प्रभु में उसके परिवार की आस्था तीन पीढ़ियों से चली आ रही है—बड़ी होने पर, वह कलीसिया में नियमित रूप से प्रभु की सेवा करती है। लेकिन धीरे-धीरे, वह देखती है कि कलीसिया ज़्यादा-से-ज़्यादा वीरान होती जा रही है, याजक वर्ग सिर्फ उन्हीं दकियानूसी बातों का प्रचार करते रहते हैं। यही नहीं, हर मोड़ पर उनका व्यवहार प्रभु की इच्छा के विपरीत होता है। उसे अपने जीवन के लिए कोई पोषण नहीं मिल पाता, उसकी आत्मा सूख-सूख कर काली हो जाती है। इस दुख-दर्द में, वह अक्सर प्रभु को पुकारती है, उसके जल्द वापस आने को तरसने लगती है। पढना जारी रखे

Hindi Christian Video | परमेश्वर के चीन में प्रकट होकर कार्य करने का बहुत महत्व है

Hindi Christian Video | परमेश्वर के चीन में प्रकट होकर कार्य करने का बहुत महत्व है

मुख्य किरदार हमेशा प्रभु के लिए खुद को पूर जोश से खपाती और प्रभु की वापसी का इंतज़ार करती है। फिर, संयोग से उसे पता चलता है कि प्रभु चीन में देहधारी होकर वापस आ चुका है। उसे हैरत के साथ-साथ बहुत खुशी होती है, लेकिन एक सवाल उसे अब भी कचोटता है : पुराने और नये नियम के युगों में, परमेश्वर ने अपना कार्य हमेशा इज्राएल में किया, इसलिए जायज़ होगा कि वापस आने पर वह ऐसा इज्राएल में ही करे। फिर वह चीन में प्रकट होकर अपना कार्य कैसे कर सकता है? पढना जारी रखे

मसीही वीडियो | अब मुझे बाइबल और परमेश्वर के बीच का रिश्ता समझ आ गया है

मसीही वीडियो | अब मुझे बाइबल और परमेश्वर के बीच का रिश्ता समझ आ गया है

मुख्य किरदार, एक ईसाई है जिसकी नज़र यूट्यूब पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बनाई गई कुछ फ़िल्मों पर पड़ती है। उसे ये फ़िल्में सच्ची औरअपनी आस्था के लिए उपयोगी लगती है। जब वह प्रभु यीशु के लौटकर आने और उसके द्वारा परमेश्वर के घर से न्याय का कार्य शुरू करने के बारे में एक फ़िल्म देखती है, तो उसे बहुत ख़ुशी होती है और वह इसकी छानबीन करना शुरू कर देती है। लेकिन एक दिन वह असमंजस में पड़ जाती है जब उसकी नज़र एक फ़िल्म के शीर्षक “बाइबल से बाहर निकलें” पर पड़ती है, वह सोच में पड़ जाती है कि आस्था में बाइबल से बाहर जाने की ज़रूरत क्यों है। पढना जारी रखे

दाऊद से सीखना: राजा दाऊद, परमेश्वर के हृदयानुसार क्यों था?

जब भी राजा दाऊद का जिक्र होता है, मेरे दिमाग में उसके किशोरावस्था की छवि उभरती है, जब उसने यहोवा की ताकत पर भरोसा करते हुए, गुलेल का इस्तेमाल कर एक पत्थर के साथ विशाल गोलियत को मार गिराया था। बाद में, वह युद्ध पर गया, कई लड़ाइयाँ जीती और कई वीरता के कर्म किए। हालाँकि, बाइबल में यह भी दर्ज है कि जब दाऊद इस्राएल का राजा बना, तब उसने ऊरिय्याह को मरवा दिया और फिर उसकी पत्नी बतशेबा को अपने साथ ले गया। इसलिए, परमेश्वर का धर्मी स्वभाव दाऊद पर आया और पैगंबर नातान के माध्यम से, परमेश्वर ने उससे यह कहते हुए बात की, “इसलिये अब तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी, क्योंकि तू ने मुझे तुच्छ जानकर हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी को अपनी पत्नी कर लिया है” (2 शमूएल 12:10)। राजा दाऊद ने पाप किया और परमेश्वर ने उसे दंड दिया। तो इसके बाद परमेश्वर दाऊद से खुश क्यों हुआ और उसने यह क्यों कहा कि दाऊद उसके हृदय के अनुसार है? मैं इसके कारण बहुत भ्रमित महसूस कर रहा था। इसे समझ पाने के लिए, मैंने कई बार परमेश्वर से प्रार्थना की और खोज की, और मुझे बाइबल में बहुत से पद मिले। अपने भाई-बहनों के साथ तलाशने और संगति करने के बाद, मुझे आखिरकार इसका जवाब मिल गया।

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क्या बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व कर सकती है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “परमेश्वर स्वयं ही जीवन है, सत्य है, और उसका जीवन और सत्य साथ-साथ अस्तित्व में रहते हैं। जो सत्य को प्राप्त करने में असफल रहते हैं वे कभी भी जीवन को प्राप्त नहीं कर सकते। बिना मार्गदर्शन, सहायता और सत्य के प्रावधान के तुम केवल शब्दों, सिद्धांतों और इन सबसे बढ़कर मृत्यु को ही प्राप्त करोगे। परमेश्वर का जीवन सतत विद्यमान है, और उसका सत्य और जीवन एक साथ अस्तित्व में रहते हैं। पढना जारी रखे

“एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान” का रहस्‍य

ली चेंग

भाइयो और बहनो, आप सबको शांति मिले! प्रभु की तैयारियों के लिए उनका आभार, जिनकी वजह से हम बाइबल के सत्यों पर यहाँ संवाद करने आए हैं। प्रभु हमारा मार्गदर्शन करें। आज, मैं सभी से “एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान” विषय पर चर्चा करना चाहूँगा।

जैसा कि प्रभु में विश्‍वास करने वाले सभी लोग जानते हैं, “एक मृत व्‍यक्ति का पुनरुत्‍थान” यीशु के लौटने के समय से संबंध रखता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे देखने का हम सभी ईसाई बेताबी से इंतज़ार कर रहे हैं। तो फ़िर, एक “मृत इंसान” का पुनरुत्‍थान किस तरह हो सकता है? कई लोग यहेजकेल की पुस्‍तक के अध्‍याय 37, पद 5-6 के बारे में विचार करेंगे: “परमेश्वर यहोवा तुम हड्डियों से यों कहता है: देखो, मैं आप तुम में साँस समाऊँगा, और तुम जी उठोगी। मैं तुम्हारी नसें उपजाकर मांस चढ़ाऊँगा, और तुम को चमड़े से ढाँपूँगा; और तुम में साँस समाऊँगा और तुम जी जाओगी; और तुम जान लोगी कि मैं यहोवा हूँ।” यूहन्‍ना के सुसमाचार, अध्‍याय 6, पद 39 में यीशु ने कहा था: “और मेरे भेजनेवाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊँ, परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँ।” 1 कुरिन्थियो की पुस्‍तक के अध्‍याय 15, पद 52-53 में यह पढ़ने में आता है: “और यह क्षण भर में, पलक मारते ही अन्तिम तुरही फूँकते ही होगा। क्योंकि तुरही फूँकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे। क्योंकि अवश्य है कि यह नाशवान् देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले।” इसके अलावा, यदि लोग बाइबल का शाब्दिक अर्थ समझें तो, वे यह मानेंगे कि: अंत के दिनों में, जब प्रभु के अव‍तरित होने की घड़ी निकट आएगी, उस समय कई महान और चमत्‍कारिक चीज़ें घटित होंगी। अपनी सर्वशक्तिमत्‍ता से, वे कई पीढ़ियों से सोए हुए संतों के शरीरों को पुनर्जीवित करेंगे। वे उन्‍हें उनकी कब्रों में से, धरती या समंदर के नीचे से उठाएँगे। जमीन के नीचे या सागर की तलहटी में जो हज़ारों कंकाल पहले ही सड़ चुके हैं, उन्हें तत्‍काल एक नया जीवन दिया जाएगा। सड़न जादुई तरीके से लुप्‍त हो जाएगी और वे सभी महिमा में प्रवेश करेंगे। कितना भव्‍य होगा वह दृश्‍य! … “एक मृत व्‍यक्ति के पुनरुत्‍थान” को लेकर हमारे दृष्टिकोण और कल्‍पनाएं भी ऐसी ही हैं। यह भविष्‍यवाणी आख़िर किस तरह पूरी होगी? क्‍या यह वाकई वैसी ही चमत्‍कारिक होगी जैसी होने की हम कल्‍पना करते हैं? क्‍या प्रभु इस घटना को हमारी कल्‍पनाओं के अनुरूप अंजाम देंगे?

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क्या पूरी बाइबल ईश्वर की प्रेरणा से लिखी गयी है? | Hindi Christian Song With Lyrics

क्या पूरी बाइबल ईश्वर की प्रेरणा से लिखी गयी है? | Hindi Christian Song With Lyrics

इंसान आज बाइबल और ईश्वर को एक माने।
ईश्वर ने बस बोले बाइबल में लिखे वचन ही,
इंसान ऐसा माने।
इंसान माने, वो सब ईश्वर ने कहा।

विश्वासी तो यह भी मानें,
नया-पुराना नियम लिखा भले ही इंसान ने,
पर वे लिखे गए ईश्वर की ही प्रेरणा से,
पवित्रात्मा के वचन दर्ज किए इंसान ने।
ऐसा सोचना इंसान की भूल है।
यह असल तथ्यों के अनुसार नहीं है।
असल में, भविष्यकथन की किताबों के अलावा
पुराना नियम बीती बातों का अभिलेख है।

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